राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप पर भारी पड़ने लगे हैं विवेक रामास्वामी.. हिन्दुत्व राजनीति बनाएगा US का बॉस?
Vivek Ramaswamy: विवेक रामास्वामी कहते हैं, कि जलवायु परिवर्तन की दिशा में काम करना एक धार्मिक फैसला है और हिन्दू धर्म में यही सिखाया गया है।
विवेक रामास्वामी के उत्तेजक बयानों ने अमेरिका की राजनीति को गर्म कर दिया है और डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ अब उन्हें अमेरिकन मीडिया एक मजबूत विकल्प के तौर पर पेश कर रही है। अमेरिकी मीडिया का कहना है, कि विवेक रामास्वामी, 'दक्षिण पंथी राजनीति के बराक ओबामा हैं।'

विवेक रामास्वामी ने अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के लिए अपनी दावेदारी पेश कर रखी है और जिस आक्रामक अंदाज में वो अपना चुनावी कैम्पेन चला रहे हैं, वो उनकी दावेदारी को काफी मजबूत कर रहा है। एक तरह जहां रिपब्लिकन पार्टी के बाकी उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप की आलोचना के सहारे अपना कैम्पेन चला रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विवेक रामास्वामी, डोनाल्ड ट्रंप की तारीफ कर रहे हैं और कहते हैं, कि 'अमेरिका फर्स्ट डोनाल्ड ट्रंप की नीति थी और वो उस पॉलिसी को आगे ले जाना चाहते हैं।'
वहीं, कई अमेरिकी एक्सपर्ट का मानना है, कि अगर विवेक रामास्वामी को राष्ट्रपति पद के लिए टिकट नहीं मिलता है, तो उप-राष्ट्रपति पद का टिकट उन्हें ही मिलेगा।
भारत से अमेरिका में बसा परिवार
सनडे गार्जियन की एक रिपोर्ट में कहा गया है, कि "विवेक रामास्वामी यकीनन पहले हिंदू अमेरिकी राजनेता हैं, जो कड़ी मेहनत, योग्यता, परिवार, कानून और व्यवस्था जैसे सामान्य मूल्यों की अपील करते हुए रिपब्लिकन पार्टी से जुड़ रहे हैं।'

सनडे गार्जियन ने लिखा है, कि "11 सितंबर 1893 को भारत से एक हिम्दू शिक्षित ब्राह्मण हिंदू शिकागो पहुंचे थे, जिनकी अंग्रेजी काफी अच्छी थी। वह तेजस्वी और बुद्धिमान व्यक्ति एक हिन्दू भिझु विवेकानंद थे, जिन्होंने हिंदू दर्शन से परे चीजों पर अपनी कला और ज्ञान की गहराई से अमेरिका (और दुनिया) को मंत्रमुग्ध कर दिया था। उस घटना के 130 साल बाद, एक और विवेक हैं, जो अपनी कला और आभा से अमेरिकन राजनीति में अपने "क्रांतिकारी" विचारों से, अमेरिकी समाज को राष्ट्रवाद, परिवार, आस्था और योग्यता के आधार पर पुनर्गठित करके अमेरिका को मंत्रमुग्ध कर रहे हैं।
ये बात रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रपति पद के दावेदार विवेक रामास्वामी को लेकर कही गई है।
अमेरिकी राजनीतिक पटल पर उभरने से पहले, भारतीय अप्रवासी माता-पिता के बेटे रामास्वामी ने बायोटेक इंडस्ट्री में अपना नाम और पैसा कमाया। ओहियो के सिनसिनाटी में जन्मे 37 साल के मल्टी-बिलेनियर बायोटेक कारोबारी विवेक रामास्वामी ने अपने राष्ट्रपति अभियान में लाखों रुपये खर्च किए हैं और उन्होंने ऐलान किया है, कि वो लॉबिस्ट और इंटरेस्ट ग्रुप के साथ सहयोग नहीं करेंगे।
हार्वर्ड कॉलेज से ग्रेजुएट विवेक रामास्वामी के पास येल लॉ स्कूल से कानून की डिग्री भी है।
रामास्वामी उन दो प्रमुख भारतीय अमेरिकियों में से एक हैं, जो वर्तमान में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता जो बाइडेन को व्हाइट हाउस से बाहर करने के लिए चुनावी रेस में हैं।
दक्षिण कैरोलिना की पूर्व गवर्नर और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के शासनकाल में संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत निक्की हेली भी रिपब्लिकन पार्टी की तरफ से दावेदारी जता चुकी हैं, जो भारतीय मूल की हैं और ईसाई बनने से पहले, वो हिन्दू थीं।
जबकि, रामास्वामी अमेरिका के शीर्ष पद के लिए चुनाव लड़ने वाले सिर्फ दूसरे हिंदू हैं, जबकि रिपब्लिकन पार्टी के पहले हिन्दू उम्मीदवार हैं। विवेक रामास्वामी से पहले डेमोक्रेटिक पार्टी से तुलसी गबार्ड ने 2020 में अपना राष्ट्रपति अभियान चलाया था।
टेक्सास स्थित कारोबारी राम प्रसाद ने कहा, कि "विवेक रामास्वामी यकीनन पहले हिंदू अमेरिकी राजनेता हैं, जो कड़ी मेहनत, योग्यता, परिवार, कानून और व्यवस्था आदि जैसे सामान्य मूल्यों की अपील करते हुए रिपब्लिकन पार से जुड़ रहे हैं।"
आपको बता दें, कि रिपब्लिकन एक रूढ़िवादी पार्टी मानी जाती है, जहां ईसाई धर्म को ज्यादा तवज्जो दिया जाता है।

