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Ebrahim Raisi: पैगंबर के वंशज या लोगों को सूली पर टांगने वाला शैतान.. ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी कौन थे?

Iran's President Ebrahim Raisi dies: ईरान में यह खबर आने के बाद निराशा छा गई है, कि राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी को ले जा रहा एक हेलीकॉप्टर कोहरे वाले पहाड़ी इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हो गया और अब आधिकारिक तौर पर पुष्टि कर दी गई है, कि राष्ट्रपति और विदेश मंत्री होसैन अमीर-अब्दुल्लाहियन की मौत हो गई है।

अजरबैजान से लगती ईरान की सीमा के पास एक पहाड़ी और घने कोहरे वाले इलाके में ईरानी राष्ट्रपति का हेलीकॉप्टर क्रैश किया था और पिछले 15 घंटों से ज्यादा वक्त से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा था।

Ebrahim Raisi

कैसे हुआ हेलीकॉप्टर हादसे का शिकार?

रविवार को, ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी और उनके विदेश मंत्री हुसैन अमीर-अब्दुल्लाहियन को ले जा रहे एक हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने की खबरें सबसे पहले सोशल मीडिया पर प्रसारित हुईं और फिर स्थानीय मीडिया में ब्रेकिंग न्यूज प्रसारित होने शुरू हो गये।

ईरान की आधिकारिक आईआरएनए न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ये दुर्घटना अज़रबैजान की सीमा से लगते ईरान के जोल्फा क्षेत्र में वरज़ाघन शहर के पास दिज़मार के पहाड़ी संरक्षित वन क्षेत्र में हुई। इससे पहले, रईसी ने अपने विदेश मंत्री अमीर-अब्दुल्लाहियन के साथ दोनों देशों की सीमा पर अजरबैजान के अपने समकक्ष इल्हाम अलीयेव के साथ एक बांध परियोजना का उद्घाटन किया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, डिज़मार क्षेत्र में अचानक मौसन काफी खराब हो गया, जिसके कारण यह दुर्घटना हुई। ईरान के आंतरिक मंत्री अहमद वाहिदी ने बाद में इसे "खराब मौसम की स्थिति के कारण हार्ड लैंडिंग" बताया। आपको बता दें, कि "हार्ड लैंडिंग" तब होती है, जब कोई विमान मौसम, पायलट की गलती या तकनीकी समस्याओं की वजह से जमीन पर झटके साथ उतरता है। वहीं, रईसी के काफिले में दो हेलीकॉप्टर और थे, जो सुरक्षित उत्तर-पश्चिमी शहर ताब्रीज़ में उतरे।

वहीं, हादसे के बाद मौके पर पहुंचे ईरानी अधिकारियों ने कहा है, कि "जब हम हेलीकॉप्टर के मलबे के पास पहुंचे, तो हमने देखा कि हेलीकॉप्टर पूरा का पूरा जल चुका है।" उन्होंने कहा, कि "ऐसे हादसे में किसी के बचने की संभावना काफी कम होती है। हमने देखा कि हेलीकॉप्टर का पूरा केबिन पूरी तरह से जल चुका है।"

ईरानी अधिकारियों ने यह भी कहा है, कि कुछ शव इतने जल चुके हैं, कि उनकी पहचान करना मुश्किल हो गया है और वे यह भी नहीं पहचान पाए हैं, कि राष्ट्रपति का डेडबॉडी कौन सा है।

जैसे ही हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने की खबर आई, पूरे ईरान में लोग 63 साल के राष्ट्रपति रईसी के लिए दुआ मांगते देखे गये। तेहरान की एक नागरिक ने एएफपी को बताया, कि उसे "सबसे बुरा डर है"। उन्होंने कहा, कि "यह एक अजीब एहसास है, जैसा हमने पहले हज कासिम सुलेमानी के साथ महसूस किया था।"

आपतो बता दें, कि सुलेमानी ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड के कमांडर थे, जो बगदाद में 2020 के अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे गए थे।

Ebrahim Raisi

ईरान की सत्ता अब कौन संभालेगा?

ईरान के संविधान के अनुच्छेद 131 के मुताबिक, यदि किसी राष्ट्रपति की कार्यालय में मृत्यु हो जाती है, तो पहला उपराष्ट्रपति सत्ता संभालता है। लिहाजा, रईसी की मौत के बाद देश के प्रथम उपराष्ट्रपति 69 साल के मोहम्मद मोखबर के राष्ट्रपति बनने की संभावना है। हालांकि, देश में नये राष्ट्रपति के चुनाव अगले 50 दिनों में करवानी होगी।

हालांकि, ईरान में अगला चुनाव भी अगले ही साल होना था, लेकिन दर्दनाक दुर्घटना के बाद अब अगले 50 दिनों में चुनाव करवाए जाने की संभावना है।

वहीं, एक्सपर्ट्स के मुताबिक, हेलीकॉप्टर हादसे की सबसे बड़ी वजह उनका मेंटिनेंस नहीं होना है। ईरान पर इतने अमेरिका और पश्चिमी देशों के प्रतिबंध हैं, कि वो अपने हेलीकॉप्टर्स की मेंटिनेंस नहीं कर पा रहा है। हेलीकॉप्टर्स के पार्ट्स भी उसके लिए खरीदना मुश्किल है, जिसकी वजह से ईरानी सेना में शामिल ज्यादातर हेलीकॉप्टर 1979 में हुए इस्लामिक क्रांति से पहले के हैं, जिनसे अभी तक काम लिया जा रहा है।

क्या पैगंबर का वंशज थे इब्राहिम रईसी?

