कौन हैं Nick Stewart? जिन्हें ट्रंप ने ईरान के साथ आर-पार की रणनीति बनाने के लिए अपनी टीम में किया शामिल

Nick Stewart: अमेरिका और ईरान के बीच दशकों से चले आ रहे कूटनीतिक गतिरोध में एक नया और प्रभावशाली चेहरा सामने आया है- निक स्टीवर्ट। व्हाइट हाउस ने निक स्टीवर्ट (Nick Stewart) को उस रणनीतिक टीम का हिस्सा बनाया है, जो ईरान के साथ परमाणु और क्षेत्रीय समझौतों की रूपरेखा तैयार कर रही है।

यह नियुक्ति सामान्य प्रशासनिक फेरबदल नहीं है, बल्कि इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के मैक्सिमम प्रेशर (अत्यधिक दबाव) वाले रुख को और कड़ा करने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के नेतृत्व वाली इस टीम में स्टीवर्ट की भूमिका नीतिगत फैसलों को धार देने की होगी। वैश्विक विशेषज्ञों का मानना है कि स्टीवर्ट की मौजूदगी से वाशिंगटन अब ईरान के साथ टेबल पर "सॉफ्ट डिप्लोमेसी" के बजाय "सख्त शर्तों" के साथ बातचीत को आगे बढ़ाएगा।

Nick Stewart

कौन हैं निक स्टीवर्ट?

निक स्टीवर्ट अमेरिका के जाने-माने विदेश नीति विशेषज्ञ हैं, जिनका करियर ईरान केंद्रित रणनीतियों पर टिका रहा है।

  • पूर्व अनुभव: वह ट्रंप के पिछले कार्यकाल में स्टेट डिपार्टमेंट (विदेश विभाग) में महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं।
  • लॉबिंग और कांग्रेस: स्टीवर्ट ने अमेरिकी कांग्रेस के साथ मिलकर काम किया है और हाल के वर्षों में एक प्रभावशाली लॉबिस्ट के रूप में अपनी पहचान बनाई है।
  • विचारधारा: उन्हें ईरान के प्रति बेहद कड़ा रुख रखने वाला माना जाता है। वह पहले ऐसे संगठनों से जुड़े रहे हैं जो ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंधों और सैन्य दबाव की वकालत करते रहे हैं।

जारेड कुशनर की भूमिका और टीम में एंट्री

रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्टीवर्ट की इस महत्वपूर्ण टीम में नियुक्ति के पीछे डोनाल्ड ट्रंप के दामाद और पूर्व सलाहकार जारेड कुशनर की बड़ी भूमिका रही है। कुशनर के साथ उनके पुराने कामकाजी संबंधों और ईरान मामलों पर उनकी गहरी पकड़ को देखते हुए उन्हें टीम में शामिल किया गया है। व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि स्टीवर्ट का रोल मुख्य रूप से पॉलिसी सपोर्ट का होगा, जो बातचीत के दौरान रणनीति को मजबूती प्रदान करेंगे।

ईरान का 14 सूत्रीय प्रस्ताव, 30 दिन की डेडलाइन

एक तरफ अमेरिका अपनी टीम मजबूत कर रहा है, वहीं ईरान ने भी अपनी चाल चली है। ईरान ने 14 बिंदुओं वाला एक नया प्रस्ताव अमेरिका को भेजा है, जिसकी मुख्य बातें ये हैं-

अस्थाई नहीं, स्थाई समाधान: ईरान ने लंबे सीजफायर के विचार को खारिज करते हुए 30 दिनों के भीतर सभी विवादों का स्थाई हल मांगा है।

प्रमुख मांगें: इसमें प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाने, सुरक्षा गारंटी देने और जमी हुई संपत्तियों को बहाल करने जैसी आर्थिक राहत की मांग की गई है।

ट्रंप का शक और समुद्री मोर्चे पर चुनौती

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के इस प्रस्ताव को संदेह की नजर से देखा है। उनका मानना है कि ईरान पर अभी दबाव कम करना जल्दबाजी होगी। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि बातचीत सार्थक नहीं रही, तो इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं।

इस कूटनीतिक खींचतान के बीच ईरान ने अमेरिकी प्रतिबंधों को ठेंगा दिखाते हुए तेल निर्यात जारी रखा है। हाल ही में एक विशाल ईरानी तेल टैंकर अमेरिकी निगरानी को चकमा देकर एशिया पहुंचा है। यह घटना दर्शाती है कि ईरान दबाव के बावजूद पीछे हटने को तैयार नहीं है।

क्या होगा बातचीत का भविष्य?

निक स्टीवर्ट की एंट्री ने यह साफ कर दिया है कि अमेरिका अब रियायतें देने के मूड में नहीं है। स्टीवर्ट की विशेषज्ञता और उनका पिछला रिकॉर्ड ईरान के लिए बातचीत की मेज पर मुश्किलें पैदा कर सकता है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या अमेरिका ईरान की 30 दिनों की समयसीमा को स्वीकार करता है या फिर निक स्टीवर्ट की मौजूदगी में एक और कड़े प्रतिबंधों का दौर शुरू होता है।

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