क्या NATO से निकल जाएगा अमेरिका? यूरोप 5 से 10 सालों में US की जगह लेने की कर रहा है प्लानिंग!
NATO: डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के बाद नाटो में अब दरार पड़ती दिख रही है। यूरोपीय राष्ट्र ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी समेत बाकी के अन्य देश अपनी रक्षा के लिए इस संभावना पर चर्चा कर रहे हैं कि किस तरह से अमेरिका को नाटो से अलग किया जाए। इस बीच अमेरिका ने नाटो की कमांडरशिप छोड़ने का ऐलान किया है।
दरअसल रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू हुए तीन साल से ज्यादा का समय बीत चुका है। इस युद्ध को रोकने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जिस तरह से यूरोपीय देशों को दरकिनार करके खुद ही रूस और यूक्रेन के बीच शांति स्थापित करने की कोशिश की है, उससे यूरोपीय देश बहुत परेशान है।

क्यों यूरोपीय देश NATO में लेना चाहते हैं अमेरिका की जगह?
इसी वजह से यूरोपीय देश पांच से दस सालों में नाटो में अमेरिका की जगह लेने की प्लानिंग कर रहे हैं। फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जर्मनी और नॉर्डिक जैसे देश अनौपचारिक रूप से उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) सुरक्षा ब्लॉक को नया स्वरूप देने की कोशिश में लगे हैं।
यह खबर उस वक्त सामने आई है, जब ब्लूमबर्ग न्यूज ने शुक्रवार (21 मार्च) को बताया कि नाटो यूरोप और कनाडा से अपने हथियारों और उपकरणों के भंडार को 30 प्रतिशत तक की वृद्धि करने की योजना बना रहा है। यह कदम उसने अमेरिका के साथ राजनीतिक तनाव और ट्रंप की बार-बार नाटो से बाहर निकालने की धमकियों के बीच उठाया है।
रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि यूरोपीय देश नाटो में अमेरिकी दादागीरी से परेशान हैं। इसीलिए, अब ये इस कोशिश में जुट गए हैं कि किसी प्रकार से अमेरिका को नाटो संगठन से बाहर रखा जाए। हालांकि, कुछ रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप सिर्फ बयानबाजी कर रहे हैं और उनका गठबंधन में कोई बड़ा बदलाव करने का इरादा नहीं है।
इस बीच, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में ऐसा कहा गया है कि खुद ही अमेरिका ने नाटो की कमांडरशिप छोड़ने की घोषणा कर दी है। वहीं, अब यूरोपीय देश जून में हेग में होने वाले नाटो के वार्षिक शिखर सम्मेलन से पहले इस योजना को अमेरिका के समक्ष प्रस्तुत करना चाहते हैं।
वर्तमान में, अमेरिका नाटो के 3.5 बिलियन डॉलर के वार्षिक बजट का 15.8% योगदान देता है और पूरे यूरोप में उसके 80,000 से 100,000 सैनिक तैनात हैं। जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे यूरोपीय देशों ने पहले ही घोषणा कर दी है कि वे अपने रक्षा बजट और सैन्य निवेश में वृद्धि करेंगे।
सरकारी अधिकारियों के हवाले से एफटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि यूरोपीय क्षमताओं को उस स्तर तक बढ़ाने के लिए अनुमानित पांच से 10 साल का अतिरिक्त खर्च लगेगा, जब वे अमेरिकी क्षमताओं की जगह ले सकें। इसलिए, यूरोप अमेरिकी सहायता के बिना ही आगे बढ़ने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए नाटो में खर्च को बढ़ाना ही एक मात्र रास्ता है।
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