5th Gen Jet: कितना खर्चा आता है 5th जनरेशन फाइटर जेट बनाने में? भारत कब बनाएगा पांचवी पीढ़ी का लड़ाकू विमान?
5th Gen Jet: भारत 5th जनरेशन के स्टील्थ फाइटर जेट वाले देशों के एक ग्रुप में शामिल होने की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्तमान में, केवल अमेरिका, रूस और चीन के पास ही ऐसे 5 जेनरेशन फाइटर जेट हैं। भारत का लड़ाकू विमान बनाने का AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) प्रोजेक्ट चल रहा है, जिसमें दो प्रकार शामिल हैं: मार्क 1 और मार्क 2। ये जेट अपनी अत्याधुनिक स्टील्थ टेक्नोलॉजी (एक किस्म की ऐसी टेक्नोलॉजी जो किसी भी चीज को रडार, इन्फ्रारेड, सोनार और अन्य सेंसर द्वारा पता लगाने से बचाती हैं ) के लिए जाने जाते हैं, जिससे वे दुश्मन के रडार का पता लगाने से बच सकते हैं।

कहां आ रही कमी?
AMCA परियोजना का लक्ष्य आस-पास के खतरों के बीच भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करना है। चीन के जे-20 स्टील्थ जेट भारतीय सीमा के पास तैनात हैं, और पाकिस्तान की योजना 2029 तक चीन से J-35A जेट हासिल करने की है। AMCA भारत को इन चुनौतियों का मुकाबला करने में मदद करेगा और निजी और सरकारी संस्थाओं के बीच सहयोग के माध्यम से डिफेंस टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देगा।
कब तक बनेगा भारत का 5th जनरेशन के जेट?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने AMCA प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है, जिसका लक्ष्य 2028 तक प्रोटोटाइप तैयार करना और उसके बाद 2035 में बड़े पैमाने पर उत्पादन करना है। AMCA प्रोटोटाइप को एयरो इंडिया 2025 में प्रदर्शित किया गया था, जिसने काफी ध्यान आकर्षित किया, क्योंकि इसने भारत को ऐसे उन्नत विमान बनाने में सक्षम कुछ देशों के बीच स्थान दिलाया है। भारतीय वायु सेना वर्तमान में तीस स्क्वाड्रन संचालित करती है, लेकिन उसे 42 की आवश्यकता है; AMCA से सात स्क्वाड्रन (126 जेट) इस कमी को पूरा करेंगे, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा में अच्छी खासी बढ़ोतरी होगी, साथ ही भारत के रक्षा उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा।
कितना खर्चा आता है 5th जनरेशन जेट बनाने में?
हाल ही में रक्षा मंत्रालय ने 27 मई 2025 को AMCA को 5th जनरेशन फाइटर जेट बनाने के लिए 15 हजार करोड़ रुपए जारी किए हैं। लेकिन ये पैसा इसमें होने वाले कुल खर्चे के शुरूआती किश्त के तौर पर जारी किया है। जिसमें 2028 -29 के बीच इसके प्रोटोटाइप को तैयार करने, 2032-33 में इसका प्रोडक्शन शुरू करने और 2034 तक इसे सेना में शामिल करने की डेडलाइन तय की गई है। अमेरिका के 5th जनरेशन फाइटर जेट लॉकहीड मार्टिन एफ-22 रैप्टर की कीमत 143 मिलियन डॉलर (तकरीबन साढ़े 1200 करोड़ भारतीय रुपए ) है। वहीं चीन के चेंगदू J-20 की कीमत 110 मिलियन डॉलर (तकरीबन 1000 करोड़ भारतीय रुपए ) है। इसके अलावा रूस के SU-35 जो कि एक 4.5th जनरेशन फाइटर जेट है उसकी कीमत 85 मिलियन डॉलर (तकरीबन 727 करोड़ भारतीय रुपए ) है।
चीन का 'चेंगदू' (5th Generation Jet)
चीन का चेंगदू J-20 माइटी ड्रैगन उसका पहला पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान है जिसे अमेरिकी AF-22 और एसयू-57 से मुकाबला करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसकी अधिकतम गति 2450 किलोमीटर प्रति घंटा है और यह 66 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकता है। साथ ही जे-20 छह तरह की मिसाइलों को अपने अंदर ले जा सकता है और इसके पंखों पर चार हार्डपॉइंट हैं। इससे अलग रूस का सुखोई SU-57 फ़ेलॉन एक शक्तिशाली स्टेल्थ विमान है जिसे एक ही ऑपरेटर द्वारा संचालित किया जाता है। यह 2135 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार तक पहुंच सकता है और 66 हज़ार फ़ीट की ऊचाई तक उड़ सकता है। SU-57 में अपने बारह हार्डपॉइंट पर कई तरह के हथियार मौजूद हैं।
रूस-चीन की तुलना में अमेरिका कहां?
अमेरिकी लॉकहीड मार्टिन एफ-22 रैप्टर को स्पीड और कंट्रोल के मामले में भले ही आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है, लेकिन ग्यारह देशों में 750 से अधिक यूनिट्स के उत्पादन के साथ यह दुनिया भर में बड़े स्तर इस्तेमाल किया जाता है। यह जेट 3000 किलोमीटर की लड़ाकू रेंज के साथ 2337 किलोमीटर प्रति घंटे की गति तक पहुंचता है। लेकिन कई मायनों में ये चीन और रूस के जेट्स से बेहतर है।
क्या कर सकता है 5th जनरेशन जेट?
5th जनरेशन के फाइटर जेट सुपरक्रूज़ क्षमताओं से लैस हैं, जो उन्हें बिना आफ्टरबर्नर के उच्च गति पर उड़ान भरने में सक्षम बनाता है। वे उन्नत सेंसर और कंप्यूटर सिस्टम से भी लैस हैं जो किसी भी युद्ध क्षेत्र की जानकारी देते हैं। यह अपने हथियारों को छुपाता है, जिससे रडार द्वारा पता लगाए जाने का जोखिम कम रहता है। ये जेट हवाई युद्ध, जमीनी हमले और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध सहित कई भूमिकाएं एक साथ निभा सकते हैं।
5th जनरेशन जेट का इंजन कितना ताकतवर?
AMCA मार्क 1 में 98 किलो न्यूटन के थ्रस्ट के साथ US GE-F414 इंजन लगा होगा। इसमें स्टेल्थ टेक्नोलॉजी, उन्नत सेंसर और एक आंतरिक 'हथियार बे' होगा। इस बीच, अधिक उन्नत मार्क 2 में 110 किलो न्यूटन के थ्रस्ट वाला एक स्वदेशी इंजन होगा जिसे GE या रोल्स-रॉयस जैसी विदेशी कंपनियों के सहयोग से विकसित किया गया है।
भारत के लिए चुनौतियां
5th जनरेशन के जेट को विकसित करने के लिए बेहद बारीक टेक्नोलॉजी की आवश्यकता होती है, जहां भारत इंजन और स्टील्थ सिस्टम के लिए विदेशों पर निर्भर है। तेजस जैसी परियोजनाओं में पिछली देरी और AMCA की सफलता के लिए समय पर इसकी डिलेवरी को भी बताती हैं। क्योंकि चीन 6th जनरेशन जेट की ओर बढ़ चुका है पाकिस्तान की 5th जनरेशन जेट बनाने में मदद कर रहा है।
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