कौन हैं भारतीय मूल की हरमीत ढिल्लों? जिन्हें अमेरिकी न्याय विभाग में Trump ने सहायक अटॉर्नी जनरल नामित किया
Who is Harmeet Dhillon: अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय-अमेरिकी वकील हरमीत के. ढिल्लों को न्याय विभाग में नागरिक अधिकारों के लिए सहायक अटॉर्नी जनरल के रूप में नामित किया है। यह घोषणा ट्रंप ने अपने प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर की।
हरमीत ढिल्लों को उनके नागरिक स्वतंत्रता के लिए किए गए काम और चुनाव कानून में विशेषज्ञता के लिए जाना जाता है। आइए जानते हैं कौन हैं ढिल्लों?

Who is Harmeet Dhillon: कौन हैं हरमीत ढिल्लों?
- हरमीत ढिल्लों का जन्म चंडीगढ़, भारत में हुआ, लेकिन वे बचपन में ही संयुक्त राज्य अमेरिका चली गईं।
- शिक्षा: उन्होंने डार्टमाउथ कॉलेज और वर्जीनिया यूनिवर्सिटी लॉ स्कूल से पढ़ाई की।
- कैरियर की शुरुआत: अमेरिकी चौथे सर्किट कोर्ट ऑफ अपील में क्लर्किंग की।
- समुदाय से जुड़ाव: वे सिख समुदाय की सक्रिय सदस्य रही हैं और कई बार नस्लीय हमलों का सामना कर चुकी हैं।
हरमीत का कानूनी और सामाजिक योगदान
- हरमीत का करियर नागरिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए समर्पित रहा है।
- तकनीकी कंपनियों के खिलाफ लड़ाई: उन्होंने कथित सेंसरशिप और भेदभाव के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की।
- धार्मिक अधिकारों की रक्षा: COVID-19 प्रतिबंधों के दौरान ईसाई समुदाय का प्रतिनिधित्व किया।
- चुनाव कानून में विशेषज्ञता: मतदान प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने पर काम किया।
ट्रंप के नामांकन का महत्व
- ट्रंप द्वारा हरमीत को इस पद के लिए नामित करना उनके काम और पार्टी में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है।
- पहली भारतीय-अमेरिकी उपलब्धि: 2016 में हरमीत GOP कन्वेंशन में मंच पर आने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी बनीं।
- रिपब्लिकन पार्टी में योगदान: वे रिपब्लिकन नेशनल कमेटी की अध्यक्षता के लिए भी दौड़ीं, हालांकि सफल नहीं हुईं।
- नागरिक अधिकारों की रक्षा: ट्रंप ने उनके अनुभव और समर्पण को देखते हुए उन्हें यह महत्वपूर्ण पद दिया।
उनकी नई भूमिका से उम्मीदें
- सहायक अटॉर्नी जनरल के रूप में हरमीत के पास चुनाव कानून और नागरिक अधिकारों के निष्पक्ष और सशक्त प्रवर्तन की बड़ी जिम्मेदारी होगी।
- उनका काम नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा और कानूनों को समान रूप से लागू करने पर केंद्रित रहेगा।
- उनके अनुभव से न्याय विभाग को संवैधानिक अधिकारों को बनाए रखने में मजबूती मिलेगी।
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