IPS Kiran Yadav कौन हैं? लखनऊ से तोड़ी USA Cyber ठगी की कमर, 27 लड़कियां समेत 119 अरेस्ट, Trump का क्या लिंक?

OI Exclusive Lucknow Summit Building Call Centre Cyber Fraud Busted: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर स्थित समिट बिल्डिंग की 11वीं मंजिल पर बाहर से एक आधुनिक कॉर्पोरेट ऑफिस नजर आता था, लेकिन अंदर अमेरिका के नागरिकों को निशाना बनाकर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी का अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क संचालित हो रहा था। रात होते ही यहां सैकड़ों कर्मचारी सक्रिय हो जाते थे और खुद को बैंक अधिकारी, कस्टमर सपोर्ट एजेंट या सरकारी एजेंसी का प्रतिनिधि बताकर अमेरिकी नागरिकों को जाल में फंसाते थे।

इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की अपर पुलिस उपायुक्त (ADCP) अपराध एवं साइबर क्राइम, 2021 बैच की आईपीएस अधिकारी किरन यादव (IPS Kiran Yadav) के नेतृत्व में हुआ। इस ऑपरेशन में पुलिस ने 119 आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनमें 92 युवक और 27 युवतियां शामिल हैं। मौके से 103 लैपटॉप, 177 मोबाइल फोन, वीओआईपी (VoIP) कॉलिंग सिस्टम, आईबीएम डायलर, डिजिटल स्टोरेज डिवाइस, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और ठगी में इस्तेमाल होने वाली स्क्रिप्ट्स बरामद की गईं। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि यह गिरोह लगभग 45 करोड़ रुपये की साइबर ठगी को अंजाम दे चुका था।

is-ips-kiran-yadav

यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कृष्ण द्वारा साइबर अपराध पर चलाए जा रहे अभियान के तहत तीसरी बड़ी सफलता मानी जा रही है। आइए जानते हैं कि कैसे लखनऊ से US के लोगों का शिकार करते थे जालसाज? IPS किरन यादव की Oneindia Hindi से खास बातचीत में ठगी का पर्दाफश...

मिडनाइट रेड कैसे हुई?

वनइंडिया हिंदी से विशेष बातचीत में आईपीएस किरन यादव ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि यह कॉल सेंटर केवल रात 7 बजे से तड़के लगभग 2 बजे तक सक्रिय रहता है। दिन में यहां पहुंचने से कोई फायदा नहीं होता, इसलिए टीम ने पहले रात में रेकी की और फिर उसी दौरान छापेमारी की।

who-is-ips-kiran-yadav

रेड के दौरान पुलिस ने पाया कि पूरे कार्यालय में कर्मचारी अमेरिकी नागरिकों से बातचीत कर रहे थे। किसी भी कर्मचारी के पास वैध लाइसेंस, अधिकृत एग्रीमेंट या वैध कॉल सेंटर संचालन के दस्तावेज नहीं मिले। कई कंप्यूटरों पर अमेरिकी नागरिकों को ठगने के लिए तैयार स्क्रिप्ट खुली हुई थीं। मौके से बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और डिजिटल साक्ष्य भी जब्त किए गए।

अमेरिका के लोगों तक कैसे पहुंचते थे जालसाज?

किरन यादव के अनुसार, यह कोई सामान्य कॉल सेंटर नहीं था बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय साइबर नेटवर्क का हिस्सा था। जांच में ऐसे व्हाट्सएप ग्रुप मिले जिनमें अमेरिका में बैठे साइबर ठग भी जुड़े हुए थे। इन्हीं ग्रुपों में अमेरिकी नागरिकों के मोबाइल नंबर साझा किए जाते थे।

who-is-ips-kiran-yadav

इसके बाद गिरोह फर्जी टोल-फ्री नंबर तैयार करता था। जब कोई अमेरिकी नागरिक किसी बैंक, ई-कॉमर्स कंपनी या अन्य सेवा से जुड़ी समस्या के समाधान के लिए उस नंबर पर कॉल करता था तो कॉल सीधे लखनऊ स्थित इस फर्जी कॉल सेंटर में पहुंच जाती थी।

तीन हिस्सों में बंटी थी पूरी ठगी की मशीन

पूरे ऑपरेशन को तीन अलग-अलग टीमों में बांटा गया था।

पहली ठगी की मशीन: डायलर टीम

इस टीम का पहला उद्देश्य पीड़ित का विश्वास जीतना होता था। कर्मचारी खुद को बैंक, कस्टमर सपोर्ट या टेक्निकल हेल्पलाइन का अधिकारी बताते थे। अगर, किसी अमेरिकी नागरिक के खाते से अनधिकृत लेन-देन हुआ होता या उसे बैंकिंग संबंधी कोई समस्या होती, तो यह टीम उससे बातचीत कर नाम, पता, उम्र, बैंक का नाम और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल कर लेती थी। इसके बाद पीड़ित को विश्वास दिलाया जाता था कि उसका मामला बैंक की फ्रॉड डिटेक्शन यूनिट को भेजा जा रहा है और कॉल दूसरी टीम को ट्रांसफर कर दी जाती थी।

