FGM-148 Javelin: भारत खरीदेगा रूस के छक्के छुड़ाने वाला अमेरिकी मिसाइल? क्या है US का एक्सक्लूसिव ऑफर?
FGM-148 Javelin Missiles: यूक्रेन ने रूस के खिलाफ अपनी लड़ाई में सबसे ज्यादा जिस हथियार का इस्तेमाल किया है, जो है FGM-148 Javelin मिसाइल, जिसने रूसी सेना के छक्के छुड़ाकर रख दिए हैं। कंधे से दागे जाने वाला कवच रोधी इस हथियार के भारत में बनने की संभावना काफी ज्यादा बढ़ है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अगर भारत और अमेरिका के बीच बातचीत कामयाब होती है, तो हो सकता है, कि FGM-148 Javelin मिसाइल का निर्माण भारत में हो। अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन की हाल ही में भारत यात्रा के दौरान, दोनों पक्षों ने FGM-148 Javelin हथियार के संयुक्त उत्पादन के लिए कई प्रस्तावों पर चर्चा की है, जिसमें भारतीय सेना के लिए जेवलिन एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम शामिल है।

FGM-148 Javelin कितना असरदार है?
अमेरिका के डिफेंस कॉन्ट्रैक्टर रेथियॉन और अमेरिकी हथियार कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने FGM-148 Javelin का निर्माण किया है और 46 पाउंड का यह हथियार कंधे से दागा जा सकता है। इस हथियार की सबसे बड़ी खासियत ये है, कि ये युद्ध के मैदान में किसी भी टैंक या मोबाइल वाहन को भेदने की क्षमता रखता है। यह हेलीकॉप्टरों को भी मार गिराने की क्षमता रखता है।
भारतीय सेना करीब एक दशक से कंधे से दागे जाने वाले एटीजीएम हथियार की तलाश कर रही है। और यदि बातचीत आगे बढ़ती है, तो भारत में मैन्युफैक्चरिंग संयंत्र स्थापित करने के लिए, एक स्थानीय भागीदार की तलाश की जाएगी।
जेवलिन सिस्टम को दो सैनिकों की टीम संचालित करती है। यह 2.5 मील तक की रेंज वाली हीट-सीकिंग मिसाइल दागता है। इसे "फायर एंड फॉरगेट" सिस्टम भी कहा जाता है, और यह फायरिंग के फौरन बाद सैनिकों को कवर के लिए भागने में मदद करता है।
इस सिस्टम को जेवलिन नाम इसलिए दिया गया है, क्योंकि यह भाले की तरह ऊपर से टैंकों पर हमला करता है। जेवलिन को सीधे लक्ष्य पर भी दागा जा सकता है, जिससे वे कम उड़ान वाले हेलीकॉप्टरों के लिए खतरा बन जाते हैं।
चीनी आक्रामकता का मुकाबला करने के लिए भारतीय सेना ने 2020 में इजरायल से स्पाइक एटीजीएम हथियार खरीदे थे, ताकि एंटी-आर्मर हथियारों की अपनी जरूरत को पूरा किया जा सके। अब, भारत के सरकारी स्वामित्व वाले रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और भारतीय सेना ने राजस्थान के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM) हथियार सिस्टम का टेस्ट किया है।
14 अप्रैल 2024 को एक प्रेस रिलीज के माध्यम से परीक्षण की घोषणा करते हुए, भारतीय रक्षा मंत्रालय (MoD) ने कहा, कि MPATGM हथियार प्रणाली - जिसमें मिसाइलें, ट्राइपॉड-माउंटेड कमांड लॉन्च यूनिट, लक्ष्य अधिग्रहण प्रणाली और फायर-कंट्रोल यूनिट शामिल हैं, उसका परीक्षण किया गया है और उसकी क्षमता का टेस्ट किया गया है।
लिहाजा, यह देखना अभी बाकी है कि भारत, भारत में जैवलिन का उत्पादन करने के अमेरिकी प्रस्ताव को स्वीकार करेगा या नहीं।

