अमेरिकी शोध में खुलासा, सोशल मीडिया पर हिंदुओं के खिलाफ नफरत बढ़ाने के सबूत, किए गए 10 लाख हिंदू विरोधी ट्वीट

वॉशिंगटन, 14 जुलाई। देश में हिंदू-मुस्लिम को लेकर चल रही बहस पिछले कुछ दिनों में काफी बढ़ गई है। सोशल मीडिया पर हिंदुओं के खिलाफ एक तरह का अभियान तेज हुआ है, जिसके चलते दुनिया ने इसके खतरे को लेकर चेताया है। अमेरिका के शोधकर्ताओं ने कहा है कि सिखों के खिलाफ, बौद्ध लोगों के खिलाफ भी यह अभियान सोशल मीडिया पर काफी तेज हुआ है, लिहाजा सोशल मीडिया पर संतुलित बहस की जरूरत है। दरअसल हाल ही में रटगर्ज यूनिवर्सिटी के शोध में दावा किया गया है कि हमे इस बात के सबूत मिले हैं कि हिंदुओं के खिलाफ नफरती भाषण काफी बढ़े हैं।

10 लाख ट्वीट हिंदुओं के खिलाफ

10 लाख ट्वीट हिंदुओं के खिलाफ

अमेरिकी शोधकर्ताओं के अनुसार तकरीबन 10 लाख ट्वीट, जोकि ईरान के ट्रोलर्स ने हिंदुओं के खिलाफ किए हैं, उनके खिलाफ मीम बनाए, ताकि इस समुदाय के लोगों को अल्पसंख्यको का नरसंहार करने वाला साबित किया जा सके। मिलर सेंटर और इगेल्टन इंस्टिट्यूट के डायरेक्टर जॉन जे फार्मर जूनियर ने कहा कि इसमे कुछ भी नया नहीं है, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हिंदू आबादी को इस तरह के हिंसक हमलों का सामना करना पड़ रहा है। नया यह है कि सोशल मीडिया पर अब इसे बढ़ाया जा रहा है, लोगों के खिलाफ नफरती भाषण शेयर किए जा रहे हैं। हमारे पहले के शोध में भी यह बात सामने आई थी कि सोशल मीडिया पर भरे संदेश काफी बढ़े हैं और हिंसक घटनाओं के पीछे इनकी भूमिका है।

बड़ी संख्या में मीम साझा किए जा रहे

बड़ी संख्या में मीम साझा किए जा रहे

शोध का विषय Anti-Hindu Disinformation: A Case Study of Hinduphobia on Social Media यानि हिंदू विरोधी भ्रामक जानकारी, सोशल मीडिया पर हिंदूफोबिया का अध्ययन। इस शोध में विस्तार से कहा गया है कि सोशल मीडिया पर मीम्स, मैसेज आदि को बड़ी संख्या में लोगों के बीच साझा किया। इसे इस्लामिस्ट वेबस नेटवर्क, टेलीग्राम और अन्य जगहों पर शेयर किया गया है। हिंदूफोबिक शब्दों का इस्तेमाल मीम्स में किया गया है, जुलाई माह में यह अपने सबसे उच्च स्तर पर पहुंच गया है। जिस तरह से उदयपुर में हिंदू व्यक्ति की गला रेतकर हत्या की गई उसको लेकर भारत में काफी तनावपूर्ण माहौल है ।

 सोशल मीडिया का इस्तेमाल नफरत फैलाने के लिए

सोशल मीडिया का इस्तेमाल नफरत फैलाने के लिए

शोध में कहा गया है कि अधिकतर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस बात से अनभिज्ञ हैं कि किन कोड वर्ड और मीम का इस्तेमाल नफरत को फैलाने के लिए किया जा रहा है। पूर्व अमेरिकी कांग्रेसमैन डेनवर रिगलमैन ने कहा कि हमे उम्मीद है कि यह रिपोर्ट समय रहते लोगों को चेताएगी। असल दुनिया में हिंसा फैलने से पहले यह रिपोर्ट अहम भूमिका निभा सकती है। बता दें कि यह रिपोर्ट मुख्य रूप से एनसीआरआई और रुटगेस सेंटर्स की ओर से 2020 की रिपोर्ट पर आधारित है, जिसमे नफरत और वास्तविक दुनिया की हिंसा को फैलाने के लिए साजिश के सिद्धांतों और सोशल मीडिया के उपयोग की जांच की गई है।

हिंदू राष्ट्र के उदय पर हुई थी कॉन्फ्रेंस

हिंदू राष्ट्र के उदय पर हुई थी कॉन्फ्रेंस

बता दें कि पिछले साल अमेरिका की 50 से अधिक यूनिवर्सिटीज ने तीन दिन की ग्लोबल एकेडमिक कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया था, जिसमे हिंदू राष्ट्रवाद के उदय को लेकर चर्चा की गई थी। इसमे स्टैनफोर्ड, हार्वर्ड, प्रिंस्टन, कॉर्नेल भी शामिल थे। बता दें कि जिस तरह से पूर्व भाजपा नेता नूपुर शर्मा ने टीवी डिबेट के दौरान मोहम्मद साहब को लेकर टिप्पणी की थी उसके बाद देश में काफी हिंसा हुई, राजस्थान के उदयपुर के कन्हैया लाल की गला रेतकर हत्या कर दी गई।

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