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भगवान से होती थी चिढ़, हिंदू राजा के खिलाफ चलाया खूनी अभियान... नेपाल के वामपंथी PM कैसे हो गये भगवाधारी?

नेपाल में राजशाही का खात्मा करने में नेपाल के वामपंथी PM प्रचंड का बहुत बड़ा योगदान रहा है और उनपर नेपाल में कई मंदिरों को तोड़ने के भी आरोप लगे।

Nepal PM Prachanda Mahakal Temple

Nepal PM Prachanda Mahakal Temple Worship: पुष्प कमल दहल 'प्रचंड', नेपाल के वो वामपंथ नेता, जिन्होंने हिन्दू राजा के खिलाफ खूनी अभियान चलाया, जिसके लिए कार्ल मार्क्स के सिद्धांत से बढ़कर कुछ नहीं था और जिसने भगवान के नाम पर प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने से इनकार कर दिया, उस नेता की तस्वीर भगवा कपड़ों में लिपटी नजर आती है, तो हर कोई चौंक जाता है।

नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' इन दिनों भारत के दौरे पर हैं, जहां उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से हुई है, उन्होंने उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर में भगवान शिव की भगवा वस्त्रों में लिपटकर पूजा अर्चना की, माथे पर त्रिपुंड चंदन का लेप लगाया और हाथ उठाकर हर हर महादेव का मंत्रोच्चार किया।

पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' की इन तस्वीरों ने भारत में लोगों को चौंकाया, तो नेपाल में विवाद को खड़ा कर दिया, कि वामपंथी कि किताबों को रटने वाले दहल, क्या अब भगवाधारी हो चुके हैं?

सवाल कई और उठे हैं, जैसे पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' ने चीन का न्योता ठुकराकर अपनी पहली विदेशी यात्रा के लिए करीब 5 महीनों तक इंतजार किया और फिर भारत पहुंचे (कई वजहों से उनकी यात्रा का कार्यक्रम नहीं बन रहा था)।

इतना ही नहीं, जब पुष्प कमल दहल दिल्ली स्थिति नेपाल दूतावास में पहुंचे, तो उन्होंने नेपाल की पारंपरिक पोषाक पहनी थी और ये हैरान करने वाला तीसरा वाकय है, क्योंकि इससे पहले उन्होंने कभी भी नेपाल की पारंपरिक पोषाक को हाथ तक नहीं लगाया।

दहल और उनकी नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी-केंद्र), ने जानबूझकर कट्टरपंथी और क्रांतिकारी छवि को बनाए रखने के लिए पारंपरिक पोशाक पहनने से परहेज किया, लेकिन उनकी भारत यात्रा के दौरान उस छवि की बलि दे दी गई है।

तो क्या नेपाल के वामपंथी प्रधानमंत्री आखिरकार फिर से 'हिन्दू' हो गये हैं?

Nepal PM Prachanda Mahakal Temple

अपनी भारत यात्रा के तीसरे दिन, प्रधानमंत्री दहल ने न केवल इंदौर का दौरा किया, बल्कि उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर में विधिवत पूजा अर्चना की। उन्होंने महाकाल महादेव को 108 किलोग्राम रुद्राक्ष की मनके की माला अर्पित की, और उस समय वो विशिष्ट धार्मिक पोशाक पहने हुए थे।

प्रधानमंत्री दहल, अपनी विचारधारा को लेकर "क्रांतिकारी" कहे जाते थे, जिनके आंदोलन के दौरा नेपाल में कई मंदिरों को तोड़ दिया गया, उनके प्रभाव वाले क्षेत्रों में हिन्दू अनुष्ठानों पर हमले किए गये, यहां तक जिन हिन्दुओं ने अपने परिवार के किसी मृतक का अंतिम संस्कार करने की कोशिश की, उनकी हत्या तक कर दी, और जिन्होंने अभी तक नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर सहित किसी भी मंदिर में जाने से परहेज किया है, वो महाकाल की शरण में हर हर महादेव कर रहा था।

Nepal PM Prachanda Mahakal Temple

तो फिर भगवाधारी क्यों हुए प्रधानमंत्री दहल?

राजनीतिक मामलों के कुछ जानकारों का कहना है, कि भारत में उनकी धार्मिकता को मोदी फैक्टर को संबोधित करने के लिए एक सामरिक परिवर्तन के रूप में लिया जा सकता है और ये एक ऐसा कारक है, जो उनकी राजनीतिक सफलता और अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

मोदी सरकार से नजदीकी बढ़ाने के लिए दहल ने दिल्ली दौरे से पहले हाईड्रोपावर प्रोजेक्ट के लिए भारत से करार को मंजूरी दे दी और नेपाल के विवादित नागरिकता बिल को भी मंजूरी देकर, उसपर राष्ट्रपति से दस्तखत करवाने में कामयाब रहे, ताकि मोदी सरकार को खुश किया जा सके। जबकि, पूर्व नेपाली राष्ट्रपति विद्यादेवी भंडारी ने नागरिकता बिल पर दस्तखत करने से मना कर दिया था।

नेपाल का नागरिकता विधेयक, नेपाली पुरुषों से विवाहित विदेशी महिलाओं को सभी राजनीतिक और संपत्ति अधिकारों के साथ-साथ तत्काल नेपाल की नागरिकता प्रदान करता है। जबकि, बिल नेपाली महिलाओं से शादी करने वाले विदेशी पुरुषों की नागरिकता जैसी कई कट्टरपंथी मांगों को संबोधित नहीं करता है, लिहाजा दहल ने इस बिल को आगे बढ़ाकर भारतीय प्रतिष्ठान की नजर में कुछ विश्वसनीयता हासिल की है।

इसे उनकी ओर से एक अहसास के रूप में समझा जा सकता है, कि पहले भारत की बात नहीं सुनना एक बड़ी गलती थी।

Nepal PM Prachanda Mahakal Temple

पुष्प कमल दहल जब पिछले साल भारत आए थे, उस वक्त वो प्रधानमंत्री नहीं थे और उस दौरान वो दिल्ली में बीजेपी के दफ्तर गये थे, जहां बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने उनका स्वागत किया था। प्रधानमंत्री दहल के साथ उनकी बेटी गंगा दहल भी थीं, और उसके बाद से कयास लगाए जाने लगे, कि प्रचंड का हृदय परिवर्तन हो रहा है।

और प्रधानमंत्री बनने के बाद पुष्प कमल दहल भगवाधारी हो गये हैं, जिसे नेपाल के विरोधी वामपंथी नेता उनकी अवसरवादी राजनीति के तौर पर देखते हैं। लेकिन, नेपाल में पिछले 2 सालों से फिर से देश को हिन्दू राष्ट्र बनाने की मांग तेज हो चुकी है। तो क्या पुष्प कमल दहल... नेपाल को फिर से हिन्दू राष्ट्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ेंगे, सबसे बड़ा सवाल यही है?

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