Corona Jihad पर बोला अमेरिका, कहा अल्पसंख्यकों को दोषी ठहराना दुर्भाग्यपूर्ण
वॉशिंगटन। भारत में कोरोना वायरस की जंग के दौरान पिछले कुछ दिनों में सबसे बड़े कम्युनिटी ट्रांसमिशन को देखा गया। दिल्ली के निजामुद्दीन में तबलीगी जमात के मरकज की वजह से एकदम से कोविड-19 के केसेज में इजाफा हुआ। एक प्रभावशाली इस्लामिक मिशनरी मूवमेंट के इस कार्यक्रम के बाद लोगों में मुसलमान समुदाय को लेकर खासी नाराजगी है। लोग सोशल मीडिया पर #CoronaJihad इस हैशटैग के साथ अपनी नाराजगी जता रहे हैं। अब अमेरिका ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।

महामारी को किसी समुदाय से न जोड़ने की अपील
निजामुद्दीन मरकज घटनाक्रम के सामने आने के बाद तेजी से संक्रमण के केसेज में इजाफा हुआ है। कई लोगों ने अब हैशटैग के साथ जेहाद जोड़कर इस समुदाय पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। जेहाद शब्द के प्रयोग से लोग कहीं न कहीं यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि कहीं न कहीं कोरोना वायरस को फैलाने में मुसलमान समुदाय का हाथ है। गुरुवार को अमेरिका ने कहा है कि कोरोना जेहाद शब्द का प्रयोग दुर्भाग्यपूर्ण है। अमेरिका की इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम के राजदूत सैम्युल डी ब्राउनबैक ने एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि अमेरिकी प्रशायन ऐसे कई घटनाक्रमों पर नजर बनाए हुए है जहां पर अल्पसंख्यक समुदायों को कोविड-19 वायरस के लिए जिम्मेदार बताया जा रहा है। इसी दौरान उनसे भारत में प्रचलित हैशटैग को लेकर भी सवाल किया गया। ब्राउनबैक ने कहा, 'हम इस पर नजर रख रहे हैं और यह बहुत सी जगहों पर हो रहा है। सरकारों की तरफ से यह गलत हो रहा है।' उन्होंने सभी सरकारों से अपील की है कि वे वायरस की जगह को लेकर स्पष्टता पेश करें और सुनिश्चित करें कि अल्पसंख्यकों को निशाना नहीं बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह एक महामारी है और पूरी दुनिया इसका शिकार है और इसका किसी अल्पसंख्यक समुदाय से कोई लेना-देना नहीं है।












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