'हम ताइवान की स्वतंत्रता का समर्थन नहीं करते', जो बाइडेन ने ये क्या बयान दे दिया? क्या ड्रैगन से डरा अमेरिका?

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने शनिवार को ताइवान राष्ट्रपति चुनाव में चीन विरोधी नेता की जीत के बाद अचानक चौंकाने वाला बयान दे दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ताइवान की स्वतंत्रता का समर्थन नहीं करता है। आपको बता दें कि ताइवान में एक दिन पहले ही राष्ट्रपति चुनाव परिणाम निकला है।

चीन की धमकी के बावजूद ताइवान के मतदाताओं ने तीसरी बार डीपीपी पार्टी के प्रति अपना समर्थन जताया है। डीपीपी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार लाई चिंग ते ताइवान के राष्ट्रपति चुने गए हैं। उन्हें चीन विरोधी और ताइवान की स्वतंत्रता के सबसे बड़े समर्थक नेता के तौर पर देखा जाता है।

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ऐसे में ताइवान में हुए राष्ट्रपति चुनाव पर प्रतिक्रिया मांगे जाने पर बाइडन ने कहा, "हम स्वतंत्रता का समर्थन नहीं करते...।" आपको बता दें कि 6 महीने पहले अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने भी यही बात कही थी।

चीन के दौरे पर जाने से पहले ब्लिंकन ने 'वन चायना पॉलिसी' को दोहराया था। विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने भी कहा था वाशिंगटन "ताइवान की स्वतंत्रता का समर्थन नहीं करता है।"

साल 1979 तक अमेरिका ने अपनी विदेशी नीति में बदलाव कर अपनी राजनीतिक मान्यता ताइपे से चीन को दे दी थी। उससे पहले अमेरिका के ताइवान के साथ राजनीतिक संबंध थे। लेकिन, रिचर्ड निक्सन के दौर में अमेरिका के चीन के साथ रिश्तों में बदलाव किया।

इसके बाद से अमेरिका कहता रहा है कि वो ताइवान द्वारा स्वतंत्रता का समर्थन नहीं करता है। हालांकि, अमेरिका, ताइवान के साथ अनौपचारिक संबंध बनाए रखता है और इसका सबसे महत्वपूर्ण समर्थक और हथियार आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।

बाइडेन ने क्यों दिया ये बयान?

ताइवान में एक बार फिर से अमेरिका समर्थित दल की सरकार बन गई है। चुनाव से पहले चीन ने ताइवान को धमकाया था और सके हवाई इलाकों में अपने फाइटर जेट्स भेजे थे। चीन ने पिछले कुछ महीनों में अमेरिका को ताइवान को लेकर कई बार धमकी दी है।

पिछले साल के अंत में सैन फ्रांसिस्को में हुए शिखर सम्मेलन के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने खुलकर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन को धमकी दी थी। ऐसे में अमेरिका को डर है कि उसका बीजिंग के साथ संघर्ष बढ़ सकता है। अमेरिका पहले से मिडिल ईस्ट और यूरोप में चल रही जंग में उलझा हुआ है। अमेरिका एक साथ 3 जंग में शामिल होने का खतरा नहीं उठाना चाहता है।

क्या है वन चाइना नीति?

वन चाइना पॉलिसी, चीन की एक नीति है। इसके मुताबिक, चीन नाम का सिर्फ़ एक ही राष्ट्र है और ताइवान कोई अलग देश नहीं, बल्कि चीन का ही एक प्रांत है। वन चाइना पॉलिसी के तहत चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है।

चीन ने धमकी दे रखी है कि अगर कभी भी ताइवान ने खुद को स्वतंत्र देश घोषित किया तो वह बल प्रयोग करेगा। वन चाइना पॉलिसी के तहत चीन हांगकॉन्ग, तिब्बत और शिनजियांग को भी अपना क्षेत्र मानता है। चीन का मानना है कि जो देश पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के साथ कूटनीतिक संबंध रखना चाहते हैं, उन्हें रिपब्लिक ऑफ़ चाइना से संबंध तोड़ने होंगे।

आपको बता दें कि चीन उन देशों के साथ राजनयिक संबंध नहीं रखता, जिन्होंने ताइवान को एक देश के तौर पर मान्यता दी है या ताइपे में दूतावास स्थापित किया है। पिछले साल ही होंडुरास ने ताइवान संग अपने संबंध तोड़कर चीन के साथ संबंध स्थापित किए हैं।

होंडुरास की ओर से चीन के साथ राजनयिक संबंध शुरू करने के बाद ताइवान के पास केवल 13 देशों की मान्यता रह गई है। ताइवान ने 2016 के बाद से कुल 9 राजनयिक सहयोगी देशों का समर्थन गंवा दिया है।

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