Ram Mandir Chanda Chori: हिंदू खतरे में है? कौन जिम्मेदार? 2027 चुनाव में असर पड़ेगा? शंकराचार्य का खुलासा

Oneindia Exclusive Interview Ram Mandir Chanda Chori: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे (चंदा) की कथित अनियमितताओं और चोरी के आरोप इन दिनों पूरे देश में चर्चा का विषय बने हुए हैं। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित SIT ने जांच शुरू की, आठ लोगों की गिरफ्तारी हुई, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया। ट्रेजरर स्वामी गोविंद देव गिरि मामले को संभाल रहे हैं।

ट्रस्ट ने कुल दान की राशि हजारों करोड़ बताई है, जिसमें ज्यादातर निर्माण कार्य और फिक्स्ड डिपॉजिट में इस्तेमाल हुआ। SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट में काउंटिंग प्रक्रिया में लापरवाही सामने आई है, लेकिन बड़े स्तर का सिस्टेमैटिक घोटाला अभी साबित नहीं हुआ है।

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इस बीच जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand) ने Oneindia Hindi के साथ Exclusive Interview में खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने ट्रस्ट की जवाबदेही, राजनीतिक नेतृत्व, RSS की विचारधारा और सनातन परंपरा पर सवाल उठाए। आइए आपको रूबरू कराते हैं...

सवाल: SIT गठन के बावजूद ट्रेजरर ने इस्तीफा क्यों नहीं दिया? उनकी जिम्मेदारी क्या है और घोटाला कितना बड़ा हो सकता है?

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का जवाब: ट्रेजरर स्वामी गोविंद देव गिरिपर सबसे बड़ी जिम्मेदारी होनी चाहिए थी। वे अभी भी पूरी व्यवस्था संभाल रहे हैं। चंपत राय और अनिल मिश्रा जैसे दो लोगों के इस्तीफे से मामला ठंडा करने की कोशिश नजर आ रही है। गड़बड़ी हुई है, यह स्पष्ट है। कोषाध्यक्ष को सबसे पहले जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए था। वे अभी भी स्टियरिंग संभाल रहे हैं। अब वे जिस दिशा में चाह रहे हैं, उसी तरफ गाड़ी मोड़ रहे हैं।

सवाल: दान का औसत ₹5 प्रति व्यक्ति बताया गया। क्या यह विश्वसनीय है? घपले का स्तर कितना हो सकता है?

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का जवाब: पूरे देश को ₹5 के औसत पर भरोसा नहीं है। कई भक्त लाखों रुपये चढ़ाते हैं, कोई ₹50,000 देता है। कम से कम ₹100 का औसत रखना चाहिए। ₹5 का औसत मानें तो न्यूनतम ₹95 प्रति व्यक्ति का घपला समझा जा सकता है। लोगों के पास ठोस डेटा नहीं है, लेकिन बातें लगातार निकल रही हैं। भक्तों की आस्था से जुड़ा मुद्दा है, इसलिए पारदर्शिता जरूरी है।

सवाल: राम मंदिर निर्माण में कुल खर्च और दान की राशि पर क्या जानकारी है? 391 करोड़ का आंकड़ा कितना सही?

स्वामी जी: कहा जा रहा है कि पूरा मंदिर चलाने में करीब 391 करोड़ रुपये लगे। लेकिन असली मुद्दा दान की पारदर्शिता का है। लाखों हिंदू भक्तों ने श्रद्धा से चढ़ावा दिया। अगर इसमें गड़बड़ी हुई तो यह विश्वासघात है।

सवाल: प्रधानमंत्री मोदी, CM योगी, RSS और BJP ने निर्माण का पूरा श्रेय लिया। अब घोटाले में उनकी जिम्मेदारी कितनी?

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: ट्रस्ट में खास लोगों को जगह दी गई। पुराने धर्माचार्यों वाले ट्रस्ट को ठुकराकर नया ट्रस्ट बनाया गया। जिम्मेदारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बनती है, क्योंकि उन्होंने अपनी विश्वस्त टीम चुनी। UP सरकार (CM योगी आदित्यनाथ) उनका दूसरा इंजन है, दोनों मिलकर एक ही हैं। जब श्रेय लेने की बारी थी तो हर कैमरे में दिखते थे, अब सवाल उठने पर जवाबदेही टालने की कोशिश? प्रधानमंत्री मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ दोनों की जिम्मेदारी बनती है।

सवाल: चंदा चोरी पर RSS के स्टैंड पर आप क्या कहते हैं?

