Abhijeet Dipke पर 24 घंटे UP Police की 'तीसरी आंख'? पुणे से Lucknow ट्रैकिंग, कैसे चक्रव्यूह में फंसा 'कॉकरोच'
Abhijeet Dipke 'Cockroach Janata Party' Protest: NEET पेपर लीक के विरोध में शुक्रवार (12 जून) को लखनऊ के ईको गार्डन में आयोजित छात्र प्रदर्शन को उग्र रूप देने की कोशिश को उत्तर प्रदेश पुलिस ने अपनी सटीक प्लानिंग से नाकाम कर दिया। सोशल मीडिया पर वायरल हुए बड़े प्रदर्शन के ऐलान के बाद खुफिया विभाग की सूचनाओं पर पुलिस ने पूरे प्रदेश में अभूतपूर्व तैयारियां कीं। 10 हजार से अधिक सादे कपड़ों वाले जवान, 150 कोचिंग संचालकों की निगरानी, छह राज्यों से आने वाले लोगों पर नजर और करीब 200 राजनैतिक तत्वों की पहचान, यह सब एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा था।
नजीता ये हुआ कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा। छात्रों की मांगें सुनी गईं, लेकिन 'कॉकरोच जनता पार्टी' के संस्थापक और मुख्य रणनीतिकार अभिजीत दीपके (Abhijeet Dipke) समेत बाहरी तत्वों को छात्रों के बीच घुसने का मौका नहीं मिला। यह कहानी है खुफिया जानकारी, रणनीतिक निगरानी, काउंसिलिंग और सख्ती के मिश्रण की। एसीपी हजरतगंज और नोडल अधिकारी विकास जायसवाल ने Oneindia HIndi को विस्तार से बताया कि कैसे यूपी पुलिस ने अपनी सटीक प्लानिंग से प्रदर्शन को उग्र होने से बचाया?

प्रर्दशन की वजह और कहां-कहां से जुटने थे 'Cockroach'? समझें...
नीट-यूजी 2026 परीक्षा में पेपर लीक की खबर ने पूरे देश में छात्रों के बीच गुस्सा का उबाल ला दिया। लाखों छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो गया। कई राज्यों में पहले ही प्रदर्शन हो चुके थे। उत्तर प्रदेश में भी कोचिंग हब प्रयागराज, लखनऊ, कानपुर आदि में नाराजगी चरम पर थी। सोशल मीडिया पर 12 जून को 'ईको गार्डन, लखनऊ में विशाल प्रदर्शन' का ऐलान हुआ। घोषणा करने वाले ऑनलाइन शिक्षण मंच 'एग्जामपुर' (Exampur) के संस्थापक और प्रमुख शिक्षक विवेक कुमार थे। पोस्ट में कहा गया था कि प्रदेश के 34 जनपदों के अलावा दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार आदि से छात्र और अभिभावक पहुंचेंगे। अनुमान था कि भीड़ 10 हजार से ज्यादा हो सकती है।

लेकिन खुफिया इनपुट ने पुलिस को चौंका दिया। प्रदर्शन छात्र हित का नहीं, बल्कि कुछ राजनैतिक दलों और बाहरी तत्वों द्वारा 'रोटी सेंकने' का माध्यम बनने वाला था। कॉकरोच पार्टी के नाम से चर्चित अभिजीत दीपके पुणे से लखनऊ पहुंचने वाले थे। विभिन्न पार्टियों के कार्यकर्ता भी सक्रिय थे।
Abhijeet Dipke की हर मूवमेंट पर पैनी नजर

