1863 से क्यों तेजी से बढ़ने लगा समुद्र का जलस्तर? 2,000 वर्षों के वैज्ञानिक विश्लेषण से मिली जानकारी
वॉशिंगटन, 21 फरवरी: ग्लोबल वॉर्मिंग, जलवायु परिवर्तन इन सबको समुद्र के जलस्तर में वृद्धि का बड़ा कारण माना जाता है। क्योंकि, इनकी वजहों से ग्लेशियर पिघल रहे हैं। प्रकृति की बनी-बनाई व्यवस्था में उथल-पुथल मची हुई है। अतिवृष्टि-अनावृष्टि और चक्रवातों की संख्या साल-दर-सार बढ़ती जा रही है। अब एक ऐसी स्टडी सामने आई है, जिसमें वैज्ञानिक उस समय का पता लगाने में कामयाब हुए हैं, जब से समुद्र के जलस्तर में तेजी से इजाफा होना शुरू हुआ है। इसके आधार पर शोधकर्ता उसके कारणों तक पहुंच पाए हैं और भविष्य के लिए योजनाएं बनाते समय भी उनकी यह स्टडी कारगर साबित हो सकती है। वैज्ञानिकों की एक टीम ने इसके लिए 2,000 वर्षों के रिकॉर्ड की पड़ताल की है।

1863 से तेजी से बढ़ने लगा समुद्र का जलस्तर
समुद्र के जलस्तर में तेज वृद्धि को लेकर हाल ही में अमेरिका के वैज्ञानिकों ने गंभीर चेतावनी दिए हैं। इस बीच एक नए रिसर्च में वैज्ञानिकों ने पाया है कि आधुनिक समय में जब से समुद्र के जलस्तर में तेजी से वृद्धि शुरू हुई है, उसका इतिहास साल 1863 तक जाता है। वैज्ञानिकों की एक टीम ने पाया है कि इसका तालमेल औद्योगिक क्रांति के वक्त से है, जब औद्योगिकीकरण में काफी तेजी आई और जिसके चलते महासागर गर्म होने लगे और ग्लेशियर पिघलने शुरू हो गए।

वैश्विक औद्योगिक क्रांति से जुड़ा है समुद्र के जलस्तर बढ़ने का नाता
समुद्र के जलस्तर में इजाफा जलवायु परिवर्तन का एक बहुत ही महत्वपूर्ण संकेत है। समुद्र के जलस्तर में इजाफे में तेजी का समय पता चलने का मतलब है कि वैज्ञानिक जलवायु परिवर्तन के शुरू होने की अवधि का आसानी से व्याख्या कर सकते हैं। इस शोध के लिए वैज्ञानिकों ने समुद्र के जलस्तर में पिछले 2,000 साल के वैश्विक डेटाबेस के रिकॉर्ड का विश्लेषण किया है। उन्होंने पाया है कि 1863 में वैश्विक औद्योगिक क्रांति की शुरुआत के साथ ही आधुनिक युग में समुद्र का जलस्तर बढ़ना शुरू हो गया था।

भविष्य में योजना निर्माताओं के काम आ सकती है स्टडी
वैज्ञानिकों ने ज्यादा गहराई में जाने पर पाया कि मध्य-अटलांटिक क्षेत्र में अमेरिका के अलग-अलग स्थानों पर इसकी शुरुआत 19वीं सदी के मध्य से लेकर आखिर तक हुई, जबकि कनाडा और यूरोप में यह 20वीं सदी के मध्य में उभरने लगी। यह स्टडी नेचर कम्युनिकेशन जर्नल में विस्तार से उपलब्ध है, जो योजना निर्माताओं को भविष्य में समुद्र के जलस्तर में वृद्धि के हिसाब से तैयारियों में मदद कर सकता है।

1940 से 2000 तक समुद्र के जलस्तर में ज्यादा तेज वृद्धि
इस स्टडी की लीड ऑथर और अमेरिका के न्यू ब्रंसविक स्थित रटगर्स यूनिवर्सिटी में अर्थ एंड प्लैनेटरी साइंसेज विभाग में पोस्टडॉक्टोरल एसोसिएट जेनिफर एस वॉकर ने कहा है, 'हम एक तरह से निश्चित हो सकते हैं कि 1940 से 2000 तक समुद्र के जलस्तर में वृद्धि की वैश्विक दर, पिछले 2,000 वर्षों में बाकी 60-वर्षों के अंतराल की तुलना में ज्यादा तेज थी।' उन्होंने कहा है, 'अलग-अलग जगहों पर समुद्र के जलस्तर में बदलाव की पूरी जानकारी होना, भविष्य में समुद्र जलस्तर में इजाफे के सिलसिले में क्षेत्रीय और स्थानीय योजना तैयार करने के लिए जरूरी है।'

कैसे हुआ समुद्री जलस्तर में उतार-चढ़ाव ?
मौजूदा विश्लेष के मुताबिक 1,700 वर्षों तक वैश्विक समुद्री जलस्तर 0.3 मिलीमीटर से 0.2 मिलीमीटर के बीच बढ़ता-घटता रहा। औद्योगिक क्रांति और जीवाश्म ईंधन के व्यापक इस्तेमाल शुरू होने से ठीक पहले यानि 1700 से 1760 के बीच में इसमें एक वर्ष में 0.1 मिलीमीटर की गिरावट दर्ज की गई। लेकिन, 1940 से साल 2000 के बीच वैश्विक समुद्र जलस्तर में एक साल में इजाफे की दर 1.4 मिलीमीटर तक पहुंच गई।

भविष्य में समुद्री किनारों पर होने वाले बदलाव का लग सकेगा अनुमान
लीड ऑथर ने यह भी बताया है कि रिसर्च के लिए उनकी टीम ने जो मॉडल इस्तेमाल किया है, उसका इस्तेमाल अलग-अलग समुद्री किनारों की स्थिति में हो रहे बदलाव की प्रक्रिया के लिए आगे भी किया जा सकता है। जिससे समुद्र जलस्तर बढ़ने की प्रक्रिया की आगे और भी जानकारी विस्तार से मिल सकती है। उनके मुताबिक, 'तथ्य यह कि 20वीं सदी के मध्य तक हमारे सभी अध्ययन वाली जगहों पर वृद्धि की नई दरें देखने को मिली हैं, इससे साफ है कि पिछली शताब्दी में हमारे ग्रह पर वैश्विक समुद्र-स्तर में वृद्धि का महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा है।' उनका कहना है कि जुटाए गए डेटाबेस का आगे और ज्यादा विश्लेषण करने से समुद्र के जलस्तर में हो रही वृद्धि के प्रभाव को समझने में और भी अधिक सहायता मिल सकती है। (तस्वीरें- प्रतीकात्मक)












Click it and Unblock the Notifications