युद्ध में अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर चुका है जैवलिन
जैवलिन अपनी क्षमता का प्रदर्शन युद्ध में कर चुका है। पेंटागन के मुताबिक, अमेरिका ने यूक्रेन को 10,000 से ज्यदा जैवलिन सिस्टम की आपूर्ति की है। विशेषज्ञों का मानना है, कि इस हथियार ने यूक्रेन की पैदल सेना को, रूस की विनाशक मशीनी हथियारों को मार गिराने की अभूतपूर्व क्षमता दी है।
एक FGM-148 जैवलिन की कीमत करीब 176,000 डॉलर (एक करोड़ 47 लाख रुपये) है। अगस्त 2023 के अंत में, अमेरिकी रक्षा दिग्गज लॉकहीड मार्टिन ने कहा था, कि वह अमेरिकी रक्षा कॉन्ट्रैक्टर रेथियॉन के साथ मिलकर काम करते हुए, 2026 तक मौजूदा जैवलिन उत्पादन दर को 2,100 प्रति वर्ष से लगभग दोगुना करके 4,000 तक करने की योजना बना रहा है।
यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत और अमेरिका कई उत्पादों पर चर्चा कर रहे हैं, जिसमें स्ट्राइकर बख्तरबंद वाहनों का संयुक्त उत्पादन करने का प्रस्ताव भी शामिल है। और माना जा रहा है, कि भारत और अमेरिका एक समझौते तक पहुंच सकते हैं, जिससे भारत में FGM-148 Javelin मिसाइल के उत्पादन का रास्ता साफ हो जाएगा।
भारतीय कंपनी लार्सन एंड टुब्रो ने भारत में मिसाइलों और हथियार प्रणालियों को विकसित करने के लिए फ्रांसीसी एमबीडीए के साथ एक ज्वाइंट वेंचर स्थापित किया है। दोनों पांचवीं पीढ़ी की एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलों (ATGM5s), तटीय बैटरियों के लिए मिसाइलों और उच्च गति वाले लक्ष्य ड्रोनों का विकास करने के लिए काम कर रहे हैं।
चेन्नई में डेफएक्सपो में ATGM-5 के प्रोटोटाइप को दिखाया गया था और इसे पूरी तरह से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के साथ भारत में बनाने की योजना बनाई जा रही है। विदेशी विक्रेता 10 किलोमीटर की लंबी दूरी की क्षमता वाले एडवांस ATGM-5 को भारत में बनाने के लिए भी तैयार है। इसे जमीन-आधारित और हवाई प्लेटफार्मों से फायर करने के लिए कॉन्फ़िगर किया जाएगा।

भारत को क्यों है ऐसे हथियार की तलाश?
भारतीय सेना अपने पूर्वी और पश्चिमी प्रतिद्वंद्वियों (चीन और पाकिस्तान) से मुकाबला करने के लिए अपनी मारक क्षमता को बढ़ाने की कोशिश कर रही है। जून 2023 में, भारत ने लाइसेंस-निर्मित BMP-2/2K 'सारथ' इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल्स पर लगाए जाने वाले 5,000 फायर-एंड-फॉरगेट मिसाइलों और 500 लॉन्चर सिस्टम के अधिग्रहण के लिए एक RFI जारी किया।
RFI में कहा गया है, कि ATGM में शीर्ष और प्रत्यक्ष हमले करने की क्षमता होनी चाहिए। उनकी लंबाई 1.25 मीटर से कम, वजन 25 किलोग्राम और 125 मिमी कैलिबर होना चाहिए। मिसाइलों को क्रमशः प्रत्यक्ष और शीर्ष हमले मोड के लिए 200 मीटर और 1,100 मीटर की न्यूनतम सीमा पर और 5 किमी से ज्यादा की मैक्सिमम सीमा होनी चाहिए।
भारतीय सेना को कम से कम 650 मिमी रोल्ड होमोजीनोजिम आर्मर इक्विवेलेंट (RHAe) और एक्सप्लोसिव रिएक्टिव आर्मर (ERA) को भेदने के लिए ATGMs की आवश्यकता होती है। उन्हें दिन और रात के डबल मोड वाले सीकर, वायरलेस गाइडेंस सिस्टम, इम्पैक्ट फ्यूज के साथ इंटरचेंजेबल एंटी-आर्मर वॉरहेड या मल्टी-पर्पज एंटी-आर्मर, ब्लास्ट-पेनेट्रेशन और एयर-बर्स्ट फ्यूज के साथ हाई एक्सप्लोसिव वॉरहेड से भी लैस होना चाहिए।
RFI में कहा गया है, कि ATGM का इस्तेमाल चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) और पाकिस्तान के साथ पश्चिमी सीमा पर दुश्मन के टैंक, बख्तरबंद कार्मिक वाहक (APC), लड़ाकू वाहनों, कम उड़ान वाले हेलीकॉप्टरों और अन्य जमीनी हथियार प्लेटफार्मों को नष्ट करने में सक्षम होना चाहिए।












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