एसीपी हजरतगंज और नोडल अधिकारी विकास जायसवाल के मुताबिक, अभिजीत दीपके ने सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी, जिसे प्रशासन की ओर से मंजूरी भी दे दी गई थी। हालांकि, प्रदर्शन से पहले ही यूपी पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आई। अभिजीत दीपके और उनके सहयोगी विवेक की हर गतिविधि पर बारीकी से नजर रखी गई। पुलिस यह लगातार मॉनिटर कर रही थी कि वे किन लोगों से मुलाकात कर रहे हैं और उनके साथ कौन-कौन लोग जुड़ रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, लखनऊ पहुंचने के बाद उनकी आवाजाही पर भी विशेष निगरानी रखी गई। वे किस वाहन से यात्रा कर रहे हैं, किसकी गाड़ी का इस्तेमाल कर रहे हैं और शहर में किन-किन स्थानों पर जा रहे हैं, इन सभी पहलुओं पर पुलिस की नजर बनी रही। इतना ही नहीं, उनके ठहरने की व्यवस्था और होटल से जुड़ी जानकारी भी प्रशासन के रडार पर रही। कुल मिलाकर, प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से यूपी पुलिस ने अभिजीत दीपके की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी और हर महत्वपूर्ण जानकारी पर अपडेट बनाए रखा।
आइए अब टाइमलाइन में समझतें हैं, पुलिस का चक्रव्यूह कैसे रचा गया?

- 10 जून, शाम: सोशल मीडिया पर प्रदर्शन की घोषणा वायरल। खुफिया विभाग (IB) सक्रिय। प्रारंभिक रिपोर्ट थी कि प्रदर्शन में राजनैतिक घुसपैठ की आशंका। डीजीपी राजीव कृष्ण और एडीजी (कानून-व्यवस्था) अमिताभ यश ने तुरंत बैठक बुलाई। लखनऊ पुलिस कमिश्नर अमरेन्द्र कुमार सेंगर को निर्देश। सभी 75 जनपदों को अलर्ट।
- 11 जून, सुबह: संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) बबलू कुमार की टीम ने कोचिंग संचालक विवेक की लोकेशन ट्रेस की, जो दिल्ली का वजीराबाद था। प्रयागराज के टारगेट ऑन कोचिंग से जुड़े 150 संचालकों की लिस्ट तैयार। पूरे प्रदेश में 10 हजार से अधिक सादे कपड़ों वाले पुलिसकर्मियों को तैनात करने का फैसला लिया गया।
- 11 जून, दोपहर: विवेक की गुपचुप दिल्ली से ट्रेन की निगरानी शुरू की। सादे कपडों में पुलिसकर्मी उसकी हर हरकत पर नजर रखते रहे। पुणे से अभिजीत दीपके की मूवमेंट पर नजर। पुणे पुलिस से समन्वय। 34 जनपदों (लखनऊ, प्रयागराज, कानपुर, वाराणसी, गोरखपुर आदि) में चेकपोस्ट बढ़ाए गए। विभिन्न राजनैतिक दलों के करीब 200 सक्रिय कार्यकर्ताओं की पहचान। इनमें स्थानीय और बाहरी दोनों शामिल।
- 11 जून, शाम: टुंडला स्टेशन पर विवेक को रोका गया। छात्रों के विरोध के बाद छोड़ा गया, लेकिन सख्त चेतावनी दी गई। विवेक लखनऊ पहुंचे तो जानकीपुरम के प्रशांत की इनोवा से होटल गए। एसीपी हजरतगंज और नोडल अधिकारी विकास जायसवाल की टीम ने उनसे मुलाकात की। लिखित आश्वासन लिया, प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहेगा, कोई उग्रता नहीं।
- 12 जून (प्रदर्शन दिवस), सुबह: अभिजीत दीपके पुणे से लखनऊ एयरपोर्ट पहुंचे। एयरपोर्ट से ईको गार्डन तक उनकी पूर्ण निगरानी। सादे कपड़ों में पुलिस टीम उनके चारों ओर। प्रदर्शन स्थल पर 1500 से ज्यादा भारी पुलिस बल, पीएसी, अर्धसैनिक बल और स्थानीय पुलिस।
- 12 जून, दोपहर: ईको गार्डन (Lucknow Eco Garden)पहुंचे अभिजीत दीपके को छात्रों ने नजरअंदाज कर दिया। यह पुलिस की काउंसिलिंग और चक्रव्यूह का असर साफ था। छात्रों को समझाया गया कि राजनैतिक रंग देने से उनकी मांगें कमजोर होंगी। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा। नारे लगे, मांगें रखी गईं, लेकिन कोई हिंसा या तोड़फोड़ नहीं।
- 12 जून, शाम: प्रदर्शन समाप्ति के बाद पुलिस ने 200 चिह्नित तत्वों पर कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी।
पुलिस की रणनीति: बहु-स्तरीय चक्रव्यूह

