श्रीलंका में सैन्य उद्देश्यों के लिए नहीं होने देंगे चीनी ‘जासूसी विमान’ का इस्तेमालः रानिल विक्रमसिंघे
जहाज युआन वांग 5 मंगलवार स्थानीय समयानुसार सुबह आठ बजकर 20 मिनट पर हंबनटोटा पोर्ट पर उतर गया। श्रीलंका के राष्ट्रपति ने कहा कि चीन को इस जहाज का सैन्य उद्देश्यों के इस्लेमाल के लिए उपयोग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
कोलंबो, 16 अगस्तः भारत की आपत्तियों के बावजूद चीनी जहाज युआन वांग 5 मंगलवार स्थानीय समयानुसार सुबह आठ बजकर 20 मिनट पर हंबनटोटा पोर्ट पर उतर गया। यह जहाज 22 अगस्त तक इस बंदरगाह पर रहेगा। इससे पहले श्रींलकाई सरकार ने जहाज को एंट्री देते वक्त सफाई दी थी कि बीजिंग को बंदरगाह 99 साल के लिए लीज पर दिया है। इसलिए जहाज को एंट्री देने की अनुमति न देने के पीछे कोई कारण नहीं था। वहीं, भारत की चिंता को लेकर श्रीलंका के राष्ट्रपति ने कहा कि चीन को इस जहाज का सैन्य उद्देश्यों के इस्लेमाल के लिए उपयोग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

श्रीलंका ने बदला अपना फैसला
भारत को चिंता है कि इस जहाज का इस्तेमाल जासूसी के लिए हो सकता है। इसके चलते उसने श्रीलंका को अपनी चिंताओं से अवगत करवाया था। इसके बाद श्रीलंका ने एक बार अनुमति रद्द कर दी थी, और इसे अनिश्चितकाल तक के लिए टाल दिया था। लेकिन अपने ही फैसले को एक बार फिर से बदलते हुए श्रीलंकाई सरकार ने चीनी जासूसी जहाज को हंबनटोटा बंदरगाह पर आने की अनुमति दे दी। न सिर्फ भारत बल्कि अमेरिका ने भी उपग्रहों और बैलिस्टिक मिसाइलों को ट्रैक करने वाले इस वाहन के आने को लेकर चिंता जताई थी।

मिलट्री नहीं, रिसर्च शिप है यूआन वांग 5
इससे पहले श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने जापान के योमिउरी शिंबुन अखबार को दिए गए एक इंटरव्यू में कहा था कि हम नहीं चाहते कि हंबनटोटा का इस्तेमाल सैन्य उद्देश्यों के लिए किया जाए। उन्होंने कहा कि मौजूदा जहाज मिलिट्री जहाज की श्रेणी में नहीं आता। यह रिसर्च शिप की कैटगरी में आता है। इसलिए हमने इस जहाज के हंबनटोटा पोर्ट पर आने की अनुमति दी। बीते सप्ताह चीन के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने भारत का नाम लिए बगैर कहा था कि कुछ देशों के द्वारा श्रीलंका पर दबाव बनाने के लिए तथाकथित सुरक्षा चिंताओं का हवाला देना बिल्कुल अनुचित है।

चीन के पास 7 ऐसे जासूसी शिप
यूआन वांग 5 जहाज स्पेस और सैटेलाइट ट्रैकिंग में महारत हासिल है। चीन युआन वांग क्लास शिप के जरिए सैटेलाइट, रॉकेट और इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल यानी ICBM की लॉन्चिंग को ट्रैक करता है। चीन के पास इस तरह के 7 शिप हैं, जो पूरे प्रशांत, अटलांटिक और हिंद महासागर में काम करने में सक्षम हैं। ये शिप जासूसी कर बीजिंग के लैंड बेस्ड ट्रैकिंग स्टेशनों को पूरी जानकारी भेजते हैं। युआन वांग-5 मिलिट्री नहीं बल्कि पावरफुल ट्रैकिंग जहाज है। यह जहाज अपनी आवाजाही तब शुरू करता है, जब चीन या कोई अन्य देश मिसाइल टेस्ट कर रहा होता है।

750 किलोमीटर दूर तक कर सकता है निगरानी
यह शिप लगभग 750 किलोमीटर दूर तक आसानी से निगरानी कर सकता है। इसमें एक बड़ा परवलयिक ट्रैकिंग एंटीना और विभिन्न प्रकार के सेंसर लगे हुए हैं। इसके संचालन के लिए 400 से अधिक चालक दल की आवश्यकता होती है। हंबनटोटा पोर्ट पर पहुंचने के बाद युआन वांग-5 की पहुंच दक्षिण भारत के प्रमुख सैन्य और परमाणु ठिकाने जैसे कलपक्कम, कुडनकुलम तक होगी। साथ ही केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के कई बंदरगाह चीन के रडार पर होंगे। कुछ एक्सपर्ट का यह भी कहना है कि चीन भारत के मुख्य नौसैना बेस और परमाणु संयंत्रों की जासूसी के लिए इस जहाज को श्रीलंका भेज रहा है।












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