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Suhas Subramanyam: अमेरिका में भारतीय मूल के सांसद ने गीता पर हाथ रखकर ली शपथ, कौन हैं सुहास सुब्रमण्यम?

Suhas Subramanyam: अमेरिका में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए ये एक ऐतिहासिक पल था, जब भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद सुहास सुब्रमण्यम ने पवित्र हिंदू ग्रंथ भगवद गीता पर हाथ रखकर शपथ ली। वर्जीनिया के 13वें जिले का प्रतिनिधित्व करने वाले सुब्रमण्यम, यू.एस. ईस्ट कोस्ट से कांग्रेस में चुने जाने वाले पहले भारतीय-अमेरिकी हैं।

जिस वक्त सुहास सुब्रमण्यम गीता पर हाथ रखकर शपथ ले रहे थे, उस वक्त उनकी मां भी वहां मौजूद थीं। अमेरिकी कांग्रेस को दुनिया की सबसे शक्तिशाली राजनीतिक संस्थाओं में से एक माना जाता है और निश्चित तौर पर ये तमाम भारतीयों के लिए गर्व की बात है।

Suhas Subramanyam

सुब्रमण्यम, तुलसी गबार्ड की जगह लेंगे, जो अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए चुनी गई पहली हिंदू अमेरिकी हैं। गबार्ड ने भी अपने सुहास की तरह ही 2013 में गीता पर हाथ रखकर शपथ ली थी, जबकि वह ऐसा करने वाली कांग्रेस की पहली सदस्य थीं। तब से, भगवद गीता पर शपथ लेना अमेरिका के भीतर राजनीति में हिंदू-अमेरिकियों के बढ़ते प्रभाव का प्रतीक बन गया है।

भारतीयों के लिए गर्व का पल

शपथ ग्रहण के मौके पर सुब्रमण्यम ने अपने अनुभव पर एक मार्मिक बयान दिया। उन्होंने बताया, कि कैसे उनके माता-पिता, जो भारत से आए थे, उन्होंने कभी नहीं सोचा होगा, कि उनका बेटा कभी कांग्रेस में वर्जीनिया का प्रतिनिधित्व करेगा। उन्होंने कहा, कि "अगर आपने मेरी मां से कहा होता, कि जब वह भारत से डलेस हवाई अड्डे पर उतरी थीं, तो उनका बेटा कांग्रेस में वर्जीनिया का प्रतिनिधित्व करेगा, तो शायद वह आपकी बात पर विश्वास नहीं करतीं।"

सुब्रमण्यम की सफलता से अमेरिकी राजनीति में भारतीय-अमेरिकियों की बढ़ती उपस्थिति पर काफी हद तक जोर दिया गया है। सुब्रमण्यम की जीत दक्षिण एशियाई लोगों और अमेरिकी राजनीति में कई भारतीय प्रतिनिधियों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

अमेरिकी राजनीति में भारतीय-अमेरिकियों की बढ़ती मौजूदगी

सुब्रमण्यम के चुने जाने के साथ, कांग्रेस में भारतीय-अमेरिकी सांसदों की संख्या अब चार हो गई है। भारतीय-अमेरिकी कांग्रेस सदस्यों में राजा कृष्णमूर्ति, रो खन्ना और श्री थानेदार शामिल हैं। यह भारतीय-अमेरिकियों के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव को दर्शाता है, जो अब अमेरिकी कांग्रेस में सबसे प्रमुख जातीय समूहों में से एक हैं।

इन चार हिंदू सदस्यों के अलावा, कांग्रेस में बौद्धों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। वर्तमान कांग्रेस में तीन सदस्य हैं - जो अमेरिकी कानून बनाने वाले निकायों की विविध धार्मिक संरचना का प्रमाण है। 461 सदस्यों वाले ईसाईयों के बाद यहूदियों का स्थान आता है, जिनके 32 सदस्य हैं।

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सुब्रमण्यम का राजनीतिक सफर

अमेरिकी कांग्रेस में चुने जाने से पहले, सुब्रमण्यम पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रशासन में नीति सलाहकार के रूप में काम कर रहे थे। 2019 में वर्जीनिया की आम सभा के लिए चुने गए सुब्रमण्यम ने आर्थिक विकास और सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसे विविध मुद्दों पर काम किया। कांग्रेस में उनका प्रवेश न केवल भारतीय अमेरिकियों की राजनीतिक उन्नति में एक और कदम है, बल्कि अमेरिकी राजनीति में और भी अधिक विविध और समृद्ध प्रतिनिधित्व की ओर भी इशारा करता है।

वर्जीनिया से वाशिंगटन तक, सुब्रमण्यम की यात्रा सरकार के उच्चतम स्तरों पर दक्षिण एशियाई लोगों के बढ़ते प्रतिनिधित्व की अमेरिका की लाइनअप को भी दर्शाती हैं, जो बदले में अमेरिका के भविष्य को आकार देने में भारतीय-अमेरिकी समुदाय की सामाजिक-राजनीतिक ऊंचाई को प्रदर्शित करती है।

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