कौन हैं मोहम्मद अमीन महदवी? जिसे Iran ने इज़रायल के लिए जासूसी के आरोप में फांसी दी
Israel Iran War: इज़रायल-ईरान तनाव के बीच सोमवार, 23 जून को ईरान ने मोहम्मद अमीन महदवी शायस्ता (Mohammad Amin Mahdavi Shayesteh) को फांसी दी। उन पर इज़रायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के लिए जासूसी करने और लंदन स्थित फारसी भाषा वाले समाचार चैनल ईरान इंटरनेशनल के साथ सहयोग करने का आरोप था। ईरानी न्यायपालिका ने उन्हें 'ज़ायोनी शासन के साथ खुफिया सहयोग' का दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई। यह कदम ऐसे समय में आया है जब ईरानी अधिकारियों ने जासूसी और इज़राइल के साथ सहयोग के मामलों में तेजी लाने का ऐलान किया है, जो इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव को और बढ़ा सकता है।

मोहम्मद अमीन महदवी शायस्ता कौन थे?
मोहम्मद अमीन महदवी शायस्ता का नाम ईरानी मीडिया में जासूसी और उपद्रव के संदर्भ में सामने आया। सरकारी अधिकारियों का दावा है कि वे इज़रायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के साथ काम करते थे, जो इज़रान की विदेशी खुफिया सेवा मानी जाती है। साथ ही उन पर लंदन आधारित फारसी भाषा के समाचार चैनल ईरान इंटरनेशनल से संबंध बनाने का भी आरोप था, जिसे ईरान पहले 'आतंकवादी संगठन' कह चुका है।
यह संबंध 2022 के व्यापक विरोध प्रदर्शनों से जुड़ा था, जो महसा अमिनी की हिरासत में मौत के बाद पूरे ईरान में फैल गए थे। महसा अमिनी को ईरान के कड़े हिजाब नियमों के उल्लंघन के आरोप में हिरासत में लिया गया था। ईरानी सरकार ने आरोप लगाया था कि ईरान इंटरनेशनल ने इन विरोध प्रदर्शनों को भड़काया और राज्य-विरोधी प्रचार फैलाया।
हालांकि, ईरान ने शायस्ता के खिलाफ कोई ठोस सबूत सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन अधिकारियों का कहना था कि उन्होंने 'शत्रु तत्वों' के साथ संवेदनशील खुफिया जानकारी साझा की। इन आरोपों के आधार पर उनका मुकदमा चला और उन्हें फांसी दी गई।
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सोशल मीडिया पर विरोध
कुछ सोशल मीडिया यूजर्स और एक्टिविस्ट्स ने ईरानी सरकार के दावे को खारिज करते हुए कहा है कि मोहम्मद अमीन महदवी शायस्ता कोई जासूस नहीं बल्कि एक विकलांग और मासूम प्रदर्शनकारी थे।
ट्विटर पर वायरल कई पोस्ट में यह दावा किया गया कि शायस्ता परिवार के एकमात्र कमाने वाले थे, उन्हें मानसिक और शारीरिक विकलांगता थी, और उन्हें जबरन कबूलनामा दिलवाने के लिए यातनाएं दी गईं। एक ट्वीट में कहा गया कि उन्हें खाली पिस्तौल मैगज़ीन और काली मिर्च के स्प्रे के आधार पर दोषी ठहराया गया। यूजर्स का कहना है कि उनकी मौत युद्ध की सुर्खियों के पीछे छुपा एक योजनाबद्ध फांसी थी, जबकि शासन ईरानियों को दबा रहा है और मार रहा है।'
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