राष्‍ट्रपति ओबामा के बाद कैमरुन के साथ पीएम मोदी की नई 'केमेस्‍ट्री'

लंदन। ब्रिटेन के पीएम डेविड कैमरुन जिनकी उम्र है 49 वर्ष और भारत के पीएम नरेंद्र मोदी जिनकी उम्र है 65 वर्ष, लेकिन पिछले कुछ समय से दोनों के बीच एक नए तरह का ही बांड देखने को मिल रहा है।

न सिर्फ कैमरुन ने पीएम मोदी का स्‍वागत किया बल्कि आधिकारिक निवास चेकर्स में भी रुकवाया। अपने तीन दिन के दौरे पर पीएम नरेंद्र मोदी और कैमरुन के बीच एक नया रिश्‍ता गुरुवार को भी देखने को मिला।

जहां पीएम मोदी ने ब्रिटेन के साथ हुई डील को एक अहम पल बताया तो वहीं कैमरुन ने भी भरोसा जताया है कि भारत के साथ रिश्‍ते अब नए मोड़ पर जाएंगे।

कुछ तस्‍वीरों को देखिए और अंदाजा लगाइए कि आखिर एक युवा नेता कैमरुन और एक 65 वर्ष के पीएम मोदी के बीच किस तरह की केमेस्‍ट्री क्‍यों डेवलप हो रही है।

कैमरुन की बधाई

कैमरुन की बधाई

पिछले वर्ष मई में जब पीएम नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनावों में एतिहासिक जीत हासिल की थी तो ब्रिटेन के पीएम डेविड कैमरुन की ओर से सबसे पहले पीएम मोदी के लिए बधाईयां आईं।

फिर एक बार कैमरुन सरकार

फिर एक बार कैमरुन सरकार

इस वर्ष जब मई में डेविड कैमरुन लगातार तीसरी बार ब्रिटेन के पीएम बने थे तो पीएम मोदी ने उनको बधाई दी। ब्रिटेन में इस बार चुनावी नारा था, 'फिर एक बार कैमरुन सरकार।'

मोदी के लिए रेड कार्पेट बिछाते कैमरुन

मोदी के लिए रेड कार्पेट बिछाते कैमरुन

ब्रिटिश डेली द टेलीग्राफ ने लिखा है कि यह वही मोदी हैं जिन्‍हें कभी ब्रिटेन ने एंट्री देने से इंकार कर दिया था और आज जिनके स्‍वागत में खुद पीएम कैमरुन रेड कार्पेट बिछा रहे हैं। कैमरुन ने भी एक वीडियो पोस्‍ट किया और लिखा कि वह पीएम मोदी का स्‍वागत करके काफी खुश हैं।

कैमरुन के साथ रिश्‍ते

कैमरुन के साथ रिश्‍ते

इस बात में कोई शक नहीं है कि इस समय पीएम मोदी अमेरिका के राष्‍ट्रपति बराक ओबामा के बाद ब्रिटेन के पीएम कैमरुन के साथ अपने रिश्‍तों को मजबूत करने में लगे हैं।

वर्ष 2020 तक कैमरुन रहेंगे पीएम

वर्ष 2020 तक कैमरुन रहेंगे पीएम

जहां ओबामा अगले वर्ष सत्‍ता से चले जाएंगे तो कैमरुन वर्ष 2020 तक सत्‍ता पर काबिज रहने वाले हैं। ऐसे में शायद पीएम मोदी जानते हैं कि ब्रिटेन के साथ संबंधों की मजबूती उनके हित में रहेगी।

भारत की जरूरत कैमरुन को

भारत की जरूरत कैमरुन को

बीबीसी की मानें तो भारत इस समय तेजी से उभरती हुई अर्थव्‍यवस्‍था है और कैमरुन इस अर्थव्‍यवस्‍था में ब्रिटेन की भी भागीदारी तय करना चाहते हैं। इस मकसद से वह ब्रिटिश फर्म को 'मेक इन इंडिया' में निवेश के लिए उकसा रहे हैं।

ब्रिटेन में भारत का व्‍यवसाय

ब्रिटेन में भारत का व्‍यवसाय

अगर यह कहा जाए कि भारतीय कंपनियां इस समय ब्रिटेन में रोजगार के कई अवसर मुहैया करा रही हैं तो गलत नहीं होगा। ब्रिटेन में मौजूद भारतीय कंपनियों में इस समय ब्रिटेन के 1,10,000 से ज्‍यादा कर्मचारी लगे हुए हैं।

भारत के साथ बिजनेस

भारत के साथ बिजनेस

पीएम कैमरुन ने कल भी कहा था कि वह चाहते हैं कि ब्रिटेन पीएम मोदी के इकोनॉमिक एजेंडे को पूरा करने वाला दुनिया का पहला देश बने।

आम की राजनीति

आम की राजनीति

अल्‍फांसो आम पर जब यूरोपियन यूनियन ने बैन लगाया तो कैमरुन ने भारत को विश्‍वास दिलाया था कि वह यूरोपियन यूनियन से इस मसले पर जरूर बात करेंगे। यह सिर्फ एक शुरुआत थी। पीएम मोदी जानते हैं कि अगर यूरोपियन यूनियन में भारत के व्‍यापारिक पक्ष को मजबूत करना है तो कैमरुन का साथ उनके लिए काफी अहम है।

पिछले वर्ष हुई थी मुलाकात

पिछले वर्ष हुई थी मुलाकात

पीएम मोदी और पीएम कैमरुन के बीच पिछले वर्ष ऑस्‍ट्रेलिया में जी-20 शिखर सम्‍मेलन के दौरान पहली मुलाकात हुई थी। इसके बाद दोनों नेता इस वर्ष सितंबर में न्‍यूयॉर्क में मिले थे।

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