अमेरिका हटा सकता है ईरान और वेनेजुएला से तेल प्रतिबंध, बाइडेन के फैसले से भारत को होगा बड़ा फायदा
रूस अमेरिका और सऊदी अरब के बाद कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक है, और सऊदी अरब के बाद दूसरा सबसे बड़ा तेल निर्यातक देश है।
वॉशिंगटन/तेहरान, मार्च 12: यूक्रेन पर आक्रमण के बाद रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों की वजह से वैश्विक तेल बाजार में तेल की कीमतों में भारी इजाफा हो चुका है और अमेरिका पर इसका विपरीत असर पड़ रहा है। लिहाजा अमेरिका अब ईरान और वेनेजुएला से तेल आयात करने पर लगाए गये प्रतिबंध को हटाने का फैसला कर सकता है। अगर अमेरिका ईरान से तेल आयात करने पर प्रतिबंधों को कम करता है, तो इससे क्या फर्क पड़ेगा और भारत के लिए ये एक 'अच्छी खबर' कैसे साबित हो सकती है, आइये जानते हैं।

वैश्विक कच्चे तेल बाजार में रूस कितना महत्वपूर्ण?
रूस अमेरिका और सऊदी अरब के बाद कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक है, और सऊदी अरब के बाद दूसरा सबसे बड़ा तेल निर्यातक देश है। रूस वर्तमान में प्रति दिन लगभग 7.5 मिलियन बैरल कच्चे तेल का निर्यात करता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक तेल बाजार से रूस को 'हटाने' का कोई दूसरा उपाय नहीं है और अगर मॉस्को को प्रतिबंधों के माध्यम से 'तेल आपूर्ति' देशों की श्रेणी से हटा दिया जाता है, तो फिर तेल की कीमत अपने उच्चतम स्तर तक पहुंच सकती है।

यूरोप ने क्या संकेत दिए हैं?
हालांकि, जर्मनी ने संकेत दिया है कि, यूरोपीय देश, रूसी कच्चे तेल पर व्यापक प्रतिबंध लगाने पर विचार नहीं कर रहा है। ब्रेंट क्रूड फिलहाल 111.3 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है, जो साल की शुरुआत से 43 फीसदी ज्यादा है। जबकि अमेरिका ने रूसी तेल और गैस आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है और ब्रिटेन ने घोषणा की है, कि वह 2022 के अंत तक रूस से तेल आपूर्ति को बंद कर देगा, वहीं, इस वक्त किस भी दूसरे देश ने रूस से तेल खरीदने पर कोई पाबंदी नहीं लगाई है।

रूस को कैसे करेंगे पेमेंट?
रूस से कच्चा तेल खरीदने पर सिर्फ अमेरिका ने ही प्रतिबंध क्यों ना लगाए हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है, कि जब इंटरनेशनल पेमेंट सिस्टम 'स्विफ्ट' से रूस को बाहर कर दिया गया है, तो फिर रूस को पेमेंट कैसे किया जाएगा। खरीदार रूसी कच्चे तेल की खरीद से होने वाले भारी नुकसान को लेकर भी काफी चिंतित है और यूक्रेन में रूस इन पैसों का इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध में कर रहा है, इससे भी कई खरीददार देश परेशान हैं। तेल प्रमुख शेल ने मंगलवार को रूसी कच्चे तेल की खरीद के लिए माफी मांगी और फौरन रूस से कच्चे तेल की खरीब पर पाबंदी लगा दी है।

ईरान और वेनेजुएला पर नजर
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका वर्तमान में 2015 के ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते को पुनर्जीवित करने की कोशिश कर रहा है, जिसके तहत तेहरान ने तेल निर्यात को प्रतिबंधित करने वाले आर्थिक प्रतिबंधों में छूट के बदले अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने पर सहमति व्यक्त की थी। ईरान पर प्रतिबंध डोनाल्ट ट्रंप के कार्यकाल में लगा था और माना जा रहा है कि, अमेरिका अब ईरान से प्रतिबंधों को हटाने पर विचार कर रहा है। हालांकि, बातचीत रूकी हुई है, क्योंकि रूस ने कथित तौर पर इस बात की गारंटी मांगी है, कि उसके खिलाफ जो प्रतिबंध पश्चिमी देशों ने लगाए हैं, उन प्रतिबंधों का असर रूस-ईरान व्यापारिक संबंधों को प्रभावित नहीं करेगा। अमेरिका और रूस के अलावा ब्रिटेन, चीन, फ्रांस और जर्मनी भी न्यूक्लियर डील बहाल करने के पक्षकार हैं, लिहाजा रूस ने अपनी चिंता जताई है।

