Ali Khamenei Funeral: 131 दिनों तक कहां रखी थी अली खामेनेई की डेड बॉडी? कौन-से लगाए कैमिकल? अब चला पता

Ali Khamenei Funeral: ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को सुपुर्द-ए-खाक किए जाने का प्रोग्राम आखिरकार 3 जुलाई 2026 से शुरू हो गया। उनकी मौत 28 फरवरी 2026 को तेहरान में अमेरिका और इजरायल के हवाई हमले में हुई थी। यानी उनकी मौत के करीब 131 दिन बाद उनके जनाजे की प्रक्रिया शुरू हो सकी। इतनी लंबी देरी ने दुनिया भर में सवाल खड़े कर दिए कि आखिर इस्लामी परंपराओं वाले देश ईरान में ऐसा क्यों हुआ?

इस्लाम में 24 घंटे के भीतर दफनाने की परंपरा

इस्लामिक शरीयत के मुताबिक किसी भी व्यक्ति की मौत के बाद उसे 24 घंटे के भीतर दफनाना सबसे उचित माना जाता है। ऐसे में खामेनेई के पार्थिव शरीर को चार महीने से ज्यादा समय तक सुरक्षित रखना धार्मिक और प्रशासनिक, दोनों ही स्तर पर बेहद असाधारण फैसला था। ईरान के लिए यह केवल सुरक्षा का मामला नहीं था, बल्कि धार्मिक नियमों का पालन करना भी उतना ही जरूरी था।

Funeral procession for Ayatollah Ali Khamenei in Tehran

बिना एम्बामिंग के कैसे सुरक्षित रखा गया शव?

इस्लाम में शव पर कैमिकल का लेप लगाने यानी एम्बामिंग (Embalming) की अनुमति नहीं है। इसलिए ईरान ने किसी केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया। अधिकारियों के मुताबिक खामेनेई के पार्थिव शरीर को तेहरान के एक हाई-सिक्योरिटी फोरेंसिक लैब के रेफ्रिजरेटेड कोल्ड स्टोरेज में बेहद कम तापमान पर रखा गया। इसी वैज्ञानिक तरीके से शव को लगभग 131 दिनों तक सुरक्षित रखा गया।

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धार्मिक नेताओं ने दी थी विशेष अनुमति

इतनी लंबी देरी को धार्मिक रूप से स्वीकार्य बनाने के लिए शिया धर्मगुरुओं ने विशेष छूट जारी की। शिया न्यायशास्त्र के मुताबिक यदि देश युद्ध, बड़े सुरक्षा संकट या राष्ट्रीय आपातकाल जैसी स्थिति से गुजर रहा हो, तो शव को सुरक्षित ठंडे स्थान पर रखकर अंतिम संस्कार को कुछ समय के लिए टाला जा सकता है। इसी नियम के आधार पर ईरान ने यह फैसला लिया। रिपोर्टों के मुताबिक, उसी हवाई हमले में मारे गए खामेनेई के परिवार के अन्य सदस्यों के शव भी इसी प्रक्रिया के तहत सुरक्षित रखे गए थे।

युद्ध और हवाई हमलों ने बढ़ा दी थी मुश्किल

जनाजे में देरी की सबसे बड़ी वजह सुरक्षा थी। फरवरी 2026 में खामेनेई की मौत के बाद तेहरान और आसपास के इलाकों में लगातार हवाई और मिसाइल हमलों का खतरा बना हुआ था। ऐसे माहौल में लाखों लोगों की भीड़ जुटाना और विदेशी प्रतिनिधियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना लगभग असंभव माना जा रहा था। इसी कारण ईरान ने जनाजेर को टालने का फैसला किया।

सीजफायर के बाद मिला दफनाने का मौका

स्थिति तब बदली जब जून 2026 में ईरान और अमेरिका के बीच एक नाजुक सीजफायर (Ceasefire) समझौता हुआ। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों को भरोसा हुआ कि बड़े स्तर पर राजकीय अंतिम संस्कार कराया जा सकता है। इसके साथ ही प्रशासन ने पुराने अनुभवों से भी सबक लिया। 1989 में अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के अंतिम संस्कार और 2020 में जनरल कासिम सुलेमानी को सुपुर्द-ए-खाक किए जाने के दौरान भगदड़ और अव्यवस्था हुई थी। इस बार ईरान ऐसी किसी घटना को दोहराना नहीं चाहता था।

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तेहरान से मशहद तक निकलेगी अंतिम यात्रा

3 जुलाई 2026 को खामेनेई के पार्थिव शरीर को तेहरान की ग्रैंड मोसल्ला मस्जिद लाया गया, जहां कड़ी सुरक्षा के बीच विदेशी प्रतिनिधियों की मौजूदगी में निजी प्रार्थना सभा आयोजित की गई। इसके बाद सार्वजनिक अंतिम यात्रा शुरू हुई। यह यात्रा ईरान और इराक के पांच प्रमुख शहरों से होकर गुजरेगी और लगभग छह दिनों तक चलेगी। 9 जुलाई 2026 को खामेनेई को उनके पैतृक शहर मशहद में स्थित इमाम रज़ा दरगाह परिसर में पूरे राजकीय और धार्मिक सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।

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