Gaza Strip: इजिफ्ट और अरब देश गाजा के शरणार्थियों को क्यों नहीं आने दे रहे? जानिए इनसाइड स्टोरी
Israel-Hamas War: गाजा पट्टी पर नियंत्रण करने वाले हमास ने 7 अक्टूबर को दक्षिणी इजराइल पर हमला किया था और उसके बाद इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गाजा पट्टी में हमास के ठिकानों पर भीषण हमले शुरू कर दिए। इजराइल ने दक्षिणी गाजा के लोगों को अपना घर छोड़ने के लिए कहा था, जिसके बाद दक्षिणी गाजा में रहने वाले 11 लाख लोगों के सामने संकट ये है, कि आखिर वो जाएं तो जाएं कहां?
गाजा पट्टी के 11 लाख से ज्यादा लोग शरण लेने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सिर्फ 41 किलोमीटर में फैले गाजा पट्टी के उत्तरी हिस्से में, जहां पहले से ही करीब 10 लाख से ज्यादा लोग रहते हैं, उसकी क्षमता इतनी नहीं है, कि वो 11 लाख और लोगों को सहारा दे सके, लिहाजा सवाल ये उठ रहे हैं, कि पड़ोसी देश मिस्र, जॉर्डन या फिर अरब देश आखिर गाजा के शरणार्थियों को शरण क्यों नहीं दे रहे हैं?

मिस्र और जॉर्डन, ये दोनों देश, जो इज़राइल के विपरीत दिशा में हैं, और क्रमशः गाजा और कब्जे वाले वेस्ट बैंक के साथ सीमा साझा करते हैं, उन्होंने साफ शब्दों में मना कर दिया है, कि वो गाजा पट्टी के लोगों को अपने देश में आने नहीं देंगे।
जॉर्डन में पहले से ही बड़ी संख्या में फिलिस्तीनी आबादी है। मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी ने बुधवार को अपनी अब तक की सबसे सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, कि वर्तमान युद्ध का उद्देश्य सिर्फ हमास से लड़ना नहीं है, जो गाजा पट्टी पर शासन करता है, "बल्कि नागरिक निवासियों को मिस्र की ओर पलायन करने के लिए मजबूर करने का एक प्रयास भी है।" उन्होंने चेतावनी दी है, कि इससे क्षेत्र में शांति भंग हो सकती है।
वहीं, जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला द्वितीय ने एक दिन पहले इसी तरह का संदेश देते हुए कहा था, कि "जॉर्डन में कोई शरणार्थी नहीं, मिस्र में कोई शरणार्थी नहीं।" उनका इनकार इस डर पर आधारित है, कि इज़राइल फिलिस्तीनियों को उनके देशों में स्थायी रूप से निष्कासित करना चाहता है और फिलिस्तीनियों की राज्य की मांग को रद्द करना चाहता है।
अल-सिसी ने यह भी कहा, कि बड़े पैमाने पर पलायन से आतंकवादियों को मिस्र के सिनाई प्रायद्वीप में लाने का जोखिम होगा, जहां से वे इज़राइल पर हमले शुरू कर सकते हैं, जिससे दोनों देशों की 40 साल पुरानी शांति संधि खतरे में पड़ सकती है।

मिस्र और जॉर्डन के रूख की इनसाइड स्टोरी
विस्थापन, फ़िलिस्तीनी इतिहास का एक प्रमुख मुद्दा रहा है। 1948 में इजराइल के निर्माण के आसपास हुए युद्ध में, अनुमानित 700,000 फ़िलिस्तीनियों को या तो नये बने इज़राइल से निष्कासित कर दिया गया था या वो भाग गए थे। फ़िलिस्तीनी इस घटना को नकबा या फिर अरबी में "तबाही" कहते हैं।
1967 के मिडिल-ईस्ट युद्ध में, जब इज़राइल ने वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी पर कब्जा कर लिया, तो 3 लाख से ज्यादा फिलिस्तीनी भाग गए, जिनमें से ज्यादातर जॉर्डन चले गये। शरणार्थियों और उनके वंशजों की संख्या अब लगभग 60 लाख हो गई है, जिनमें से ज्यादातर सीरिया और जॉर्डन, वेस्ट बैंक, गाजा, और लेबनान में शिविरों और समुदायों में रह रहे हैं।
1948 के युद्ध में लड़ाई बंद होने के बाद, इज़राइल ने शरणार्थियों को उनके घर लौटने की इजाजत नहीं दी और उसके बाद से इज़राइल ने शांति समझौते के हिस्से के रूप में शरणार्थियों की वापसी के लिए फिलिस्तीनी मांगों को खारिज कर दिया है। इजराइल यह तर्क देता है, कि शरणार्थियों की वापसी से इजराइल के यहूदी बहुमत को खतरा होगा।
जबकि, मिस्र को डर है, कि इतिहास खुद को दोहराएगा और गाजा से बड़ी फिलिस्तीनी शरणार्थी आबादी हमेशा के लिए मिस्र में ही रह जाएगी।

