जो बाइडेन की जीत के बाद क्या सोच रहे हैं अमेरिका के हिंदू संगठन
नई दिल्ली- अमेरिका में मौजूद कई हिंदू राष्ट्रवादी संगठन जो बाइडेन और कमला हैरिस की जीत का खुलकर स्वागत कर रहे हैं। इनमें कई संगठन संघ परिवार से भी जुड़े हुए हैं। लेकिन, डेमोक्रैट उम्मीदवारों की जीत का समर्थन करने वाले कई अमेरिकी हिंदू संगठनों के नजरिए में अंतर साफ नजर आ रहा है। मसलन, कुछ राष्ट्रवादी हिंदू संगठनों का जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल-370 हटाने और नागरिकता संशोधन कानून को लेकर नजरिया पूरी तरह से स्पष्ट है और वो इसका किसी भी तरह से विरोध बर्दाश्त करने के लिए तैयार नहीं हैं। जबकि, वहीं पर हिंदूज फॉर ह्यूमैन राइट्स और हिंदूज रेसिस्टिंग इंजस्टिस जैसे संगठन भी हैं और वो बाइडेन-हैरिस की जीत को 'धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक मूल्यों की जीत' बताकर अपना अलग इरादा जाहिर कर रहे हैं।

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मतलब साफ है कि अमेरिका में भारत से जुड़े मामलों को लेकर काम कर रहे भारतीय संगठन बाइडेन-हैरिस की जीत का स्वागत तो कर रहे हैं, लेकिन उनकी प्रतिक्रिया पूरी तरह से विभाजित लग रही है। इसलिए, आने वाले वक्त में यह देखना दिलचस्प होगा कि जो बाइडेन भारत के आंतरिक मामलों में दखल देकर क्या भारत के साथ संबंध बिगाड़ने का जोखिम लेना चाहते हैं या विदेश नीति में पहले से ही मजबूत दोनों देशों के रिश्तों को और नई बुलंदियों की दिशा में ले जाने के लिए काम करते हैं।
वैसे जो बाइडेन की जीत पर प्रतिक्रिया देते हुए हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने अपने बयान में उम्मीद जाहिर की है जम्मू-कश्मीर और सीएए जैसे मसलों पर अमेरिका का भारत सरकार को समर्थन जारी रहेगा। अमेरिका में हिंदू हितों के लिए काम करने वाले कई संगठनों को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के विदेशी संगठन का समर्थन हासिल है। मसलन, मौजूदा चुनाव में भी हिंदू स्वयं सेवक संघ ने अपने कई संगठनों के माध्यम से हिंदू उम्मीदवारों के लिए समर्थन जुटाने का भी काम किया है।
जबकि, दूसरी ओर कई अमेरिकी-भारतीय संगठन हैं, जैसे कि हिंदू फॉर ह्यूमैन राइट्स जो सीएए-विरोधी प्रदर्शनों का समर्थन कर चुके हैं और अमेरिका में भी जातीय भेदभाव के खिलाफ आवाज उठा चुके हैं। यह हिंदू और हिंदुत्व को अलग-अलग करने पर जोर देते हैं और जो बाइडेन की जीत के बाद उन्होंने कहा है, 'यह ह्यूमैन इमिग्रेशन और इकोनॉमिक पॉलिसी के लिए नए युग की शुरुआत है, जो हमारे देश के गरीबों को फायदा पहुंचाएगी।' राजनीतिक जानकारों का भी मानना है कि अमेरिका के हिंदू संगठनों की राजनीति अलग-अलग नीतियों पर टिकी हुई है। कुछ संगठन हमेशा से रिपब्लिकन और डेमोक्रैट्स दोनों का समर्थन करते आए हैं। जबकि, दूसरे अमेरिकन्स फॉर हिंदूज सिर्फ रिपब्लिकन का समर्थन करते हैं।
अमेरिका में रहने वाले अमेरिकी-भारतीय ही नहीं, भारत के आम लोगों ने भी में जो बाइडेन की जीत का आमतौर पर दिल खोलकर स्वागत किया गया है। इसका उदाहरण ट्विटर पर अमेरिकी चुनाव परिणाम पर आई प्रतिक्रियाओं की बाढ़ से देखा जा सकता है। भारतीय ट्विटर यूजर्स ने बाइडेन के अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति चुने जाने पर अपनी खुशी के साथ-साथ राहत का खुलकर इजहार किया है। इन खुशियों में कमला हैरिस का उपराष्ट्रपति चुनाव जीत जाने का भी एक बड़ा प्रभाव रहा है, क्योंकि उनकी मां भारतीय थीं, जो अमेरिका में बस गई थीं। यही नहीं अब तो यह भी बात सामने आ चुकी है कि खुद जो बाइडेन का भी भारत के साथ ऐतिहासिक नाता है और उनके पूर्वज मुंबई में हाल तक रहते थे। हालांकि, वो अब कहां है, इसके बारे में कोई ताजा जानकारी नहीं है।












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