WHO नई टीम के साथ फिर शुरू करेगा कोरोना वायरस उत्पत्ति की जांच, क्या चीन से मिलेगी इजाजत?

WHO ने पुरानी जांच टीम को भंग कर दिया है। लेकिन, सवाल उठ रहे हैं कि क्या चीन फिर से वैज्ञानिकों की टीम को वुहान जाकर जांच करने की इजाजत देगा?

वॉशिंगटन, सितंबर 28: विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) एक नई जांच टीम के साथ कोविड-19 की उत्पत्ति की जांच फिर से शुरू करने के लिए तैयार है। अमेरिकी मीडिया के मुताबिक, डब्ल्यूएचओ ने कोरोना वायरस की उत्पत्ति की जांच के लिए नई टीम बनाया है, जिसमें करीब 20 वैज्ञानिक शामिल हैं। लेकिन, सवाल ये है कि क्या डब्ल्यूएचओ की इस नई टीम को चीन में जाने की इजाजत मिलेगी?

डब्ल्यूएचओ फिर से करेगा जांच

डब्ल्यूएचओ फिर से करेगा जांच

रिपोर्ट के मुताबिक, डब्ल्यूएचओ की नई टीम में करीब 20 वैज्ञानिक शामिल हैं। डब्ल्यूएचओ की टीम में प्रयोगशाला सुरक्षा और जैव सुरक्षा के विशेषज्ञ, आनुवंशिकीविद् और पशु-रोग विशेषज्ञ शामिल हैं, जो इस बात से वाकिफ हैं कि वायरस प्रकृति से कैसे फैलते हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने बताया कि वे चीन और अन्य जगहों पर नए सबूतों की तलाश करेंगे। इसी साल मार्च में डब्ल्यूएचओ-चीन की संयुक्त टीम ने कोरोना वायरस की उत्पत्ति की जांच की थी, जांच के लिए टीम ने चीन के वुहान शहर का भी दौरा किया था, जहां पहली बार कोरोना वायरस के फैलने की खबर आई थी, लेकिन जांच के बाद एक तरह से डब्ल्यूएचओ की टीम ने चीन को पाक साफ करार दे दिया था।

डब्ल्यूएचओ की जांच पर सवाल

डब्ल्यूएचओ की जांच पर सवाल

मार्च में जांच करने के बाद डब्ल्यूएचओ की जांच टीम ने चीन में ही एक प्रेस कॉन्फ्रेंस किया था, जिसमें डब्ल्यूएचओ की टीम की तरफ से कहा गया था कि 'इस बात के पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं कि चीन के वुहान शहर में स्थिति प्रयोगशाला से कोरोना वायरस की उत्पत्ति हो सकती है'। डब्ल्यूएचओ की टीम की इस रिपोर्ट पर दुनिया के कई बड़े वैज्ञानिकों ने सवाल उठाए थे। जिसके बाद जुलाई में डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अदनोम घेब्रेयसस ने अपनी रिपोर्ट को जांच रिपोर्ट के 'कमतर' कहा था और वुहान में अध्ययन के दूसरे चरण की जांच का प्रस्ताव रखा था, जिसमें वुहान शहर में प्रयोगशालाओं और बाजारों का ऑडिट शामिल है। लेकिन, चीन की तरफ से डब्ल्यूएचओ के इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया था।

चीन पर सहयोग नहीं करने का आरोप

चीन पर सहयोग नहीं करने का आरोप

डब्ल्यूएचओ के प्रमुख घेब्रेयसस के अनुसार, महामारी के स्रोत की जांच करने के लिए चीन की यात्रा करने वाली अंतरराष्ट्रीय टीम के लिए कच्चे डेटा तक पहुंच प्राप्त करना एक चुनौती थी। वैश्विक स्वास्थ्य निकाय के वैज्ञानिकों के अनुसार, धीरे धीरे वक्त वो वक्त बीत रहा है, जिसमें ये वुहान लैब की जांच की जा सके। वैज्ञानिकों ने कहा था कि वक्त बीतने के बाद सबूत खोजना नामुमकिन हो जाएगा। वैज्ञानिकों ने कहा है कि, शुरूआती खून के नमूमों को फेंका जा रहा है, उन्हें बर्बाद किया जा रहा है और कोविड -19 पीड़ितों में एंटीबॉडी भी धीरे धीरे खत्म हो रहे हैं, लिहाजा अगर और देर की गई तो फिर सच निकाल पाना नामुमकिन हो जाएगा।

चीन ने जांच रिपोर्ट को किया खारिज

चीन ने जांच रिपोर्ट को किया खारिज

हालांकि, चीन ने डब्ल्यूएचओ पर "अहंकार" और "सामान्य ज्ञान का अनादर" का आरोप लगाते हुए जांच को खारिज कर दिया है। चीनी वैज्ञानिकों ने डब्ल्यूएचओ को मैरीलैंड के फोर्ट डेट्रिक में यूएस आर्मी मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ इंफेक्शियस डिजीज (USAMRIID) सहित अन्य देशों में कोविड -19 की उत्पत्ति के लिए शिकार का विस्तार करने के लिए भी कहा है। नतीजतन, इस सप्ताह के अंत तक चुनी जाने वाली नई टीम को चीन से कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ सकता है। डब्लूएसजे की रिपोर्ट में कहा गया है कि डब्ल्यूएचओ की मूल टीम को भंग कर दिया गया है। चीनी सरकार ने यह स्पष्ट करने से इनकार कर दिया है कि क्या वह देश में एक नई टीम को जाने अनुमति देगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीनी विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि चीन ने पिछली जांच में "पूरा सहयोग" किया है।

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