कैसा है विवेक रामास्वामी का कैम्पेन?
विवेक रामास्वामी का कैम्पेन 10 प्वाइंट्स पर आधारित है, जिन्हें वो 'सत्य' कहते हैं।
1- ईश्वर साकार हैं
2- दुनिया में दो ही लिंग हैं
3- मानव के उत्कर्ष के लिए जीवाश्म ईंधन की आवश्यकता होती है।
4- उल्टा नस्लवाद ही नस्लवाद है
5- ओपन बॉर्डर कोई बॉर्डर नहीं होता है
6- माता-पिता अपने बच्चों की शिक्षा का निर्धारण करते हैं
7- एकल परिवार मानव जाति के लिए ज्ञात शासन का सबसे महान रूप है।
8- पूंजीवाद लोगों को गरीबी से ऊपर उठाता है
9- अमेरिकी सरकार की तीन शाखाएँ हैं, चार नहीं।
10- अमेरिकी संविधान इतिहास में स्वतंत्रता का सबसे मजबूत गारंटर है
विवेक रामास्वामी और उनका परिवार आस्था, कड़ी मेहनत और राष्ट्रवाद के पारंपरिक मूल्यों पर वामपंथी विचारधारा को एक हमले की की तरह मानते हैं।
हिन्दू होने पर क्या कहते हैं विवेक रामास्वामी?
विवेक रामास्वामी अपने चुनावी कैम्पेन में खुलेआम अपने धर्म की बात कर रहे हैं और हिन्दू होने पर गर्व जता रहे हैं। विवेक रामास्वामी बार-बार कह रहे हैं, कि वह एक "आस्थावान व्यक्ति" और "धार्मिक स्वतंत्रता के प्रबल रक्षक" हैं।
वह हिंदू धर्म की सूक्ष्म और ज्यादा गहन व्याख्या में जाने के बजाय, वह अपने हिंदू विश्वास की प्रासंगिकता को व्यापक सार्वजनिक हित से जोड़ने में कामयाब हो रहे हैं और लोगों को यह बताने में कामयाब हो रहे हैं, कि हिन्दू दर्शन उन्हें देश चलाने में कैसे मदद करेगा।
इसके अलावा, वो अमेरिकी समाज को यह मैसेज देने में भी कामयाब हो रहे हैं, कि हिन्दू धर्म अत्यधिक उदारवाद की शिक्षा देता है, जिसमें हर धर्म का सम्मान है और जिसे कट्टरपंथ आज तक छू भी नहीं पाई है।
हालांकि, यहूदी-ईसाई मूल्यों को खुले तौर पर अपनाने के बावजूद, रामास्वामी को कुछ ईसाई समूहों से विरोध मिल रहा है। उनके उपदेश के दौरान नेब्रास्का के एक शक्तिशाली पादरी, हैंक कुन्नमैन ने उन पर हमला किया है। उन्होंने कहा है, "क्या आप किसी आदमी से बाइबल के अलावा किसी और चीज़ पर हाथ लगवाने जा रहे हैं?" उनका मतलब शपथ ग्रहण को लेकर था।

कुन्नमैन के हमले को खारिज करते हुए रामास्वामी ने कहा, कि वह अमेरिका के "कमांडर-इन-चीफ" बनने की दौड़ में हैं, न कि "पादरी-इन-चीफ" बनने के लिए।
हालांकि, अमेरिकी राजनीति में ऐसे हिंदू-विरोधी हमले असामान्य नहीं हैं। डेमोक्रेट तुलसी गबार्ड पर उनकी हिंदू आस्था और भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के साथ "संबंध" के लिए क्रूर हमला किया गया था। ये हमले मुख्य रूप से वामपंथियों के भीतर से किए गये थे, जिनमें सदन में उनके कुछ हिंदू डेमोक्रेट सहयोगी भी शामिल थे। उनके आलोचकों ने उन्हें एक पंथ अनुयायी का नाम दिया और हिलेरी क्लिंटन ने उन्हें रूस की प्रॉपर्टी घोषित किया था।
लेकिन, विवेक रामास्वानी वामपंथियों के हमले से वाकिफ हैं और वामपंथियों के खिलाफ अत्यधिक आक्रामक तरीके से निपट रहे हैं। हालांकि, कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है, कि वामपंथी उनके खिलाफ अभी अलग अलग तरह की चाल चलेंगे, क्योंकि वामपंथी इसके लिए कुख्यात हैं और विवेक रामास्वामी को उनके हमले से बचने के लिए हर वक्त चौकन्ना रहना होगा।
हालांकि, राम प्रसाद ने कहा, कि "अपनी तरफ से, विवेक ने बड़ी चतुराई से अपनी आस्था से जुड़ी चिंताओं को दूर कर लिया है।" उन्होंने कहा, कि "वह जीओपी और हिंदू अमेरिकियों के लिए पुल बनाने की पहली वास्तविक उम्मीद हैं।" लिहाजा, अब अमेरिका में सवाल उठ रहे हैं, कि क्या अमेरिका पहले हिन्दू राष्ट्रपति को स्वीकार करने के लिए तैयार है?












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