TMC में ममता बनर्जी का बड़ा एक्‍शन, सायोनी घोष, माला रॉय और सुदीप बंदोपाध्याय को पदों से हटाया

West Bengal TMC Crisis: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस पार्टी में मचे भारी घमासान के बीच ममता बनर्जी ने बड़ा एक्‍शन किया है। टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने पार्टी को बगावत से बचाने के लिए युवा मोर्चा की अध्यक्ष सायोनी घोष और महिला मोर्चा की अध्यक्ष माला रॉय के अलावा पार्टी के सबसे वरिष्ठ सांसदों में शुमार सुदीप बंदोपाध्याय को उनके पदों से हटा दिया है।

जादवपुर से सांसद सायोनी घोष की जगह युवा नेता अर्णब बनर्जी को नया युवा मोर्चा अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं, कोलकाता दक्षिण की सांसद माला रॉय की जगह नदिया जिले के कालीगंज से विधायक अलीफा अहमद को महिला तृणमूल कांग्रेस की कमान सौंपी गई है।

Mamata Banerjee

सुदीप बंदोपाध्याय को क्‍यों पद से हटाया?

वहीं पार्टी के सबसे वरिष्ठ सांसदों में शुमार सुदीप बंदोपाध्याय को कोलकाता जिला अघ्‍यक्ष पद से हटा दिया है ओर अपने करीबी कुणाल घोष को इस पद की जिम्‍मेदारी सौंपी है। ममता बनर्जी ने शख्‍स एक्‍शन शनिवार को नई दिल्ली में सुदीप बंदोपाध्याय की केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात के बाद लिया है।

TMC के बागी गुट में शुमार हैं ये तीनों नेता

पार्टी में मचे इसी घमासान और बगावत को नियंत्रित करने के लिए ममता बनर्जी ने इन दिग्गज नेताओं को संगठनात्मक पदों से हटाकर नए चेहरों को जिम्मेदारी दी है। पार्टी से हटाए गए ये तीनों नेता उस बागी गुट में शामिल हैं, जो लोकसभा में खुद को 'असली टीएमसी' के रूप में मान्यता दिलाने की कोशिश कर रहा है। बागी गुट का दावा है कि वे सोमवार को दिल्ली में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात करेंगे। वे उन्हें एक पत्र सौंपकर पार्टी से अलग मान्यता देने की मांग करेंगे।

बागी गुट में शामिल हैं कितने सांसद?

इस बीच बागी खेमे की ताकत शनिवार को तब और बढ़ गई जब वरिष्ठ लोकसभा सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय भी इस समूह में शामिल हो गए। बागी गुट के नेताओं का दावा है कि उनके साथ लोकसभा के कुल 28 सांसदों में से 20 सांसदों का समर्थन प्राप्त है। इन सभी सांसदों ने इस संबंध में तैयार किए गए पत्र पर अपने हस्ताक्षर कर दिए हैं।

क्‍या एनडीए में शामिल होगा टीएमसी का बागी गुट?

बागी खेमे की प्रमुख चेहरा और सांसद काकोली घोष दस्तिदार ने सार्वजनिक रूप से इस बात की घोषणा की है कि यदि उनके गुट को लोकसभा अध्यक्ष द्वारा अलग मान्यता मिल जाती है, तो वे संसद में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन को बिना शर्त समर्थन देंगे। इससे तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।

80 में 64 टीएमसी विधायक भी कर चुके हैं बगावत

तृणमूल कांग्रेस की विधानसभा में पार्टी के कुल 80 विधायकों में से 64 विधायकों का एक बहुत बड़ा समूह पहले ही बगावत कर पार्टी से अलग हो चुका है। इन बागी विधायकों ने कानूनन अपनी अलग राह चुन ली है विधानसभा के इस बागी गुट को विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस ने पहले ही मान्यता दे दी है। इस विद्रोही धड़े के नेता ऋतब्रत बनर्जी को विपक्षी दल का नेता भी मनोनीत किया जा चुका है।

हालांकि, ममता बनर्जी ने इस मामले को लेकर कोलकाता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखाया है। पहली सुनवाई में कोर्ट ने ममता दीदी को झटका देते हुए विधानसभा अध्‍यक्ष के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। हालांकि ये केस अभी कोर्ट में विचाराधीन है और जल्‍द ही इस केस में सुनवाई होगी।

पुरानी कमेटियां और संगठन हो चुके हैं भंग

गौरतलब है बगावत की सुगबुगाहट को भांपते हुए ममता बनर्जी ने इसी महीने पांच जून को पार्टी की सभी पुरानी कमेटियों और संगठनों को भंग कर दिया था। पार्टी को मजबूत करने के लिए एक नई समन्वय समिति बनाई गई थी, जिसमें सायनी घोष और माला रॉय को भी जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन अब बगावत की पुष्टि होते ही एक सप्ताह के भीतर उन्हें पदमुक्त कर दिया गया। इस फेरबदल के दौरान ही ममता बनर्जी ने डायमंड हार्बर के सांसद और अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को राष्ट्रीय महासचिव के रूप में बहाल रखा है ताकि पार्टी पर अपनी मजबूत पकड़ पूरी तरह से बरकरार रखी जा सके।

'ममता दीदी ने दूध-केला देकर सांप पाले थे'

टीएमसी के एक वरिष्ठ राज्यसभा सांसद ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हटाने का फैसला पहले ही लिया जा चुका था। उन्होंने लोकसभा के बागी सांसदों पर गहरा गुस्सा जाहिर करते हुए बांग्ला की प्रसिद्ध कहावत का जिक्र किया और कहा, "ममता दीदी ने दूध-केला देकर सांप पाले थे, जो अब देश के सामने पूरी तरह उजागर हो गए हैं।"

सौगत राय को सौंपी गई ये जिम्‍मेदारी

इसके अलावा, पार्टी के प्रति निष्ठावान रहने वाले सांसदों को एकजुट रखने की कोशिश भी तेज कर दी गई है। ममता बनर्जी के प्रति वफादार रहने वाले शेष आठ लोकसभा सांसदों के लिए वरिष्ठ सांसद सौगत राय को तृणमूल कांग्रेस के लोकसभा विंग का मुख्य सलाहकार नियुक्त किया गया है, ताकि संसद में पार्टी के आंतरिक मुद्दों पर नजर रखी जा सके।

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