Donald Trump: डोनाल्ड ट्रंप ने पहली बार दिया भारत को बड़ा टेंशन, इस बड़े प्रोडक्ट पर टैरिफ लगाने का ऐलान
Donald Trump tariffs on Steel: अमेरिका के भावी राष्ट्रपति डोनाल्ड दुनिया में व्यापार युद्ध शुरू करने जा रहे हैं और कनाडा, मैक्सिको और चीन के खिलाफ भारी टैरिफ थोपने का ऐलान करने के बाद अब ट्रंप ने भारत को सबसे बड़ा टेंशन दिया है।
ऐसे समय में जब भारतीय स्टील कंपनियों के स्टील निर्यात में भारी गिरावट देखी जा रही है, अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को अमेरिकी स्टील उद्योग की सुरक्षा के लिए आयातित स्टील पर भारी-भरकम नए टैरिफ लगाने का संकेत दिया है।

ट्रंप ने कहा है, कि वह जापानी कंपनी निप्पॉन स्टील को भी पेंसिल्वेनिया स्थित स्टील निर्माता यूएस स्टील का अधिग्रहण करने से भी रोकेंगे।
डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है, कि "मैं एक समय महान और शक्तिशाली यूएस स्टील को किसी विदेशी कंपनी द्वारा खरीदे जाने के पूरी तरह खिलाफ हूं, इस मामले में जापान की निप्पॉन स्टील ऐसा करने जा रही है। टैक्स प्रोत्साहन और टैरिफ की एक श्रृंखला के माध्यम से, हम यूएस स्टील को फिर से मजबूत और महान बनाएंगे, और यह तेजी से होगा! राष्ट्रपति के रूप में, मैं इस सौदे को होने से रोकूंगा। खरीदार सावधान रहें!!!"
भारत को लगेगा सबसे बड़ा झटका
डोनाल्ड ट्रंप ने ये घोषणा ऐसे समय में की है, जब भारतीय स्टील कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कई चुनौतियों से जूझ रही हैं, जिससे निर्यात में भारी गिरावट आई है और भारत को स्टील खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ा है। आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है, कि चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही के दौरान भारत में स्टील आयात में लगभग 41 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि निर्यात में 36 प्रतिशत की गिरावट आई है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय और इस्पात मंत्रालय ने इस्पात उद्योग में उभरती समस्याओं पर चर्चा करने के लिए सोमवार को इंडस्ट्री के हितधारकों के साथ बैठक की है।
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, घरेलू इस्पात उद्योग की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए इस्पात मंत्रालय ने कुछ इस्पात वस्तुओं के आयात पर 25 प्रतिशत सुरक्षा शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है। पिछले महीने इस्पात सचिव संदीप पौंड्रिक ने एक उद्योग कार्यक्रम में कहा था, कि भारत में इस्पात की खपत बढ़ रही है, साथ ही उन्होंने कहा कि इस्पात निर्माताओं का लाभ भी कम हो रहा है।
पौंड्रिक ने कहा, "2024-25 की पहली छमाही में, हमने स्टील की खपत में 13 प्रतिशत की वृद्धि देखी है। मांग पक्ष पर, कोई स्पष्ट समस्या नहीं है। यदि यह वृद्धि जारी रहती है, साथ ही सरकार द्वारा बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक व्यय के लिए जोर दिया जाता है, तो हमें 2030 तक लगभग 300 मिलियन टन क्षमता की आवश्यकता होगी।"
उन्होंने कहा, कि "हालांकि, लाभप्रदता एक चिंता का विषय बनी हुई है, खासकर पिछले छह महीनों में, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय डंपिंग के कारण स्टील की कीमतें कम हुई हैं। वित्तीय वर्ष की पहली छमाही में भारतीय आयात में 41 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि निर्यात में 36 प्रतिशत की गिरावट आई है। स्टील कंपनियों में इन्वेंट्री का स्तर सामान्य 15-16 दिनों से बढ़कर 30 दिनों तक हो गया है। यह एक वास्तविक समस्या है, और हम इसके बारे में पूरी तरह से जानते हैं।"
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया, कि घरेलू इस्पात उद्योग की सुरक्षा के लिए कई तरीके हैं, जिसमें मूल सीमा शुल्क बढ़ाना भी शामिल है।
चुनौती यह है, कि हमारे आयात का 62 प्रतिशत एफटीए देशों से आता है। इसलिए, मूल सीमा शुल्क बढ़ाने से इन आयातों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि वे शुल्क मुक्त हैं। दूसरा विकल्प सुरक्षा शुल्क लगाना है, जिसे उद्योग को व्यापार उपचार महानिदेशालय (DGTR) के सामने प्रस्तावित करना होगा।"
रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग्स ने इससे पहले अक्टूबर में रिपोर्ट दी थी, कि इस्पात आयात में वृद्धि ने घरेलू खिलाड़ियों के लाभ मार्जिन को प्रभावित किया है, और चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही के दौरान इन दबावों के और बढ़ने की उम्मीद है।












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