तहरीक-ए-जिहाद संगठन क्या है, जिसने PAK एयरबेस पर किया हमला, क्यों मानता है पाकिस्तान को दुश्मन?
Tehreek-e-Jihad Pakistan: पाकिस्तान के मियांवाली वायुसेना अड्डे पर शनिवार सुबह भारी हथियारों से लैस आतंकवादियों ने हमला कर दिया। पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग के मुताबिक, हमले में पाकिस्तानी एयरफोर्स के ग्राउंड में मौजूद कई विमान नष्ट हो गए। हालांकि, पाकिस्तानी एयरफोर्स के जवानों ने सभी 9 हमलावरों को मार गिराया और दावा किया, कि उन्हें बेस में घुसने से पहले ही मार गिराया गया।
वहीं, पाकिस्तानी एयरबेस पर किए गये इस हमले की जिम्मेदारी तहरीक-ए-जिहाद ने ली है। लिहाजा, सवाल उठ रहे हैं, कि तहरीक-ए-जिहाद क्या है, इसने एयरबेस को निशाना क्यों बनाया और आखिरकार इसकी पाकिस्तान से क्या दुश्मनी है? आइये समझते हैं।

तहरीक-ए-जिहाद संगठन क्या है?
तहरीक-ए-जिहाद, तालिबान से जुड़ा एक संगठन है, जिसे शॉर्ट फॉर्म में टीजेपी कहा जाता है, जो पाकिस्तान में सैन्य बलों को निशाना बनाती है और पाकिस्तान ने इसे आतंकवादी संगठन घोषित कर रखा है। पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग आईएसपीआर के बयान के मुताबिक, हालिया हमला पिछले हफ्ते पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र में सुरक्षा बलों पर दो अलग-अलग हमलों के बाद हुआ है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, तहरीक-ए-जिहाद के आतंकवादी कथित तौर पर पंजाब प्रांत में स्थित उच्च सुरक्षा वाले हवाई अड्डे में प्रवेश करने के लिए सीढ़ियों का उपयोग करके बाड़ वाली दीवारों पर चढ़ गए और फिर हमले को अंजाम दिया।
जिहाद और आतंकवाद के खतरे पर नजर रखने वाली संस्था Memri.org के मुताबिक, तहरीक-ए-जिहाद पाकिस्तान में अपेक्षाकृत एक नया आतंकवादी समूह है, जिसका गठन इस साल 24 फरवरी को किया गया है। माना जाता है, कि यह समूह मुख्य रूप से बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों में सक्रिय है।
इसकी स्थापना पाकिस्तान के खिलाफ जिहाद छेड़ने के इरादे से की गई है, ताकि पाकिस्तान को एक पूर्ण इस्लामिक राज्य में बदला जा सके और अफगानिस्तान में तालिबान ने जिस तरह का शरिया कानून लागू किया है, वो पाकिस्तान में उसी तरह का शरिया कानून लागू कर सके।
टीजेपी की जिहादी विचारधारा की वजह से विश्लेषकों का मानना है, कि जिस मूल संगठन से टीजेपी अलग हुई है, वह तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान है। बहरहाल, यूरेशियन टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है, कि बलूचिस्तान के आतंकवादियों ने टीटीपी के साथ एकजुट होने से परहेज किया है, क्योंकि इससे उनका बलूचिस्तान को पाकिस्तान से आजाद करवाने का मकसद कमजोर होता है।
टीजेपी के प्रवक्ता मुल्ला मुहम्मद कासिम ने फरवरी में सोशल मीडिया पर घोषणा की थी, कि मौलाना अब्दुल्ला यागिस्तानी इस समूह के लीडर हैं।
एक ग्लोबल स्टडी और रिसर्च वेबसाइट, द जेम्सटाउन फाउंडेशन के मुताबिक, ऐसा माना जाता है, कि यागिस्तानी ने कराची के प्रसिद्ध देवबंदी मदरसा जामिया फारूकिया में पढ़ाई की है।
इसमें खुरासान डायरी का भी हवाला दिया गया है, जिसमें दावा किया गया है, कि 2021 में अमेरिका की अफगानिस्तान से वापसी तक, वह अफगानिस्तान में नाटो और अमेरिकी बलों के साथ लड़ रहा था।
तहरीक-ए-जिहाद का मकसद क्या है?
