भारत में ही क्यों शरण ले रही हैं शेख हसीना, क्यों हिन्दुस्तान अभी उनके लिए सबसे सुरक्षित जगह है?
Sheikh Hasin: बांग्लादेश में हिंसा और आगजनी के बीच बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनकी बहन शेख रेहाना ने देश छोड़ दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक शेख हसीना भारत के त्रिपुरा राज्य की राजधानी अगरतला की तरफ रवाना हुई हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर बांग्लादेश में गृह युद्ध की स्थिति के बीच शेख हसीना ने अपने लिए 'सुरक्षित जगह' के तौर पर भारत ही क्यों चुना है।
असल में शेख हसीना के लिए फिलहाल भारत से ज्यादा सुरक्षित जगह कोई और नहीं है। भारत की पनाह में शेख हसीना बिल्कुल सुरक्षित रहेंगी। शेख हसीना के भारत की मोदी सरकार से बेहतर संबंध हैं। इससे पहले यूपीए सरकार के दौरान भी शेख हसीना के भारत से अच्छे संबंध रहे हैं। बाकी पड़ोसी देशों के मुकाबले बांग्लादेश के संबंध भारत से ज्यादा बेहतर हैं...इसलिए वह भारत में शरण ले रही हैं।

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कांग्रेस और भाजपा दोनों से शेख हसीना के अच्छे संबंध
असल में शेख हसीना के संबंध भारत में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस दोनों से बहुत अच्छे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में शेख हसीना लगातार भारत आते रही हैं। पीएम मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में 9 जून 2024 को भी शेख हसीना भारत आई थीं। इस दौरान शेख हसीना कांग्रेस पार्टी की राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी, सांसद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मिलने उनके आवास पर भी गई थीं। वहीं पीएम मोदी और शेख हसीना के बीच भी मैत्रीपूर्ण संबंध है।
हालांकि सोनिया गांधी से मुलाकात के राजनीति मायने कुछ नहीं थे। गांधी परिवार और शेख हसीना के परिवार का रिश्ता करीब 5 दशक से पुराना है। शेख हसीना और गांधी परिवार के बीच के संबंध बेहद करीबी हैं।
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पहले भी 5 साल भारत में पनाह ले चुकी हैं शेख हसीना
शेख हसीना के पिता और बांग्लादेश के संस्थापक नेता शेखमुजीबुर रहमान के तत्कालीन भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध थे। इंदिरा गांधी ने 1971 में बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के दौरान अहम भूमिका निभाई थी। भारत ने पाकिस्तान से बांग्लादेश की स्वतंत्रता का समर्थन किया था। उसी वक्त से गांधी परिवार और शेख हसीना के परिवार के बीच बेहद करीबी रिश्ता है।
जब बांग्लादेश के राष्ट्रपति शेखमुजीबुर रहमान की सैन्य विद्रोह में हत्या कर दी गई थी तब, शेख हसीना का परिवार भारत में पनाह लेने आया था। इंदिरा गांधी के बुलावे पर शेख हसीना और उनका परिवार 5 साल से अधिक समय तक दिल्ली में रहा था।
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