- खुफिया नेटवर्क: IB और स्थानीय इंटेलिजेंस की संयुक्त रिपोर्टिंग। सोशल मीडिया मॉनिटरिंग।
- सादे कपड़ों की भारी तैनाती: 10,000+ जवान। इनमें से कई कोचिंग संचालकों के आसपास। इससे भीड़ में घुसपैठ आसान नहीं हुई।
- इंटर-स्टेट समन्वय: दिल्ली, पुणे, हरियाणा आदि पुलिस के साथ रियल-टाइम शेयरिंग।
- काउंसिलिंग और सॉफ्ट अप्रोच: छात्रों को अलग-अलग समझाया गया। 'आपकी लड़ाई सही है, लेकिन इसे राजनैतिक मत बनाओ।'
- हाई-प्रोफाइल निगरानी: विवेक और अभिजीत दीपके जैसे मुख्य चेहरे 24x7 घेरे में।
- रोकथाम: कई जिलों में संभावित प्रदर्शनकारियों को उनके घरों/जनपदों में ही रोका गया।
संयुक्त पुलिस आयुक्त बबलू कुमार ने बताया कि छात्रों के प्रदर्शन को राजनैतिक और उग्र रूप देने की तैयारी कई दल कर रहे थे। डीजीपी और सीपी के निर्देशन में प्रदर्शन को शांतिपूर्ण तरीके से करा लिया गया है। बड़ी संख्या में पुलिस, पीएसी और अर्धसैनिक बल लगाया गया था। प्रदर्शन को उग्र रूप देने की कोशिश में लगे करीब 200 लोगों को चिह्नित किया गया है। उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
क्यों था खतरा?

- छात्रों की ओट: कुछ दल छात्र आंदोलन का चोला पहनकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकना चाहते थे।
- कॉकरोच पार्टी का एंगल: अभिजीत दीपके का आगमन इसे वायरल बनाने और उग्र बनाने की कोशिश लगती है।
- मल्टी-स्टेट मोबिलाइजेशन: 34 जनपद + 6 राज्य = बड़े पैमाने पर भीड़, जो आसानी से अनियंत्रित हो सकती थी।
- कोचिंग लॉबी: 150 संचालकों की सक्रिय भूमिका। कुछ अपनी व्यावसायिक मांगों को जोड़ना चाहते थे।
'Abhijeet Dipke हो गए किनारे'
पुलिस की काउंसिलिंग ने काम किया। छात्रों ने समझा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन से उनकी मांगें ज्यादा प्रभावी होंगी। अभिजीत दीपके को 'भाव' नहीं दिया गया। उन्होंने किनारे रहकर कार्यक्रम देखा और वापस चले गए।
UP पुलिस की कार्यकुशलता, 'कॉकरोच' के लिए रचा चक्रव्यूह
इस पूरे ऑपरेशन में पुलिस ने आधुनिक खुफिया उपकरणों, लोकेशन ट्रैकिंग, सोशल मीडिया एनालिटिक्स और पुरानी पद्धति (Human Intelligence) का बेहतरीन मिश्रण किया। एसीपी हजरतगंज और नोडल अधिकारी विकास जायसवाल ने बताया कि 150 नए CCTV कैमरे ईको गार्डन के आसपास लगाए गए। ड्रोन कैमरे से भी निगरानी की गई।
डीजीपी राजीव कृष्ण के नेतृत्व में पूरी मशीनरी 48 घंटे से कम समय में सक्रिय हुई। लखनऊ पुलिस कमिश्नर अमरेन्द्र कुमार सेंगर, संयुक्त पुलिस आयुक्त बबलू कुमार, एसीपी हजरतगंज और विकास जायसवाल जैसे अधिकारियों की टीम वर्क उल्लेखनीय रहा।
उत्तर प्रदेश पुलिस ने दिखा दिया कि बड़े प्रदर्शनों को बिना हिंसा के नियंत्रित करना संभव है, बशर्ते खुफिया जानकारी सटीक हो, रणनीति स्पष्ट हो और नेतृत्व मजबूत। 'कॉकरोच' का चक्रव्यूह भेदने की बजाय पुलिस ने खुद चक्रव्यूह रचकर स्थिति को संभाला। छात्रों की आवाज सुनी गई, लेकिन अराजकता नहीं फैलने दी गई।













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