24 फरवरी को जारी एक बयान में, तहरीक-ए-जिहाद ने अपनी विचारधारा के लिए प्रेरणा के रूप में "शेख-उल-हिंद" का उल्लेख करते हुए अपने मकसद को रेखांकित किया।
इस्लामिक वेबसाइट मेमरी के मुताबिक, यह भारतीय इस्लामी स्कॉलर महमूद हसन देवबंदी के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एक उपाधि है, जिसे जिहादी आंदोलन शुरू करने के बाद ब्रिटिश औपनिवेशिक शासकों ने माल्टा में जेल में डाल दिया था। इस संगठन का मानना है, कि पाकिस्तान के विभाजन के बाद शेख-उल-हिंद का मकसद नष्ट हो गया।
मेमरी के अनुसार, इसने घोषणा की है, कि "हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं, कि सशस्त्र जिहाद के अलावा, पाकिस्तान में इस्लामी व्यवस्था लागू करना संभव नहीं है। इस मकसद तक पहुंचने के लिए, फिलहाल सैकड़ों मुजाहिदीन और इस्लाम के दर्जनों फिदायीन (शहादत चाहने वाले) धन और शरीर के साथ बलिदान देने के लिए हमेशा तैयार हैं... हमारा लक्ष्य पाकिस्तान पर थोपी गई सुरक्षा संस्थाएं हैं, जो हमारे विरोधी हैं, जो शरिया विरोधी व्यवस्था है।"
जेम्स फाउंडेशन के अनुसार, इस संगठन के प्रवक्ता ने कहा, कि "अफगानिस्तान में सफलता हासिल करने के बाद, हमने अपना संघर्ष पाकिस्तान में बढ़ाया है" और समूह का संघर्ष "रेशम पत्र आंदोलन की निरंतरता" के लिए है, जो ब्रिटिश शासन से आजादी के लिए एक देवबंदी आंदोलन है।
पाकिस्तानी सेना को खत्म करना है मकसद
हिंदू पोस्ट के मुताबिक, अपनी स्थापना के बाद, टीजेपी ने पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा के करीब बलूचिस्तान के एक सीमावर्ती शहर चमन में दो पाकिस्तानी सुरक्षा कर्मियों को मारने का दावा किया है।
पाकिस्तान स्थित डॉन ने 6 मार्च को रिपोर्ट दी थी, कि बलूचिस्तान की प्रांतीय राजधानी क्वेटा में एक आत्मघाती हमलावर ने अपनी मोटरसाइकिल को एक सुरक्षा वैन से टकरा दिया था, जिसमें नौ अर्धसैनिक सुरक्षा कर्मियों की मौत हो गई और 13 अन्य घायल हो गए।
मेमरी के अनुसार, 25 अप्रैल को खैबर पख्तूनख्वा के स्वात में कबल पुलिस स्टेशन के अंदर हुए आत्मघाती हमले में पुलिस अधिकारियों सहित कम से कम एक दर्जन लोग मारे गए और 57 अन्य घायल हो गए थे।
एक्सप्रेस ट्रिब्यून के हवाले से द जेम्स फाउंडेशन ने लिखा है, कि इसके दो दिन बाद, यानि इसी साल 27 अप्रैल को खैबर पख्तूनख्वा के लक्की मारवात जिले में एक मोटरसाइकिल सवार आत्मघाती हमलावर ने सुरक्षा बलों की चौकी के पास बम विस्फोट किया, जिसमें तीन सैनिक मारे गए थे।
वहीं, 12 मई को, आतंकवादियों ने बलूचिस्तान के मुस्लिम बाग इलाके में फ्रंटियर कोर, एक सरकार-गठबंधन अर्धसैनिक बल, शिविर पर हमला किया, जिसमें कम से कम 12 सुरक्षाकर्मी मारे गए।
12 जुलाई को बलूचिस्तान के उत्तरी भाग में झोब गैरीसन में भी इसने पाकिस्तानी सेना पर हमला किया था, जिसमें 9 सैनिक मारे गये थे, लेकिन जवाबी कार्रवाई में इस संगठन के भी 5 आतंकवादियों की मौत हो गई थी।
वहीं, रॉयटर्स के मुताबिक, 30 जुलाई को एक राजनीतिक रैली में इस संगठन ने आत्मघाती बम विस्फोट किया था, जिसमें कम से कम 45 लोग मारे गए थे।
इस बीच, अक्टूबर में, पाकिस्तान सेंटर फॉर रिसर्च एंड सिक्योरिटी स्टडीज (सीआरएसएस) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, कि इस साल पाकिस्तानी सेना के 386 जवानों की हत्या में ये संगठन जिम्मेदार है।












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