who-is-ips-kiran-yadav

दूसरी ठगी की मशीन: हमारा बैंकर

दूसरी टीम खुद को बैंक का वरिष्ठ अधिकारी बताती थी। यहां पीड़ित के बैंक खाते की जानकारी और उसमें उपलब्ध रकम का अंदाजा लगाया जाता था। इसके बाद उसे डराया जाता था कि उसके खाते में संदिग्ध लेन-देन हुए हैं। उसे बताया जाता था कि उसके नाम पर गैरकानूनी हथियार खरीदे गए हैं, ड्रग्स की खरीद हुई है या अश्लील वेबसाइटों का इस्तेमाल किया गया है। जब पीड़ित पूरी तरह घबरा जाता था तो उसे बताया जाता था कि अब उसका मामला सरकारी एजेंसी को भेजा जा रहा है।

who-is-ips-kiran-yadav

तीसरी ठगी की मशीन: क्लोजर ग्रुप

अंतिम टीम सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थी। यह टीम अमेरिकी सोशल सिक्योरिटी नंबर (SSN) बंद होने का डर दिखाती थी। पीड़ित से कहा जाता था कि अगर उसने तुरंत कार्रवाई नहीं की तो उसका बैंक खाता फ्रीज कर दिया जाएगा। इसके बाद उससे कहा जाता था कि वह अपने खाते से पैसे निकालकर Amazon, Apple जैसे बड़े ब्रांडों के गिफ्ट कार्ड खरीद ले। गिफ्ट कार्ड खरीदने के बाद उससे उनका कूपन कोड साझा करने को कहा जाता था। कोड मिलते ही व्हाट्सएप पेमेंट ग्रुप के माध्यम से अमेरिका में बैठे साइबर अपराधी उन गिफ्ट कार्डों को तुरंत रिडीम कर लेते थे। आपको बता दें कि भारत के आधारकार्ड की तरह अमेरिका में SSN की महत्ता है।

ज्यादा अमीर लोगों के लिए अलग प्लान: गोल्ड की स्कीम

अगर किसी पीड़ित के बैंक खाते में अधिक धनराशि होती थी तो गिरोह उससे गिफ्ट कार्ड नहीं बल्कि सोना खरीदने को कहता था। पीड़ित को बताया जाता था कि उसका बैंक खाता जांच के दायरे में है, इसलिए सुरक्षा के लिए वह सोना खरीदकर उसे वाशिंगटन डी.सी. के कोर्ट हाउस में जमा करा दे। भरोसा दिलाया जाता था कि जांच पूरी होने के बाद उसका सोना वापस कर दिया जाएगा। जांच में सामने आया कि अमेरिका में मौजूद गिरोह के सदस्य पीड़ितों के घर तक पहुंचते थे और उनसे सोना खरीदवाकर उसे कथित रूप से कोर्ट हाउस में जमा कराने की प्रक्रिया पूरी करवाते थे। यानी यह नेटवर्क केवल ऑनलाइन ठगी तक सीमित नहीं था बल्कि जरूरत पड़ने पर फिजिकल ऑपरेशन भी करता था।

Who Is Lucknow Fake Call Centre Mastermind: मास्टरमाइंड कौन?

आईपीएस किरन यादव के मुताबिक, जांच में अभी तक 'चार्ल्'" नाम सामने आया है, लेकिन उसकी वास्तविक पहचान की पुष्टि नहीं हो सकी है। पुलिस इस पूरे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की कड़ियों की जांच कर रही है और मामले की विवेचना जारी है।

Lucknow Cyber Crime: लखनऊ में ऐसे दो और रैकेट भी पकड़े

किरन यादव ने बताया कि इससे पहले भी लखनऊ में साइबर ठगी के दो बड़े नेटवर्क पकड़े जा चुके हैं। पहले मामले में विभूतिखंड क्षेत्र में फर्जी जॉब कॉल सेंटर का खुलासा हुआ था। आरोपी रोजगार वेबसाइटों से बेरोजगार युवाओं का डेटा लेकर खुद को एचआर अधिकारी बताते थे और नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे वसूलते थे।

दूसरे मामले में तथाकथित कंसल्टिंग फीस के नाम पर ठगी की जाती थी। जालसाज लोगों को दूर-दराज के शहरों में नौकरी दिलाने का झांसा देकर मोटी रकम ऐंठ लेते थे। उदाहरण के तौर पर लखनऊ के व्यक्ति को गोरखपुर में नौकरी और गोरखपुर के व्यक्ति को नोएडा में नौकरी दिलाने का लालच देकर ठगा जाता था।

Donald Trump का क्या है लिंक?