इब्राहिम रईसी, अपने किसी महान करिश्मे के लिए प्रसिद्ध नहीं है, बल्कि वो न्यायपालिका के प्रमुख के तौर पर, भ्रष्ट अधिकारियों और प्रदर्शनकारियों को सूली पर चढ़ाने के लिए कुख्यात रहे हैं। कई ईरानी मीडिया आउटलेट उन्हें सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के संभावित उत्तराधिकारी के रूप में भी देखते थे।

इब्राहिम रायसी, जिनकी काली पगड़ी को इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद के सीधे वंशज होने का प्रतीक माना जाता है, उन्हें "होजातोलेस्लैम" की उपाधि दी गई थी, जिसका मतलब होता है, "इस्लाम का प्रमाण"।

शिया लिपिक अनुक्रम में रईसी, अयातुल्ला से एक रैंक नीचे थे। 2015 के अमेरिका से परमाणु समझौते के बाद तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उदारवादी रूहानी खेमे के बीच किए गये समझौते की उन्होंने जमकर आलोचना की थी। हालांकि, रईसी सुधारवादी कार्यक्रमों में भी यकीन रखने वाले नेता माने जाते थे, खासकर उन समझौतों में, जिससे ईरान की खराब हो चुकी आर्थित व्यवस्था को फायदा हो।

इस्लामिक क्रांति से मौत बांटने वाला शख्स तक का सफर

1960 में उत्तरपूर्वी ईरान के पवित्र शहर मशहद में इब्राहिम रईसी का जन्म हुआ था और इसी शहर में वो पले बढ़े। सिर्फ 20 साल की उम्र में उन्होंने ईरान की इस्लामिक क्रांति में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और 1979 की इस्लामिक क्रांति में उन्होंने अमेरिका समर्थित राजशाही को गिरा दिया और फिर रईसी को प्रॉसिक्यूटर जनरल नामित किया गया था।

लेकिन रईसी पर इस दौरान ईरान में बड़े पैमानों पर विरोधी नेताओं की हत्या करवाने का आरोप लगा था। 1988 में में जब वो तेहरान में रिवॉल्यूशनरी कोर्ट के डिप्टी प्रॉसीक्यूटर थे, उस वक्त उन्होंने बड़ी संख्या में वामपंथी और मार्क्सिस्ट नेताओं को मरवा दिया।

हालांकि, 2018 में जब रईसी से विपक्षी नेताओं को फांसी की सजा देने में उनके योगदान के बारे में पूछा गया था, तो उन्होंने किसी भी तरह की भूमिका होने से इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा था, कि उन्हें इस्लामिक रिपब्लिक के संस्थापक अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी से फाइल मिला था, जिसके तहत शुद्धिकरण की प्रक्रिया की गई थी। लेकिन, उन्हीं आरोपों को लेकर 2019 में अमेरिका ने रईसी और कुछ दूसरे नेताओं पर प्रतिबंध लगा दिया था। अमेरिका ने रईसी पर मानवाधिकर उल्लंघन का भी आरोप लगाया था।

मदरसे से राष्ट्रपति पद तक का सफर

इब्राहिम रईसी के पास दशकों का न्यायिक अनुभव है। उन्होंने 1989 से 1994 तक तेहरान के प्रॉसीक्यूटर जनरल के तौर पर काम किया और फिर 2004 से 2014 तक उन्होंने ज्यूडिशियल अथॉरिटी के लिए डिप्टी चीफ के पद पर काम किया।

और फिर 2014 में वो ईरान नेशनल प्रॉसीक्यूटर जनरल बन गये। उन्होंने खामेनेई शासन के तहत धर्मशास्त्र और इस्लामी न्यायशास्त्र की पढ़ाई की है। उनकी आधिकारिक जीवनी के मुताबिक, 2018 से वो मशहद में एक शिया मदरसा में पढ़ा भी रहे थे। 2018 में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने रईसी को सुप्रीम कोर्ट का हेड नियुक्त कर दिया था। इसके साथ ही रईसी उस कमेटी का भी सदस्य रहे, जो ईरान का सर्वोच्च नेता का चुनाव करता है।

रईसी ने तेहरान के शाहिद-बेहेश्ती विश्वविद्यालय में साइंस लेक्चरर जमीलेह अलमोलहोदा से शादी की थी। और उनकी दो बेटियां हैं।

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