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: RSS के साहित्य में राम को मनुष्य बताया गया है, भगवान नहीं। अविमुक्तेश्वरानंद ने आगे कहा कि RSS के साहित्य में भगवान राम को एक आदर्श मनुष्य के रूप में प्रस्तुत किया गया है, भगवान के रूप में नहीं। इसी को लेकर उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जो लोग भगवान राम को ईश्वर नहीं मानते, उन्हें राम मंदिर की व्यवस्था संभालने का अधिकार कैसे दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सनातन समाज के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि जो राम को भगवान नहीं मानते, वे भगवान राम के मंदिर की व्यवस्था में क्यों शामिल हैं। उनके मुताबिक, इस विषय पर खुलकर चर्चा नहीं होती।

उन्होंने रामचरितमानस की पंक्ति 'व्यापक ब्रह्म निरंजन निर्गुण विगत विनोद, सो अज प्रेम भगति बस कौशल्या के गोद' (अर्थ-जो सर्वव्यापी, मायारहित, गुणहीन, विकार-विनोद से परे और अजन्मे ब्रह्म हैं, वे ही परम प्रेम और भक्ति के वश होकर माता कौशल्या की गोद में बाल रूप में खेल रहे हैं) का उल्लेख करते हुए कहा कि जो लोग भगवान राम के इस स्वरूप में आस्था रखते हैं, मंदिर की व्यवस्था संभालने का अधिकार भी उन्हीं के पास होना चाहिए। अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि सनातन धर्म की मान्यताओं में विश्वास रखने वाले लोगों को ही मंदिर प्रबंधन में प्रमुख भूमिका मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि संघ से जुड़े लोगों को इस व्यवस्था से हटाया जाना चाहिए।

सवाल: हिंदू खतरे में है? किसने खतरे में डाला? बाहरी ताकतें या अंदरूनी?

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: हिंदू खतरे में है, बिल्कुल सही। लेकिन किसी बाहरी विदेशी या विधर्मी शक्ति से नहीं। इन्हीं 'कालनेमियों' (नकली हिंदूवादी) से खतरा है। जो हिंदू-हिंदू कहकर सत्ता में आए, आज वही हिंदुओं के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गए हैं।

सवाल: विपक्ष (SP, राहुल गांधी) सवाल उठाए तो एंटी-नेशनल कह दिया जाता है। आपका जवाब?

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: जब जवाब नहीं होता तो, उन्हें तीन तमगे लगा दिए जाते हैं- कांग्रेसी-सपाई, एंटी-नेशनल, देशद्रोही। जनता समझ चुकी है। सवाल पूछना राष्ट्र-धर्म-विरोधी नहीं है।

सवाल: 2027 चुनाव में इस विवाद का असर पड़ेगा?

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि राम मंदिर चोरी, गौ-माता संबंधी मुद्दे, मंदिर तोड़ने जैसे मामले अगर सनातनी हिंदू समझ गए तो इतिहास में नाम (BJP का) दर्ज हो जाएगा 2027 के बाद।

सवाल: सिर्फ आठ लोग गिरफ्तार, बड़े नाम क्यों छूट रहे हैं?

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: जब किसी पर कुल्हाड़ी से हमला होता है, तो मुकदमा कुल्हाड़ी पर नहीं, बल्कि उसे चलाने वाले व्यक्ति पर होता है। इसी उदाहरण का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि जिन आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है, वे सिर्फ एक माध्यम हैं।

उन्होंने कहा कि ये लोग केवल अपने वरिष्ठों के निर्देशों का पालन कर रहे थे और अपनी नौकरी बचाने की कोशिश कर रहे थे। उनके मुताबिक, ऐसे कर्मचारी नौकरी बचाने के लिए जो आदेश मिलता है, उसका पालन करते हैं। इसलिए उनकी नजर में इन लोगों को दोषी नहीं माना जाना चाहिए।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि असली जिम्मेदारी उस व्यक्ति की है, जिसने इनसे यह काम करवाया। उनका कहना था कि जांच का फोकस उसी तक पहुंचना चाहिए और उसी के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

सवाल: UP में राम राज्य के बीच क्या अब रामजी और उनके भक्तों को इंसाफ मिलेगा?

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: मौजूदा व्यवस्था को राम राज्य कहना उचित नहीं है। उनके अनुसार, यह केवल नाम का राम राज्य है, जबकि वास्तविक स्थिति रावण राज्य जैसी दिखाई देती है।

उन्होंने कहा कि राम राज्य में जनता भयमुक्त होकर अपनी बात रख सकती थी और किसी को अपनी राय व्यक्त करने से डर नहीं लगता था। लेकिन आज लोगों के बीच डर का माहौल है, इसलिए इसे राम राज्य नहीं कहा जा सकता। अपने दावे के समर्थन में उन्होंने कुछ लोगों के बयानों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि धीरेंद्र शास्त्री ने भी कहा था कि अगर उन्होंने कुछ कह दिया तो उनकी खैर नहीं होगी। इसी तरह, बृजभूषण शरण सिंह का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने भी डर की वजह से ज्यादा नहीं बोलने की बात कही थी।

नोट: ये शंकराचार्य के व्यक्तिगत विचार हैं। राम मंदिर चंदा चोरी पर जांच जारी है, अंतिम निष्कर्ष SIT और अदालत पर निर्भर।

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