इस पूरे मामले में डोनाल्ड ट्रम्प का कोई प्रत्यक्ष संबंध या भूमिका सामने नहीं आई है। दरअसल, जांच में सामने आया कि अमेरिका में सक्रिय गिरोह पीड़ितों से खरीदा गया सोना वाशिंगटन डीसी स्थित ई. बैरेट प्रीटिमैन फेडरल कोर्टहाउस (E. Barrett Prettyman Federal Courthouse) में जमा कराने की बात कहता था। यह संघीय न्यायालय अमेरिकी व्हाइट हाउस से लगभग 1.5 मील (करीब 2.4 किलोमीटर) की दूरी पर स्थित है, जहां अमेरिकी राष्ट्रपति का आधिकारिक निवास है।

इसी भौगोलिक निकटता के कारण सोशल मीडिया पर डोनाल्ड ट्रम्प का नाम चर्चा में आया, लेकिन अब तक की जांच में ट्रम्प, व्हाइट हाउस या अमेरिकी सरकार की किसी एजेंसी की इस ठगी में किसी प्रकार की संलिप्तता सामने नहीं आई है। इसलिए इसे केवल स्थानगत (लोकेशन) संबंध माना जाना चाहिए, न कि किसी व्यक्ति या संस्था की भूमिका।

साइबर ठगी से कैसे बचें?

आईपीएस किरन यादव का कहना है कि साइबर अपराध से बचने का सबसे बड़ा हथियार जागरूकता है। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि मोबाइल, सिम कार्ड और सभी महत्वपूर्ण डिजिटल खातों की सुरक्षा मजबूत रखें। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और APK फाइल डाउनलोड करने से बचें। अगर किसी के साथ साइबर धोखाधड़ी हो जाए तो बिना देर किए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।

Who Is IPS Kiran Yadav: अब बात करते हैं कि कौन हैं IPS किरन यादव?

आईपीएस किरन यादव उत्तर प्रदेश कैडर की 2021 बैच की अधिकारी हैं और वर्तमान में लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट में अपर पुलिस उपायुक्त (ADCP) के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने 19 मार्च 2025 को यह जिम्मेदारी संभाली थी और तब से साइबर अपराध, कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण से जुड़े अभियानों का नेतृत्व कर रही हैं।

who-is-ips-kiran-yadav

उनका जन्म 3 मई 1987 को पंजाब के एसएएस नगर (मोहाली) में हुआ। उन्होंने बी.कॉम (ऑनर्स), इलेक्ट्रॉनिक कॉमर्स (E-Commerce) की पढ़ाई की और कम उम्र में ही चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) बन गईं। महज 21 वर्ष की आयु में उन्होंने सीए की परीक्षा पूरी कर ली थी। प्रशासनिक सेवा में आने से पहले उन्होंने लगभग 8 सालों तक भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) कार्यालय में कार्य किया। वहीं, नौकरी करते हुए उन्होंने सेल्फ स्टडी (Self Study) के दम पर यूपीएससी की तैयारी की और चौथे प्रयास में 2020 की सिविल सेवा परीक्षा पास कर ऑल इंडिया रैंक 392 हासिल की।

IPS Kiran Yadav Family: परिवार में कौन-कौन?

किरन यादव के पिता शत्रुघ्न सिंह यादव एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में प्रोजेक्ट मैनेजर और इंजीनियर रहे हैं, जबकि भाई सूरज यादव कनाडा की एक कंपनी में इंजीनियर हैं। परिवार की जड़ें उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर से जुड़ी हैं, हालांकि उनका पालन-पोषण पंजाब और चंडीगढ़ क्षेत्र में हुआ। लखनऊ में एसीपी के रूप में भी वह पहले सेवाएं दे चुकी हैं।

IPS Kiran Yadav Marriage: दिसंबर में बनीं किरन यादव दुल्हन: कौन है पति?

दिसंबर 2025 में उनकी शादी मनीष यादव से हुई। वह कहती हैं कि परिवार और पुलिस सेवा, दोनों जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाकर काम करना उनके लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता है। चार्टर्ड अकाउंटेंट से आईपीएस अधिकारी बनने तक का उनका सफर और अब साइबर अपराधियों के खिलाफ लगातार की जा रही कार्रवाई उन्हें उत्तर प्रदेश पुलिस की चर्चित अधिकारियों में शामिल कर रही है। वहीं, लखनऊ के अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड कॉल सेंटर पर की गई हालिया कार्रवाई ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में ला दिया है।

Lucknow: Cyber Fraud का पैसा शेल कंपनियों में घुमाने वाले 4 गिरफ्तार, इंटरनेशनल कनेक्शन, गैंग कैसे काम करता था
Lucknow: Cyber Fraud का पैसा शेल कंपनियों में घुमाने वाले 4 गिरफ्तार, इंटरनेशनल कनेक्शन, गैंग कैसे काम करता था
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+