ईरान समुद्र में हजारों लीटर तेल बहाने को क्‍यों मजबूर हुआ? सैटेलाइट फोटो ने मचाया तहलका

Iran forced to spill oil into the sea : अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते तनाव के बीच ईरान अब केवल सैन्य और आर्थिक दबाव ही नहीं, बल्कि गंभीर तेल भंडारण संकट से भी जूझ रहा है। अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी के चलते फारस की खाड़ी से ईरानी तेल टैंकरों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है।

हालात ऐसे बन गए हैं कि लगातार जारी उत्पादन के बीच ईरान के पास कच्चा तेल रखने की जगह कम पड़ती दिख रही है। इसी बीच सैटेलाइट तस्वीरों में खार्ग द्वीप के आसपास समुद्र में बड़े-बड़े काले धब्बे दिखाई देने से आशंका तेज हो गई है कि अतिरिक्त तेल समुद्र में छोड़ा जा रहा है।

Iran

नाकेबंदी ने रोक दी ईरान की तेल सप्लाई

ईरान प्रतिदिन 30 लाख बैरल से ज्यादा कच्चा तेल पैदा करता है। इसका बड़ा हिस्सा खार्ग द्वीप स्थित मुख्य निर्यात टर्मिनल के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता था। लेकिन अप्रैल मध्य में अमेरिका द्वारा लागू की गई नौसैनिक नाकेबंदी के बाद ईरानी बंदरगाहों से जहाजों का निकलना बेहद मुश्किल हो गया। अमेरिकी नौसेना कई टैंकरों को रास्ते से वापस लौटा चुकी है, जिससे तेल निर्यात पर भारी असर पड़ा है।

भर गए टैंक, अब समुद्र बना 'स्टोरेज'?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सबसे पहले खार्ग द्वीप के ऑनशोर स्टोरेज टैंक पूरी तरह भर गए। इसके बाद ईरान ने पुराने तेल टैंकरों को 'फ्लोटिंग स्टोरेज' के रूप में इस्तेमाल करना शुरू किया ताकि तेल उत्पादन जारी रखा जा सके। लेकिन उत्पादन और निर्यात के बीच बढ़ते अंतर ने अब स्थिति को और गंभीर बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्टोरेज क्षमता खत्म होने पर ईरान अतिरिक्त तेल समुद्र में छोड़ने को मजबूर हो सकता है।

क्यों बंद नहीं कर सकता तेल उत्पादन?

विशेषज्ञ बताते हैं कि तेल कुओं को लंबे समय तक बंद रखना आसान नहीं होता। ऐसा करने से भूमिगत दबाव तंत्र को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है। कई बार पानी और गैस पाइपलाइनों में घुस जाते हैं, जिससे उत्पादन दोबारा शुरू करना बेहद महंगा और जटिल हो जाता है। कुछ मामलों में तेल उत्पादन पहले जैसी क्षमता तक लौट ही नहीं पाता। यही वजह है कि भारी दबाव के बावजूद ईरान उत्पादन जारी रखे हुए है।

सैटेलाइट तस्वीरों में दिखे रहस्यमयी काले धब्बे

यूरोपियन स्पेस एजेंसी के सेंटिनल सैटेलाइट डेटा में फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास समुद्र की सतह पर कई बड़े 'ऑयल स्लिक्स' दिखाई दिए हैं। इनमें सबसे बड़ा धब्बा खार्ग द्वीप के पश्चिम में करीब 120 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला बताया गया। रडार विश्लेषण में समुद्र की सतह पर असामान्य चिकनाई और शांत लहरें देखी गईं, जो तेल रिसाव के संकेत माने जाते हैं। हालांकि विशेषज्ञ यह भी कह रहे हैं कि शैवाल, तलछट या प्राकृतिक समुद्री परतें भी ऐसे दृश्य बना सकती हैं, इसलिए अंतिम पुष्टि अभी नहीं हुई है।

पर्यावरण पर मंडरा रहा बड़ा खतरा

अगर समुद्र में तेल छोड़ा जा रहा है, तो इसका असर पूरी फारस की खाड़ी की समुद्री जैव विविधता पर पड़ सकता है। यह इलाका लाखों मछुआरों, कोरल रीफ और समुद्री जीवों का प्रमुख आवास है। तेल की परतें मछलियों और अन्य जीवों के लिए जहरीली साबित हो सकती हैं, जबकि समुद्री पक्षियों और तटीय पारिस्थितिकी तंत्र को भी भारी नुकसान पहुंच सकता है। ओमान के धोफार तट पर बड़ी संख्या में मृत झींगे मिलने की घटनाओं ने भी क्षेत्र में बढ़ते समुद्री प्रदूषण को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

दुनिया की ऊर्जा सप्लाई पर असर

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में शामिल है। वैश्विक तेल और गैस सप्लाई का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। भारत समेत कई देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस मार्ग पर निर्भर हैं। नाकेबंदी और क्षेत्रीय तनाव के चलते वैश्विक तेल कीमतों में उछाल देखा गया है, जिसका असर पेट्रोल-डीजल, परिवहन और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ रहा है।

गुप्त रास्तों से जारी है तेल कारोबार

अमेरिकी दबाव के बावजूद ईरान पूरी तरह तेल निर्यात बंद नहीं कर पाया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरानी तेल अब भी समुद्र में 'शिप-टू-शिप ट्रांसफर' के जरिए गुप्त रूप से दूसरे देशों तक पहुंचाया जा रहा है। इंडोनेशिया के पास समुद्र में कई टैंकरों के बीच तेल ट्रांसफर किए जाने की खबरें सामने आई हैं, जिनका अंतिम गंतव्य चीन बताया जा रहा है। हालांकि लगातार सख्त होती नाकेबंदी के कारण ईरान की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+