वापसी की नहीं है कोई गारंटी
ऐसा इसलिए है, क्योंकि यह युद्ध कैसे समाप्त होगा, इसका कोई स्पष्ट परिदृश्य नहीं है। इज़राइल का कहना है, कि वह अपने दक्षिणी शहरों में खूनी उत्पात के लिए हमास को नष्ट करके ही दम लेगा, लेकिन इसमें इस बात का कोई संकेत नहीं दिया गया है, कि इसके बाद क्या हो सकता है और गाजा पर शासन कौन करेगा? लिहाजा यह चिंता बढ़ गई है, कि बहुत संभावना है, कि इजराइल एक बार फिर से गाजा पट्टी पर नियंत्रण हासिल कर ले, जिससे संघर्ष के और बढ़ने की आशंका बन जाएगी।
इज़रायली सेना ने कहा है, कि जिन फ़िलिस्तीनियों ने उत्तरी गाज़ा से दक्षिणी हिस्से में भागने के उसके आदेश का पालन किया, उन्हें युद्ध समाप्त होने के बाद अपने घरों में वापस जाने की अनुमति दी जाएगी। लेकिन, मिस्र इससे आश्वस्त नहीं है। मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फतेह अल-सिसी ने कहा है, कि अगर इज़राइल तर्क देता है, कि उसने आतंकवादियों को पर्याप्त रूप से कुचला नहीं है, तो लड़ाई वर्षों तक चल सकती है।
उन्होंने प्रस्ताव दिया कि इज़राइल, फ़िलिस्तीनियों को अपने नेगेव रेगिस्तान में, जो गाजा पट्टी का पड़ोसी है, वहां पर तब तक रखे, जब तक वह अपने सैन्य अभियान समाप्त नहीं कर देता।
क्राइसिस ग्रुप इंटरनेशनल के उत्तरी अफ्रीका परियोजना निदेशक रिकार्डो फैबियानी ने कहा, कि "गाजा में अपने इरादों और आबादी की निकासी के बारे में इज़राइल की स्पष्टता की कमी अपने आप में समस्याग्रस्त है।" उन्होंने कहा, कि "यह भ्रम पड़ोस में डर को बढ़ावा देता है।"
इसके अलावा, मिस्र ने इज़राइल पर गाजा में मानवीय सहायता की अनुमति देने के लिए दबाव डाला है, और इज़राइल ने बुधवार को कहा कि वह ऐसा करेगा, हालांकि उसने यह नहीं बताया कि कब? संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, मिस्र, जो बढ़ते आर्थिक संकट से जूझ रहा है, वो पहले से ही लगभग 90 लाख शरणार्थियों और प्रवासियों की मेजबानी कर रहा है, जिनमें लगभग 300,000 सूडानी भी शामिल हैं, जो इस वर्ष अपने देश के युद्ध से भागकर आए थे।
लेकिन, अरब देशों और कई फिलिस्तीनियों को यह भी शक है, कि इज़राइल इस मौके का इस्तेमाल गाजा, वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम में फिलिस्तीनी राज्य की मांग को हमेशा के लिए खत्म कर सकता है। अल-सिसी ने बुधवार को चेतावनी दोहराई, कि गाजा से पलायन का उद्देश्य "फिलिस्तीनी कारण को खत्म करना ... हमारे क्षेत्र का सबसे महत्वपूर्ण कारण" था।
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