Petrol Price Hike: पेट्रोल ने फिर बढ़ाई आम आदमी की टेंशन, BJP और गैर-BJP राज्यों में क्यों अलग हैं कीमतें?
Petrol Price Hike May 2026: देशभर में पेट्रोल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और राज्यों के अलग-अलग टैक्स ढांचे की वजह से आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है।
नई दरों के लागू होने के बाद दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई समेत कई बड़े शहरों में पेट्रोल 3 रुपये से ज्यादा महंगा हो गया है।

सबसे ज्यादा बढ़ोतरी भुवनेश्वर में दर्ज की गई, जहां पेट्रोल के दाम में ₹3.60 प्रति लीटर की छलांग देखने को मिली। इस ताज़ा वृद्धि के बाद राजधानी दिल्ली में पेट्रोल ₹97 के पार निकल गया है, वहीं कोलकाता में यह ₹109 के करीब पहुंच चुका है।
State Wise Petrol Rate: महानगरों का हाल-कहां कितनी बढ़ा दाम?
देश के पांच सबसे बड़े महानगरों में पेट्रोल के नए दामों ने मिडिल क्लास का बजट बिगाड़ दिया है। देश की राजधानी नई दिल्ली में पेट्रोल ₹3.00 महंगा होकर अब ₹97.77 प्रति लीटर पर मिल रहा है। दिल्ली से सटे एनसीआर के इलाकों की बात करें तो नोएडा में ₹3.30 की बढ़त के साथ दाम ₹98.04 और गुरुग्राम में ₹2.99 की बढ़ोतरी के बाद नया रेट ₹98.29 हो गया है।
कोलकाता में सबसे ज्यादा झटका
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में पेट्रोल की कीमतों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यहां 3.29 रुपये की वृद्धि के बाद नया रेट 108.74 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। यह देश के बड़े शहरों में सबसे महंगे पेट्रोल में शामिल हो गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले वैट और स्थानीय टैक्स के कारण अलग-अलग राज्यों में कीमतों में बड़ा अंतर देखने को मिलता है।
मुंबई और चेन्नई में भी बढ़े दाम
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में पेट्रोल 3.10 रुपये महंगा होकर 106.64 रुपये प्रति लीटर हो गया है। महाराष्ट्र में पहले से ही पेट्रोल पर टैक्स ज्यादा माना जाता है, जिसके कारण यहां कीमतें दिल्ली से काफी ऊपर रहती हैं। चेन्नई में भी पेट्रोल की कीमत में 3.10 रुपये का इजाफा हुआ है और अब यहां एक लीटर पेट्रोल 103.90 रुपये में मिल रहा है।
बेंगलुरु और भुवनेश्वर में भी असर
कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में पेट्रोल 3.21 रुपये महंगा होकर 106.17 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। वहीं ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में सबसे भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई, जहां 3.60 रुपये की वृद्धि के बाद पेट्रोल 104.57 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है।
VAT on Petrol India States: BJP और गैर-BJP राज्यों में क्यों अलग हैं पेट्रोल के दाम?
भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें सिर्फ अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों से तय नहीं होतीं, बल्कि केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले टैक्स भी इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं। केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी लगाती है, जबकि राज्य सरकारें VAT यानी वैल्यू एडेड टैक्स वसूलती हैं। यही वजह है कि अलग-अलग राज्यों में पेट्रोल की कीमतें अलग दिखाई देती हैं।
BJP शासित कुछ राज्यों ने समय-समय पर VAT में कटौती कर जनता को राहत देने की कोशिश की है, जबकि कई गैर-BJP राज्यों में टैक्स दरें अपेक्षाकृत ज्यादा होने के कारण पेट्रोल महंगा बना हुआ है। हालांकि यह पूरी तरह राजनीतिक आधार पर तय नहीं होता, क्योंकि कई राज्यों की आर्थिक स्थिति और राजस्व जरूरतें भी टैक्स दरों को प्रभावित करती हैं।
उदाहरण के तौर पर दिल्ली में VAT अपेक्षाकृत कम होने के कारण कीमतें मुंबई और कोलकाता से कम रहती हैं। वहीं महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में राज्य कर अधिक होने की वजह से पेट्रोल की कीमतें ऊंचे स्तर पर पहुंच जाती हैं। दक्षिण भारत के कई राज्यों में भी स्थानीय टैक्स संरचना के कारण पेट्रोल 100 रुपये प्रति लीटर से ऊपर बना हुआ है।
Fuel Tax Comparison BJP vs Congress: भाजपा शासित राज्य उत्तर प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड:
भाजपा शासित राज्यों में पेट्रोल की कीमतें तुलनात्मक रूप से ₹100 के नीचे बनी हुई हैं। उत्तर प्रदेश के नोएडा और हरियाणा के गुरुग्राम के उदाहरण बताते हैं कि यहाँ राज्य सरकारों ने वैट की दरों को एक सीमा के भीतर रखा है। ₹98 के आसपास की ये कीमतें दिखाती हैं कि यहां केंद्र की अपील के बाद करों में कुछ हद तक संतुलन बनाने की कोशिश की गई है।
गैर-भाजपा शासित राज्य कर्नाटक, तमिलनाडु:
इसके विपरीत, गैर-भाजपा शासित राज्यों में पेट्रोल की कीमतें ₹100 के स्तर को काफी पीछे छोड़ चुकी हैं। बेंगलुरु (कर्नाटक) में ₹106.17 की कीमतें यह दर्शाती हैं कि यहां राज्य सरकारों का वैट काफी अधिक है।
वैश्विक संकट का दिख रहा असर
विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता का असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर सीधे पड़ता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत बढ़ने पर घरेलू बाजार में भी ईंधन महंगा हो जाता है।
पेट्रोल की बढ़ती कीमतों का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। ट्रांसपोर्ट महंगा होने से खाने-पीने की चीजों, सब्जियों और रोजमर्रा के सामान की कीमतों पर भी असर पड़ता है। ऐसे में आम आदमी की चिंता लगातार बढ़ रही है।














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