US-Israel-Iran War: चालाक चीन ने ईरान के साथ मिलकर तेल को लेकर किया बड़ा खेला, क्या है ये सीक्रेट डील?
US-Israel-Iran War: अमेरिका-ईरान संघर्ष और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे दुनिया कच्चे तेल के लिए त्राहिमान मचा हुआ है। वहीं इस संकट की घड़ी में भी चीन इन चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का बखूबी फायदा उठा रहा है। खबर है कि युद्ध से जूझ रहा ईरान अभी भी चीन को बड़ी मात्रा में कच्चा तेल भेज रहा है।
28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल-ईरान के बीच संघर्ष छिड़ने के बावजूद, ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होते हुए लाखों बैरल कच्चा तेल चीन को भेजा है। इस घटनाक्रम ने महत्वपूर्ण ऊर्जा कॉरिडोर से होने वाले समुद्री यातायात को बाधित कर दिया है। यह शिपमेंट तब हुआ जब क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं अपने चरम पर थीं।
11.7 मिलियन बैरल ईरानी कच्चा तेल चीन भेजा गया
टैंकरट्रैकर्स के को-फाउंडर समीर मदनी ने मंगलवार को CNBC को बताया कि संघर्ष शुरू होने के बाद से कम से कम 11.7 मिलियन बैरल ईरानी कच्चा तेल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरा है, और यह सारा चीन के लिए था। टैंकरट्रैकर्स उपग्रह इमेजरी का उपयोग करके टैंकरों की गतिविधियों पर नज़र रखता है, जिससे उन्हें उन जहाजों का भी पता चलता है जिनके ऑनबोर्ड ट्रैकिंग सिस्टम बंद होते हैं।

दुनिया के लिए बंद किया और चीन को ईरान करता रहा तेल सप्लाई
यह आपूर्ति स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के संवेदनशील मार्ग से हो रही है, जिसे अमेरिका के हमलों के बाद ईरान ने दुनिया के लिए बंद कर दिया था। इस बंदी ने भारत समेत कई देशों में तेल व गैस की आपूर्ति प्रभावित की। यह जलमार्ग वैश्विक तेल का 20-25% और एलएनजी का 20% से अधिक व्यापार वहन करता है।
चीन और ईरान के बीच क्या हुई है सीक्रेट डील?
ऐसे में सवाल उठा रहा है कि तो क्या ईरान और चीन के बीच तेल को लेकर कोई गोपनीय समझौता है? टैंकर ट्रैकर (TankerTrackers) के सह-संस्थापक समीर मदानी ने बताया कि 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद से ईरान कम से कम 1.17 करोड़ बैरल कच्चा तेल इसी जलमार्ग से चीन को भेज चुका है।
टैंकर ट्रैकर कंपनी सैटेलाइट तस्वीरों से उन जहाजों की आवाजाही ट्रैक करती है जो अपना ट्रैकिंग सिस्टम बंद कर देते हैं। तेहरान की चेतावनी के बाद 'डार्क' हुए कई जहाज इसी रास्ते से गुजरे हैं, क्योंकि ईरान ने इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर हमले की चेतावनी दी थी।
1.2 करोड़ बैरल कच्चा तेल इसी मार्ग से गुजरा
शिपिंग डेटा प्रदाता केप्लर (Kpler) का भी अनुमान है कि युद्ध शुरू होने से अब तक करीब 1.2 करोड़ बैरल कच्चा तेल इसी मार्ग से गुजरा है। केप्लर के मुताबिक, चीन ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार रहा है, इसलिए इस तेल का अधिकांश हिस्सा संभवतः चीन पहुँचा होगा। हालांकि, जहाजों के अंतिम गंतव्य की पुष्टि करना अब मुश्किल हो गई है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से दुनिया भर में होती है तेल और गैस की सप्लाई
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक संकरा और रणनीतिक समुद्री मार्ग है, जो दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल और गैस वहन करता है। संघर्ष बढ़ने के बाद इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही कम हुई। इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गेनाइजेशन (IMO) के अनुसार, युद्ध के शुरुआती दो सप्ताह में ईरान ने यहाँ 10 जहाजों पर हमला किया, जिसमें 7 नाविकों की मौत हुई। इन घटनाओं ने वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला को बुरी तरह प्रभावित किया।
ये ईरानी टैंकर चीन भेजे गए कैसे हुई पहचान?
सप्ताह की शुरुआत में CNBC को दिए एक साक्षात्कार में ईरान के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा था कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले तेल टैंकरों को "बहुत सावधान रहना चाहिए।" मदनी ने यह भी बताया कि 28 फरवरी से ईरान से निकलते हुए देखे गए छह टैंकरों में से तीन पर ईरानी झंडा लगा हुआ था, जो उनके ईरानी मूल का संकेत देता है।
ट्रंप का दावा- हमने सभी सेना के जहाज डुबो दिए
आपूर्ति बाधित होने की आशंका से बढ़ते तेल की कीमतों के बीच, तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास इंतजार कर रहे जहाजों से अपना रास्ता फिर से शुरू करने का आग्रह किया। फॉक्स न्यूज के ब्रायन किल्मीड से बात करते हुए ट्रम्प ने कहा कि जलमार्ग के पास फंसे जहाजों को "साहस दिखाना चाहिए" और आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा, "डरने की कोई बात नहीं है, उनके पास कोई नौसेना नहीं है, हमने उनके सभी जहाज डुबो दिए हैं।"












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