Bangladesh: मोहम्मद यूनुस से ज्यादा उम्मीद क्यों बेमानी है? बांग्लादेशी हिंदुओं पर बढ़ते खतरे की वजह जानिए

Bangladeshi Hindu News: बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के अगुवा मोहम्मद यूनुस की निष्पक्षता को लेकर अभी से सवाल उठ रहे हैं। उनकी सरकार बनने के बाद जिस तरह के कुछ फैसले लिए गए हैं, वह सवालों के घेरे में हैं। साथ ही अल्पसंख्यकों खासकर हिंदुओं पर हमलों में कमी आने की जगह बढ़ोतरी की की ही रिपोर्ट मिल रही है।

बांग्लादेश के एकमात्र नोबल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस दुनिया में उस जमात का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो खुद को फ्री स्पीच का सबसे बड़ा वकील मानता है। लेकिन, जिस तरह से उनके सत्ता में आने के बांग्लादेश में मीडिया को रिपोर्टिंग को लेकर चेतावनी दी गई है, वैसी स्थिति में बेझिझक रिपोर्टिंग करने का हौसला दिखाने वाले पत्रकारों में भी भय का माहौल बन सकता है।

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शेख हसीना सरकार के कट्टर विरोधी रहे हैं मोहम्मद यूनुस
तथ्य यह है कि बांग्लादेश में शेख हसीना की अगुवाई में आवामी लीग की जो भी सरकार थी, उसे देश की जनता ने ही चुना था। मोहम्मद यूनुस उस सरकार और उसकी नेता के कट्टर विरोधियों में शामिल रहे हैं। उनका एक पुराना वीडियो वायरल है, जिसमें वह बांग्लादेश की तत्कालीन व्यवस्था को उखाड़ फेंकने वालों को वैचारिक समर्थन देने की वकालत करते नजर आ रहे हैं।

चुनी हुई सरकार विरोधी यूनुस की सोच वाला वीडियो वायरल
उस वायरल वीडियो में उनकी बातचीत कथित रूप से एक भारतीय राजनेता से हो रही है। इसमें एक जगह भारतीय नेता की ओर से कहा जा रहा है कि 'ऐसा लगता है कि युवाओं के एक वर्ग में सरकार के खिलाफ यह भावना बैठ रही है कि कुछ बहुत ही गलत हो रहा है, अमीर और गरीब के बीच अंतर बढ़ता जा रहा है।'

इसमें इस स्थिति का लाभ उठाने के लिए विपक्ष की ओर से कुछ नया करने की दलील दी जाती है, जिसपर मोहम्मद यूनुस अपनी हामी बढ़ते नजर आते हैं। इसमें कथित रूप से यूनुस के सामने बैठा वह नेता यह कहता हुआ नजर आ रहा है कि विपक्ष को लोगों की इस भावना पर काम करने की जरूरत है।

इसपर यूनुस कहते हैं, 'यही समस्या यहां (बांग्लादेश) भी है। अरबपतियों की संख्या बहुत बढ़ रही है। बांग्लादेश और भारत दोनों देशों में अरबपतियों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है.....।' वनइंडिया उस वीडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं कर पाया है, इसलिए यूनुस के जुबान से जो कुछ सामने आया है, उसे ही यहां रखने की कोशिश की गई है।

सत्ता संभालते ही घोटाले के आरोपों से पाक-साफ हो गए मोहम्मद यूनुस!
शायद इसी का परिणाम है कि यूनुस बांग्लादेश पहुंचकर शेख हसीना की जगह सत्ता संभालते हैं और शपथग्रहण के तीन दिनों के भीतर ही भ्रष्टाचार-विरोधी आयोग की ओर से दायर ग्रामीण टेलीकॉम वर्कर्स और एम्पलॉइज वेलफेयर फंड घोटाले के आरोपों से उन्हें बरी कर दिया जाता है। डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक ढाका के स्पेशल जज ने भ्रष्टाचार-विरोधी एजेंसी के केस वापस लेने के बाद उन्हें बरी किया है।

हिंदुओं पर हिंसा रोक नहीं पा रहे या रोकना नहीं चाहते मोहम्मद यूनुस- बांग्लादेशी नेता
अब बांग्लादेशी हिंदू नेताओं की ओर से भी उनके रहते अल्पसंख्यकों पर हो रहे हिंसा रुक पाने को लेकर संदेह जताया जाने लगा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बांग्लादेश माइनॉरिटी जनता पार्टी के सुकृति कुमार मंडल ने आरोप लगाया है कि मोहम्मद यूनुस के सत्ता संभालने के बाद हिंदुओं पर हमले बढ़ गए हैं।

उन्होंने कहा है कि 'मोहम्मद यूनुस के पीएम (अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार) बनने के बाद बढ़ ही गयी है हिंदुओ पर हिंसा। मोहम्मद यूनुस कट्टरपंथियों को हिंसा करने से नहीं रोक पा रहे या फिर वो रोकना नहीं चाहते हैं। कट्टरपंथी कसाई अब भी हिंदुओं की सरेआम हत्या कर रहे हैं। हम लोगों को किसी प्रकार छिपकर अपनी जान बचानी पड़ रही है। हिंदु महिलाओं के रेप हो रहे हैं, हैवान बच्चियों तक को नहीं छोड़ रहे।'

मीडिया को भी चेतावनी दे रही बांग्लादेश की अंतरिम सरकार
यही नहीं, रविवार को बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की ओर से मीडिया को चेतावनी दी गई है कि अगर उन्होंने 'झूठी और भ्रामक खबरें' प्रसारित या प्रकाशित की तो उन्हें बंद कर दिया जाएगा।

कहने के लिए तो यह चेतावनी 'गलत सूचना' फैलने से रोकने के लिए दी गयी है, लेकिन सवाल है कि अंतरिम सरकार सही में 'झूठी और भ्रामक खबरें' प्रसारित या प्रकाशित करने वालों पर कार्रवाई कर रही है या जमीनी सच्चाई दुनिया के सामने आने से रोकना चाहती है, इसका सच सामने कैसे आएगा? सवाल है कि आखिर बांग्लादेशी मीडिया ने ऐसी कौन सी खबर दी है, जो वहां की सरकार को भ्रामक लग रही है? कहीं, बांग्लादेश की नई सरकार हिंदू-विरोधी हिंसा से जुड़ी खबरों को दबाने की कोशिशों में तो नहीं जुट गई है?

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