अमेरिका में 17 लाख प्रवासियों की नौकरियां गईं, भारतीयों पर सबसे ज्यादा असर क्यों?
US immigrant job loss 2025: अमेरिका में नौकरी करना न केवल एक करियर का सपना है, बल्कि लाखों युवाओं के लिए उम्मीदों और तरक्की की उड़ान भी है। हर महीने की तनख्वाह डॉलर में मिले और ज़िन्दगी में स्टेटस का नया मुकाम हासिल हो। ऐसा ख्वाब लेकर हर साल लाखों लोग अमेरिका की ओर रुख करते हैं। लेकिन हाल ही में जो आंकड़े सामने आए हैं, उन्होंने उस 'अमेरिकन ड्रीम' को करारा झटका दिया है, जिसकी चमक लाखों युवाओं को आकर्षित करती रही है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 17 लाख प्रवासी कामगारों की नौकरियां छिन गई हैं। इनमें बड़ी तादाद भारतीयों की भी है। अब सवाल उठता है कि आखिर ये नौकरियां क्यों खत्म हो गईं? क्या इसका असर भारत पर भी पड़ेगा? और क्या अब अमेरिका में नौकरी का सपना देखना खतरे से खाली नहीं? आइए समझते हैं इस झटके की पूरी कहानी।

नेशनल फाउंडेशन फॉर अमेरिकन पॉलिसी ने रोजगार के ताजा आंकड़े पेश किए हैं, जो प्रवासियों के लिए चिंताजनक हैं, क्योंकि रिपोर्ट में बताया गया है कि नेशनल फाउंडेशन फॉर अमेरिकन पॉलिसी की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी से लेकर अब तक करीब 17 लाख प्रवासी कर्मचारियों को पे रोल से हटा दिया गया है, यानी उन्होंने अपनी नौकरियां गंवा दी हैं।
दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार कुछ विश्लेषकों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रम्प के राष्ट्रपति बनने के बाद सख्त वीजा और आव्रजन नीतियों के चलते अब तक करीब 12 लाख प्रवासी नौकरियों से बाहर हो चुके हैं। अमेरिका में घटती नौकरियों के संकट का सबसे ज्यादा भारत पर पड़ रहा है, क्योंकि अमेरिका में भारतीय डॉक्टर, आईटी पेशेवर और इंजीनियरों की संख्या सबसे अधिक है।
नेशनल फाउंडेशन फॉर अमेरिकन पॉलिसी की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी अर्थव्यवस्था में विदेशी मूल के कामगारों की कुल संख्या 7 लाख 35 हजार घटी। मई-जून के संशोधित आंकड़ों के मुताबिक, 2.58 लाख नौकरियां खत्म हुईं, जिससे प्रवासियों में असुरक्षा और बढ़ गई है। बेरोजगारी की दर 4.2 प्रतिशत तक आ गई। वहीं, पूरे जुलाई माह में 73 हजार नई नौकरियां मिली हैं।
अमेरिकी श्रमशक्ति में प्रवासियों की स्थिति
usafacts.org की अगस्त 2024 की एक रिपोर्ट के अनुसार 32.2 मिलियन (3.22 करोड़) प्रवासी अमेरिका की वर्कफोर्स का हिस्सा हैं। यानी अमेरिका की कुल श्रमशक्ति का 19% से अधिक अब विदेश में जन्मे लोगों के पास है। 30.9 मिलियन प्रवासी जून 2024 तक नौकरी में सक्रिय थे। बाकी लोग रोजगार की तलाश में थे। प्रवासियों का श्रम भागीदारी दर (Labor Participation Rate) अब 67% तक पहुंच चुकी है। यह कोविड से पहले के स्तर (2019) से भी ऊपर है।
अमेरिका में भारतीयों की ताकत: 52 लाख से ज्यादा
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में रहने वाला भारतीय मूल का समुदाय अब 52 लाख (5.2 मिलियन) से अधिक हो चुका है। साल 2000 में यह संख्या 18 लाख थी, यानी बीते दो दशकों में तीन गुना से अधिक बढ़ोतरी हुई है। यह समुदाय अब अमेरिका में एशियाई मूल के लोगों में दूसरा सबसे बड़ा समूह बन गया है। भारतीय-अमेरिकी अब अमेरिका की एशियाई आबादी का करीब 21% हिस्सा हैं। यह तेजी से बढ़ोतरी प्रवासी पेशेवरों और छात्रों की लगातार आमद का नतीजा है। अंग्रेजी दक्षता के मामले में भारतीय अमेरिकी अन्य एशियाई समुदायों की तुलना में सबसे आगे हैं।
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