इस बार होगा अमेरिकी इतिहास का सबसे महंगा राष्ट्रपति चुनाव, 1 लाख करोड़ होंगे खर्च
वाशिंगटन। साल 2020 का अमेरिकी राष्ट्रपति का चुनाव (US Presidential Election 2020) अमेरिकी इतिहास का सबसे महंगा चुनाव होने जा रहा है। इस बार राष्ट्रपति चुनाव में 1 लाख करोड़ रुपये (14 बिलियन डॉलर) खर्च होने का अनुमान लगाया है। 2016 के राष्ट्रपति चुनाव के मुकाबले ये राशि लगभग दोगुनी है। वहीं चुनाव के पहले आखिरी महीने में लोगों ने जमकर चंदा दिया है।

11 अरब डॉलर का लगाया था अनुमान
एक गैर लाभकारी शोध-समूह सेंटर फॉर रिस्पॉन्सिव पॉलिटिक्स ने इस बारे में आंकड़े जारी किए हैं। सेंटर के मुताबिक पहले 11 अरब डॉलर (82 हजार करोड़ रुपये) खर्च होने का अनुमान लगाया गया था लेकिन अब चुनाव खर्च यह आंकड़ा पार कर चुका है। ताजा अध्ययन के मुताबिक इस बार अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में 1 लाख चार हजार करोड़ रुपये (14 अरब डॉलर) खर्च होने का अनुमान लगाया गया है जो अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के इतिहास में रिकॉर्ड होगा।

चंदा जुटाने में बाइडेन के आगे फिसड्डी ट्रंप
इस बार चुनाव में चंदा लेने के मामले में भी रिकॉर्ड टूटते नजर आ रहे हैं। डेमोक्रेट बाइडेन ऐसे पहले प्रत्याशी बन गए हैं जिन्होंने 1 अरब डॉलर (7400 करोड़ रुपये) की राशि चंदे के जरिए जुटाई है। बाइडेन ने 14 अक्टूबर तक प्रचार अभियान के लिए रिकॉर्ड 93.8 करोड़ डॉलर (6900 करोड़ रुपये) की रिकॉर्ड धनराशि जुटाई है। चंद के मामले में बाइडेन के सामने प्रतिद्वंदी रिपब्लिकन उम्मीदवार ट्रंप टिकते नहीं नजर आ रहे हैं। इसी दौरान ट्रंप ने 59.6 करोड़ डॉलर (4436 करोड़ रुपये जुटाए हैं जो कि बाइडेन को मिले चंदे के मुकाबले आधा ही है।
खास बात यह है कि कोरोना वायरस से बुरी तरह प्रभावित होने के बावजूद राष्ट्रपति चुनाव में जमकर चंदा दिया जा रहा है। दान देने वालों में अमीरों के साथ ही आम लोग भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। महिलाओं ने इस बार दान देने के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।

आर्थिक सुधार में ट्रंप पर विश्वास विदेश नीति में बाइडेन
सीएनएन के एक सर्वे के मुताबिक ज्यादातर अमेरिकी वोटर आर्थिक सुधार को लेकर ट्रंप पर भरोसा करते हैं। अमेरिका के 55 फीसदी लोगों ये सर्वे किया गया था जिसमें 55% लोगों ने आर्थिक सुधार के लिए ट्रंप पर भरोसा जताया जबकि 42 प्रतिशत ने बाइडेन के पक्ष में अपनी सहमति दी।
आर्थिक नीति पर भले ट्रंप आगे हों लेकिन विदेश नीति के मामले में लोगों का भरोसा बाइडेन पर है। सर्वे में सवाल किया गया था कि किसके राष्ट्रपति बनने पर विदेशी सरकारें अमेरिका के साथ अधिक सहयोगी करेंगी। जिस पर 92 प्रतिशत ने बाइडेन का समर्थन किया था जबकि सिर्फ 2 प्रतिशत ने ट्रंप के पक्ष में हां कहा था। प्रभावी विदेश नीति के मामले में भी बाइडेन को 95 प्रतिशत का समर्थन हासिल था जबकि सिर्फ 5 प्रतिशत ने ट्रंप का समर्थन किया था।

इस बार अर्ली वोटिंग का टूटा रिकॉर्ड
इस बार चुनाव में रिकॉर्ड वोटिंग की भी उम्मीद जताई जा रही है। राष्ट्रपति चुनाव के लिए हो रही अर्ली वोटिंग में अभी तक 7 करोड़ वोट डाले जा चुके हैं जो कि एक रिकॉर्ड है। 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में कुल 5 करोड़ 70 लाख अर्ली वोटिंग हुई थी। 2016 में कुल 13.9 करोड़ मतदाताओं ने राष्ट्रपति चुनाव में वोट डाला था। अभी तक अर्ली वोटिंग में ही पिछले चुनाव के आधे से अधिक वोटिंग हो चुकी है।
अमेरिका में 3 नवम्बर को राष्ट्रपति चुनाव होना है। कई राज्य मतदाताओं के लिए मतदान की तारीख से पहले ही वोट डालने की व्यवस्था करते हैं। इसे अर्ली वोटिंग कहा जाता है। इस बार कोरोना वायरस के चलते चुनाव वाले दिन भीड़ से बचने के लिए भी लोग अर्ली वोटिंग में ज्यादा हिस्सा ले रहे हैं। अर्ली वोटिंग में वोट डालने वालों में बाइडेन के समर्थक ज्यादा हैं जबकि मतदान वाले दिन वोटिंग करने वालों में ट्रंप समर्थक अधिक होंगे।












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