US Fuel Price: ईरान से लड़ने में टूटी अमेरिका की कमर, तेल के दामों में 50% का उछाल, हालात हुए बेकाबू
US Fuel Price: ईरान से जंग छेड़ने का असर अब सिर्फ पाकिस्तान या दूसरे एशियाई देशों तक ही सीमित नहीं है बल्कि अब अमेरिका के सिस्टम में भी ये साफ दिखने लगा है। जब युद्ध शुरु हुआ तब से लेकर अब तक अमेरिका में पेट्रोल 50% तक महंगा हो गया है। वहीं पिछले हफ्ते एक गैलन (3.78 लीटर) रेगुलर पेट्रोल की कीमत 31 सेंट बढ़कर मंगलवार को औसतन 4.48 डॉलर (425.87 रुपए) प्रति गैलन हो गई, जैसा कि AAA के आंकड़ों से पता चला है।
क्यों महंगा हुआ अमेरिका में तेल?
कच्चे तेल खासकर की गैसोलीन के लिए इस्तेमाल होने वाला तेल, उसकी कीमतें पिछले दो महीनों से बढ़ रही हैं क्योंकि फारस की खाड़ी में Strait of Hormuz, जिससे दुनिया के कच्चे तेल का पांचवां हिस्सा सामान्य रूप से गुजरता है, उस पर ईऱान की नाकेबंदी चल रही है। इस वजह से तेल टैंकर फंसे हुए हैं और कच्चे तेल की डिलीवरी करने में असमर्थ हैं।

सीजफायर की उम्मीद से मिली थी थोड़ी राहत
अप्रैल के मध्य में, कई ड्राइवरों में आशा की किरण जागी थी क्योंकि ऐसे संकेत मिल रहे थे कि जंग समाप्त हो सकता है। नतीजतन, लगभग दो हफ्तों तक गैसोलीन की कीमतें दैनिक आधार पर गिरीं। एक्सपर्ट्स का मानना था कि युद्ध विराम की घोषणा ने सकारात्मक माहौल बनाया था। हालांकि, जैसे-जैसे युद्ध आगे बढ़ता गया, गैसोलीन की कीमतें वापस बढ़ने लगीं। बाजार में उतार-चढ़ाव ने ग्राहकों को सीधे मुश्किल में डाल दिया, क्योंकि शुरुआती राहत जल्द ही खत्म हो गई और कीमतों में फिर से कीमत में उछाल का दौर शुरू हो गया। साथ ही, ये हाल तब तक जारी रहेगा जब होर्मुज नहीं खुलेगा।
पेट्रोल की कीमत आखिर तय कौन करता है?
गैसोलीन की कीमतें पेट्रोल पंप मालिक तय करते हैं, लेकिन कई फैक्टर इसमें शामिल होते हैं। Energy Information Administration के मुताबिक, अमेरिका में 2025 में एक गैलन गैसोलीन की कीमत का लगभग 51% हिस्सा कच्चे तेल की कीमत से जुड़ा होता है।
अमेरिका में पेट्रोल पर कितना टैक्स?
इसका मतलब साफ है-जब कच्चे तेल की कीमत बढ़ती है, तो पेट्रोल भी महंगा हो जाता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से तेल बाजार में बड़ी सप्लाई बाधा आई है। International Energy Agency के मुताबिक अप्रैल की शुरुआत में तेल की कीमत 112 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। एक और बात ईआईए के मुताबिक, पेट्रोल की कीमत में करीब 17% टैक्स, 14% रिफाइनिंग और 17% डिस्ट्रीब्यूशन और मार्केटिंग का खर्च शामिल होता है। कुछ जगह जैसे कैलिफोर्निया में टैक्स ज्यादा होने से कीमतें और बढ़ जाती हैं।
अमेरिका के फैसले का भी असर
अप्रैल में एक बड़ा मोड़ तब आया जब अमेरिका ने ईरान के तेल निर्यात को रोकने के लिए उसके बंदरगाहों को ब्लॉक कर दिया। Jim Krane के अनुसार, ईरान पहले ज्यादा तेल सप्लाई कर रहा था जिससे कीमतें कंट्रोल में थीं, लेकिन इस फैसले के बाद कीमतें बढ़ गईं।
आगे क्या होगा?
अमेरिका में तेल के दाम भारत की तरह जल्दी-जल्दी नहीं बढ़ते। वहां तेल के दाम बढ़ना एक बड़ी घटना माना जाता है जिसमें सीधा सरकार ही जिम्मेदार मानी जाती है। इसको लेकर ट्रंप के खिलाफ सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूटना शुरू हो चुका है और इसकी एक बड़ी झलक अमेरिका के मिड टर्म इलेक्शन में देखने को मिल सकती है। साथ ही, ट्रंप के खिलाफ ये गुस्सा सोशल मीडिया से चलकर सड़क पर पहुंच सकता है। अगर ऐसा होता है तो यह ट्रंप के लिए उनके दूसरा कार्यकाल का बड़ा नुकसान माना जाएगा।
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