Who Is Saeed Jalili: Ali Larijani के बाद सईद जलीली होंगे ईरान आर्मी के चीफ? क्यों कहते हैं 'जिंदा शहीद’?

Who Is Saeed Jalili: लंबे समय से Israel और United States लगातार ईरानी नेतृत्व को निशाना बना कर एक-एक कर टॉप लीडरशिप को खत्म करते जा रहे हैं। हाल ही में, ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (Supreme Security Council) के सचिव Ali Larijani इजरायली हवाई हमलों में मारे गए। अब पूरी दुनिया की नजर Saeed Jalili पर है, जिन्हें उनका संभावित उत्तराधिकारी माना जा रहा है। आखिर कौन हैं सईज जलीली है क्या है इनका बैकग्राउंड, जानेंगे।

सईद जलीली का पहला बयान और सख्त रुख

60 साल जलीली ने पूर्व राष्ट्रपति Mahmoud Ahmadinejad के कार्यकाल में सरकार में काम किया है और उन्हें कट्टरपंथी नेता माना जाता है। लारीजानी और बसीज कमांडर Gholamreza Soleimani की मौत पर शोक जताते हुए जलीली ने कहा कि "ये कदम दुश्मन को उसके दलदल से निकालने में नाकाम रहेंगे और उसकी हार और अपमान को और तेज करेंगे।"

Who Is Saeed Jalili

नए उत्तराधिकारी का फैसला कैसे होगा?

ईरानी कानून के मुताबिक, मौजूदा राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian लारीजानी के उत्तराधिकारी का नाम तय करेंगे। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि सईद जलीली कौन हैं और उनका बैकग्राउंड क्या है।

सईद जलीली की शुरुआती जिंदगी और शिक्षा

रिपोर्ट्स के अनुसार, जलीली का जन्म 1965 में ईरान के मशहद शहर में हुआ था। उनके पिता कुर्द थे और स्कूल प्रिंसिपल थे, जबकि उनकी मां अजरबैजानी थीं और अरदबील क्षेत्र से थीं। मिडिल क्लास फैमिली में पले-बढ़े जलीली ने Imam Sadiq University से पॉलिटिकल साइंस में पीएचडी की और इस्लामिक राजनीतिक विचारधारा में विशेषज्ञता हासिल की। बाद में उन्होंने यहीं पढ़ाया भी।

ईरान-इराक युद्ध में हिस्सा और 'जीवित शहीद' की पहचान

जलीली ने Iran-Iraq War में सक्रिय भूमिका निभाई। ऑपरेशन करबला-5 के दौरान वह गंभीर रूप से घायल हुए और उनका एक पैर काटना पड़ा। इसी वजह से उन्हें "जीवित शहीद" कहा जाता है, जो उनकी छवि को और मजबूत बनाता है।

विदेश मंत्रालय से लेकर खामेनेई के दफ्तर तक का सफर

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जलीली 1989 में विदेश मंत्रालय में शामिल हुए। 1996 तक वह निरीक्षण विभाग के प्रमुख रहे और बाद में अमेरिकी मामलों के वरिष्ठ अधिकारी बने। 2001 से 2005 तक उन्होंने ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei के दफ्तर में भी काम किया।

न्यूक्लियर वार्ता और राष्ट्रीय सुरक्षा में बड़ी भूमिका

2007 में जलीली को सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद का सचिव बनाया गया। उन्होंने पश्चिमी देशों के साथ ईरान की न्यूक्लियर वार्ताओं का नेतृत्व किया। जुलाई 2008 में उन्हें इस परिषद में खामेनेई का प्रतिनिधि भी बनाया गया। 2007 से 2013 तक उन्होंने न्यूक्लियर टॉक ग्रुप की कमान संभाली।

बातचीत का तरीका और न्यूक्लियर डील का विरोध

जलीली की बातचीत शैली को काफी सख्त और अस्पष्ट माना जाता है। उन्होंने Iran Nuclear Deal 2015 का विरोध किया था, जो Hassan Rouhani के नेतृत्व में हुआ था। जलीली का कहना था कि इस समझौते में ईरान ने बहुत कुछ खो दिया और उन्होंने इसके खिलाफ प्रयासों को "समानांतर सरकार" जैसा बताया।

राजनीति में उतार-चढ़ाव और चुनावी हार

2013 में जब हसन रूहानी राष्ट्रपति बने, तो जलीली को उनके पद से हटा दिया गया और उनकी जगह Ali Shamkhan को नियुक्त किया गया, जिनकी हालिया हमलों में मौत हो चुकी है। दिलचस्प बात यह है कि उसी चुनाव में जलीली तीसरे स्थान पर रहे थे।

2021 और 2024 चुनावों में जलीली की भूमिका

2021 में जलीली ने चुनाव लड़ा, लेकिन बाद में हटकर Ebrahim Raisi को समर्थन दिया। 2024 में रईसी की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत के बाद उन्होंने फिर चुनाव लड़ा, लेकिन Masoud Pezeshkian से हार गए। पेज़ेश्कियन को 16.38 मिलियन वोट मिले, जबकि जलीली को 13.53 मिलियन वोट मिले।

एक्सपीडिएंसी काउंसिल में पद

इस समय जलीली ईरान की Expediency Discernment Council में काम कर रहे हैं, जो देश के अंदरूनी विवादों को सुलझाने और शासन के हितों की रक्षा करती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, जलीली कट्टरपंथी राजनीतिक समूह Jebhe-ye Paydari के प्रमुख नेताओं में से हैं। उन्हें एक बेहद सख्त और रूढ़िवादी नेता के रूप में देखा जाता है।

क्यों हो सकते हैं अगला चेहरा?

विश्लेषक Danny Citrinowicz के अनुसार, जलीली का अनुभव और खामेनेई के साथ उनका सीधा जुड़ाव उन्हें इस पद के लिए मजबूत दावेदार बनाता है। उन्हें रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का भी पूरा समर्थन मिल सकता है।

क्या जलीली की नियुक्ति और खतरा बढ़ाएगी?

सिट्रिनोवित्ज़ का मानना है कि जलीली बहुत कट्टर और चरमपंथी विचार रखते हैं। ऐसे में उनकी नियुक्ति पश्चिमी देशों के साथ किसी भी समझौते की संभावनाओं को कम कर सकती है। उनका कहना है कि पहले लारीजानी जैसे नेताओं के साथ बातचीत की गुंजाइश थी, लेकिन जलीली के साथ यह मुश्किल हो सकता है।

खतरनाक नेता और मजबूत वैचारिक समर्थन

विश्लेषकों ने जलीली को "खतरनाक" बताते हुए कहा कि 13 मिलियन वोट मिलना यह दिखाता है कि ईरान में एक बड़ा वर्ग अब भी कट्टर विचारधारा का समर्थन करता है। यह भविष्य में और सख्त नीतियों का संकेत हो सकता है।

ईरान में उनकी छवि और भविष्य की दिशा

ईरानी मामलों के जानकार Arash Azizi के मुताबिक, जलीली को ईरान के सबसे ज्यादा पश्चिम-विरोधी नेताओं में गिना जाता है। हालांकि, कुछ लोग उनके अनुभव के कारण उन्हें लारीजानी का सही उत्तराधिकारी भी मानते हैं।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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