विजया गाड्डे ने ट्रंप से लिया था पंगा! मस्क ने निकाला, अब Twitter से 610 करोड़ रुपये लेकर होंगी विदा

ट्विटर का कमान संभालने के साथ ही एलन मस्क ने पराग अग्रवाल और विजया गाड्डे को बर्खास्त कर दिया। गाड्डे ट्विटर में पॉलिसी, लीगल और सेफ्टी इशूज जैसे अहम डिपार्टमेंट देख रही थीं।

ट्विटर (Twitter) को दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क (Elon Musk) ने आखिरकार (Twitter Deal) खरीद ही लिया। मस्क ट्विटर विवादों को लेकर सुर्खियों में छाए हुए थे। सात महीनों से चल रही 44 अरब डॉलर की डील गुरुवार को पूरी हो गई। ट्विटर (Twitter) के मुखिया बनते ही एलन मस्क ने सबसे पहले कंपनी के सीईओ पराग अग्रवाल, पॉलिसी हेड और लीगल मामलों की टॉप अधिकारी विजया गाड्डे, सीएफओ नेड सेगल और जनरल काउंसल सीन एजेट को नौकरी से निकाल दिया।

कौन हैं विजया गाड्डे

कौन हैं विजया गाड्डे

पराग अग्रवाल, विजया गाड्डे समेत ट्विटर के चार टॉप अधिकारियों को हटाने के बाद मस्क ने ट्वीट किया, 'पंछी' आजाद हुआ..अच्छे दिन आने दें। खबरों के मुताबिक टेस्ला, ट्विटर के मालिक एलन मस्क ने चारों अधिकारियों पर ट्विटर में फर्जी खातों को लेकर निवेशकों को गुमराह करने का आरोप लगाया। वहीं ट्विटर में पराग अग्रवाल अधिक दिनों तक सीईओ के पद पर नहीं रहे। हालांकि, विजया गाड्डे को कंपनी में सबसे ताकतवर अधिकारियों में से एक माना जाता था। एलन मस्क ने ट्विटर खरीदते ही सबसे पहले इन्हीं लोगों को बाहर का रास्ता दिखा दिया। चलिए जानते हैं कि कौन हैं विजया गाड्डे, जिन्हें एलन मस्क द्वारा ट्विटर से निकाले जाने के बाद 610 करोड़ रुपये मिले?

विजया को 610 करोड़ रुपये मिलेंगे

विजया को 610 करोड़ रुपये मिलेंगे

ट्विटर का कमान संभालने के साथ ही एलन मस्क ने पराग अग्रवाल और विजया गाड्डे को बर्खास्त कर दिया। गाड्डे ट्विटर में पॉलिसी, लीगल और सेफ्टी इशूज जैसे अहम डिपार्टमेंट देख रही थीं। वह कंपनी की लीगल डायरेक्टर भी थीं। 2014 में उन्हें फार्च्यून की तरफ से ट्विटर की सबसे ताकतवर महिला एक्जीक्यूटिव बताया था। वह हमेशा मीडिया की सुर्खियों में रहती थीं। विजया गाड्डे को Twitter से निकालना कंपनी को खासा महंगा पड़ेगा। द फ्री प्रेस जर्नल के अनुसार विजया गाड्डे करीब 610 करोड़ की रकम के साथ कंपनी छोड़ेंगी। इसमें उनके स्‍टॉक होल्डिंग्‍स, सैलरी और स्टॉक्‍स शामिल हैं। नेड सेगल को 544 करोड़ और पराग अग्रवाल को 536 करोड़ रुपये कंपनी से मिलेंगे। वहीं, कई दक्षिणपंथी इस बात से खुश हैं कि चलो अच्छा हुआ गाड्डे को नौकरी से निकाल दिया गया।

सबसे ताकतवर कर्मचारी

सबसे ताकतवर कर्मचारी

विजया कंपनी की सबसे ताकतवर कर्मचारी थीं। वह कई मौकों पर ट्विटर से जुड़े विवादों के केंद्र में रहीं। 2020 में अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान सभी तरह के राजनीतिक विज्ञापन हटाने का फैसला विजया का ही था। इतना ही नहीं पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ट्विटर अकाउंट बंद करने का फैसला भी विजया गाड्डे ने लिया था। लोगों ने तब माना था कि डार्सी मात्र कंपनी के पब्लिक फेस हैं लेकिन सारे महत्वपूर्ण निर्णय विजया लेती हैं।

इस तस्वीर पर मच गया था बवाल

इस तस्वीर पर मच गया था बवाल

खबर के मुताबिक विजया गाड्डे की परवरिश टेक्सस में हुई। कार्नेल विश्वविद्यालय से स्नातक करने के बाद वह न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ लॉ से वकालत की पढ़ाई पूरी की। विजया 2018 में भारत आई थीं। इस दौरान विजया और ट्विटर फाउंडर जैक डॉर्सी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मिले थे।

इस तस्वीर पर मच गया था बवाल

इस तस्वीर पर मच गया था बवाल

बता दें कि, नवंबर में जैक डॉर्सी और विजया गाड्डे भारत आए थे तो यहां उन्होंने महिला पत्रकारों, कार्यकर्ताओं से मुलाकात की थीं। इस मीटिंग के दौरान जैक के हाथों में एक प्‍लेकार्ड था जिसपर लिखा था 'Smash Brahminical patriarchy'। तस्‍वीर पर खूब बवाल मचा कि ट्विटर के स्‍टाफ को राजनीतिक संदेश देने की क्‍या जरूरत है। ट्विटर इंडिया ने बयान में कहा कि डॉर्सी को यह प्‍लेकार्ड किसी दलित एक्टिविस्‍ट ने पकड़ाया था। हालांकि कुछ देर बाद, विजया गाड्डे ने माफी मांग ली। उन्‍होंने एक ट्वीट में तब कहा था, 'मैं इसके लिए बेहद दुखी हूं। यह हमारे विचारों का नहीं दर्शाता।

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