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US Iran War: 5000 पाउंड का बंकर बस्टर बम, जिसने ली Ali Larijani की जान, बनाने में कितना पैसा होता है खर्च?

US Iran War: मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी बीच United States Central Command (CENTCOM) ने एक बड़ा सैन्य ऑपरेशन किया। अमेरिका ने रणनीतिक रूप से बेहद अहम Strait of Hormuz के पास ईरान के मिसाइल ठिकानों पर जोरदारे हमला किया।

इस हमले में अमेरिका ने अपने सबसे ताकतवर पारंपरिक बमों में से कुछ का इस्तेमाल किया। टारगेट था- ईरान के वो अंडरग्राउंड ठिकाने, जहां एंटी-शिप क्रूज मिसाइलें स्टोर की गई थीं, जो अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खतरा बन रही थीं। जानते हैं इस बम के बारे में जिसके हमले में ईरान के सैन्य प्रमुख अली लारीजानी मारे गए।

US Iran War

कितना खतरनाक है ये बम?

इस ऑपरेशन में अमेरिका ने GBU-72 Advanced 5K Penetrator का इस्तेमाल किया।

• वजन: लगभग 5,000 पाउंड (करीब 2,268 किलोग्राम)
• कीमत: लगभग 288,000 डॉलर प्रति बम
• पहली बार तैनाती: 2021

US Iran War
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यह बम खास तौर पर गहरे और मजबूत बंकरों को तोड़ने के लिए डिजाइन किया गया है।
हालांकि, यह अमेरिका के सबसे बड़े बंकर-बस्टर बम GBU-57 Massive Ordnance Penetrator से छोटा है, जिसका वजन 30,000 पाउंड है और पहले ईरान के परमाणु ठिकानों पर इस्तेमाल किया जा चुका है।

पुराने बम GBU-28 से कितना खतरनाक?

GBU-72 को पुराने बंकर-बस्टर बम GBU-28 का अपग्रेडेड वर्जन माना जाता है। इसकी खासियत ये है कि यह कंक्रीट और जमीन के अंदर गहराई तक घुस सकता है, फिर अंदर जाकर विस्फोट करता है। इससे टारगेट को ज्यादा नुकसान होता है और ऊपरी सतह पर कम collateral damage (साइड इफेक्ट) होता है। यानी यह एक precision weapon है-कम नुकसान में ज्यादा असर।

35,000 फीट से ड्रॉप के बाद हुई टेस्टिंग

इस बम का बड़े स्तर पर परीक्षण किया गया था। अक्टूबर 2021 में, अमेरिका के Eglin Air Force Base (फ्लोरिडा) में एक टेस्ट हुआ:

• एक F-15E Strike Eagle फाइटर जेट से
• 35,000 फीट की ऊंचाई से
• GBU-72 बम गिराया गया

इस टेस्ट को 780वीं टेस्ट स्क्वाड्रन ने प्लान किया और 40वीं फ्लाइट टेस्ट स्क्वाड्रन ने ऑपरेट किया। यह पहली बार था जब इस बम की फ्लाइट लोडिंग और रिलीज़ सफलतापूर्वक टेस्ट किए गए।

कैसे मापी गई इसकी ताकत

इस टेस्टिंग में एक और खास चीज़ हुई 2,000 पाउंड के बम के लिए डिजाइन किए गए एक modified tail kit को भी वैलिडेट किया गया। इससे यह सुनिश्चित किया गया कि GBU-72 को अलग-अलग फाइटर और बॉम्बर जेट्स से इस्तेमाल किया जा सकता है। ग्राउंड टेस्ट में अब तक का सबसे बड़ा open-air blast किया गया जिसमें बम के चारों तरफ सेंसर लगाए गए। इसके बाद फ्रैगमेंट काउंटिंग मशीनों से इसकी घातक क्षमता (lethality) मापी गई

ईरान पर क्यों गिराया बम?

CENTCOM ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि ईरान की ये मिसाइलें इंटरनेशनल शिपिंग रूट्स के लिए बड़ा खतरा बन चुकी थीं। CENTCOM ने X (ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए बताया अमेरिकी सेना ने होर्मुज के पास ईरानी तट पर बने मजबूत मिसाइल ठिकानों पर कई 5,000 पाउंड के डीप पेनिट्रेटर बमों का सफल इस्तेमाल किया।

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यह हमला उस समय हुआ जब ईरान ने माइन, ड्रोन और जहाजों की मदद से इस जलडमरूमध्य को लगभग ब्लॉक कर दिया था। ध्यान देने वाली बात ये है कि दुनिया के करीब 20% तेल की सप्लाई इसी रास्ते से होती है, इसलिए यहां कोई भी तनाव सीधे ग्लोबल इकोनॉमी को हिला सकता है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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