तेल प्रोडक्शन बढ़ा सकता है ईरान
तेल विशेषज्ञों का कहना है कि, ईरान संभावित रूप से कुछ महीनों में अपने कच्चे तेल का प्रोडक्शन लगभग 1.5 मिलियन बैरल प्रति दिन से बढ़ाकर 4 मिलियन बैरल प्रति दिन कर सकता है। भारत ने 2019 के मध्य में तेहरान से तेल आयात बंद कर दिया था और सार्वजनिक रूप से कहा था कि, वह ईरान और वेनेजुएला पर प्रतिबंधों में ढील का समर्थन करेगा, क्योंकि वह तेल की खरीद के लिए अधिक विकल्प रखना चाहता है। भारत फिलहाल अपनी जरूरत का करीब 85 फीसदी कच्चे तेल का आयात करता है और अमेरिकी प्रतिबंध से पहले भारत ईरान से अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा ईरान से खरीदता था। वहीं, 2019 में लगाए गए प्रतिबंधों को कम करने के लिए अमेरिका वेनेजुएला के साथ भी बातचीत कर रहा है। वेनेजुएला ने संकेत दिया है कि, अगर प्रतिबंध हटा दिए जाते हैं तो वह भी कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ा सकता है।

भारत भी कर रहा अमेरिका से बात
इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय राजनयिक अमेरिकी अधिकारियों के साथ लगातार बातचीत कर रहे हैं, ताकि भारतीय तेल कंपनी ओएनजीसी विदेश लिमिटेट (ओवीएल) को वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी पीडीवीएसए को अपना कर्ज चुकाने की इजाजत मिल सके। ओवीएल के एक प्रवक्ता ने कहा कि, यह मुद्दा यूएस ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (ओएफएसी) के पास लंबित है। हालांकि, भारतीय अधिकारियों का कहना है कि, कब तक इजाजत मिलेगी, इसकी कोई भविष्यवाणी नहीं की जा सकती है। वहीं, विशेषज्ञों ने कहा कि, अन्य स्रोतों से कच्चे तेल की आपूर्ति को बढ़ावा देने के लिए अमेरिका के प्रयासों ने बाजारों के लिए एक सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने का संकेत दिया है कि, वाशिंगटन अन्य देशों के सर्वोत्तम हित के लिए काम करेगा।

ईरान से कितना तेल खरीदता है भारत?
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा ईरान से खरीदता था। भारत ईरान से कच्चा तेल आयात करने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश था। लेकिन, अमेरिकी प्रतिबंध के बाद भारत ने ईरान से कच्चा तेल खरीदना रोक दिया था। वहीं, अमेरिकी धमकियों के बाद वेनेजुएला से कच्चा तेल की आयात करने में भी भारत ने आधा से ज्यादा कटौती कर दी थी। 2019 में भारत ने जहां वेनेजुएला से 15.9 मिलियन कच्चा तेल आयात करता था, लेकिन 2020 में वेनेजुएला से भारत ने सिर्फ 7.65 मिलयन टन ही तेल खरीदा। अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते भारत ने ईरान से तेल खरीदना बंद कर दिया है। आंकड़ों के मुताबिक, ईरान ने 2018-19 में भारत को 2.36 करोड़ टन कच्चे तेल की आपूर्ति भारत को की। वहीं, 2017-18 में भारत ने ईरान से 2.25 करोड़ टन कच्चा तेल खरीदा था। वहीं भारत ने UAE से 2018-19 में 1.74 करोड़ टन तेल की आपूर्ति की थी।












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