US Iran War Update: ट्रंप ने उतारी मिलिट्री तो ईरान कहां करेगा हमला, बता दिया, किन देशों पर पड़ेगा असर?
US Iran War Update: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ट्रंप के अटपटे बयानों के बीच ईरान ने एक बात साफ कर दी है। अगर हम पर हमला हुआ तो जवाब करारा मिलेगा। जंग रुके या और तेज हो जाए ईरान ने हौसलों में इस बात से कोई फर्क पड़ता नहीं दिख रहा। इसी बीच ईरान ने बता दिया है कि अगर इजरायल और अमेरिका की तरफ से उसके खार्ग आईलैंड पर हमला होता है तो वह उस जगह को निशाना बनाएगा जहां से पूरी दुनिया के जहाज गुजरते हैं। यह वही समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया के करीब 12% कच्चे तेल की सप्लाई गुजरती है।
ट्रंप की डेडलाइन खत्म, ईरान का नया दांव
डोनाल्ड ट्रंप की 5 दिन की शांति वार्ता की डेडलाइन खत्म हो गई है। इसी बीच अमेरिका अपने पैराट्रूपर्स तैयार कर चुका है और अंदाजा लगाया जा रहा है कि ये सब खार्ग द्वीप पर उतरकर उसे अपने कब्जे में लेने की फिराक में हैं। इसके जवाब में ईरान ने साफ कर दिया है, अगर ऐसा हुआ तो होर्मुज तो पहले से कब्जे में है ही अब बाब अल-मंडेब को ब्लॉक कर देंगे। यानी लाल सागर जाने का रास्ता भी दुनिया के लिए बंद हो जाएगा।

क्या होगा अगर बंद हुआ बाब-अल-मंडेब?
अगर बाब अल-मंडेब भी बंद होता है, तो दुनिया के एनर्जी मार्केट को बड़ा झटका लगेगा। ईरान जानता है कि होर्मुज स्ट्रेट पर उसकी पकड़ (जहां से 20% वैश्विक ऊर्जा गुजरती है) उसे जंग में स्ट्रेटेजिक एडवांटेज देती है। बिना इस पकड़ को तोड़े अमेरिका के लिए जंग खत्म करना आसान नहीं होगा। वहीं अगर मंडेब को भी वह बाधित कर देता है तो फिर अमेरिका के पीछे कई देश पड़ जाएंगे।
खार्ग द्वीप क्यों है अहम?
ट्रंप ने तनाव कम करने की बात कही है, लेकिन ईरान पर दबाव बनाने के लिए खार्ग द्वीप पर सैन्य तैयारी भी जारी है। खार्ग द्वीप को ईरान की 'क्राउन ज्वेल' कहा जाता है, क्योंकि यहां से देश का करीब 90% कच्चा तेल एक्सपोर्ट होता है। यही वजह है कि ईरान ने अब बाब अल-मंडेब को अपना नया हथियार बना लिया है।
32 किमी का रास्ता, लेकिन बड़ा असर
करीब 32 किमी चौड़ा यह स्ट्रेट ग्लोबल बिजनेस के लिए बेहद अहम है। यहां से जहाज रेड सी, स्वेज कनाल होते हुए मेडिटेरेनियन सी तक जाते हैं। अगर ये बंद हो गया तो कई सारे देशों में हाहाकार मच सकता है और बाजार भी आसमान छू सकता है।
कैसे बंद करेगा ईरान बाब अल-मंडेब?
हालांकि, बाब अल-मंडेब को बंद करना ईरान के लिए आसान नहीं है। होर्मुज के उलट, ईरान इसकी सीमा से सीधे नहीं जुड़ा है। यह स्ट्रेट होर्मुज से करीब 1,200 मील दूर स्थित है। यह स्ट्रेट यमन के दक्षिण-पश्चिम और जिबूती के बीच स्थित है। जहां पर ईरान के प्रॉक्सी गुट हूथी का दबदबा चलता है। हूती विद्रोही पहले भी इजरायल से जुड़े जहाजों पर ड्रोन और मिसाइल हमले कर चुके हैं। यह हमले ईरान के समर्थन से किए गए थे, जिससे इस जलमार्ग की सुरक्षा पहले से ही सवालों में है।अगर उन्हें ठीक-ठाक सप्लाई और इंटेल मिलता है तो ईरान इस काम में सफल हो सकता है।
कितना होता है व्यापार?
हर साल करीब 1 ट्रिलियन डॉलर (लगभग ₹94 लाख करोड़) का सामान इस रास्ते से गुजरता है। यही वजह है कि इसे 'आंसुओं का द्वार' कहा जाता है। रोजाना लगभग 4.5 मिलियन बैरल तेल भी इसी रास्ते से जाता है। वहीं, ईरान इस स्ट्रेट की अहमियत को अच्छी तरह समझता है। IRGC ने कहा है कि यह दुनिया के सबसे रणनीतिक समुद्री रास्तों में से एक है और ईरान इसके खिलाफ प्रभावी खतरा पैदा करने की क्षमता रखता है।
अमेरिका क्या कर लेगा?
अमेरिका का जिबूती में बड़ा सैन्य अड्डा है, जो इस स्ट्रेट के पास स्थित है। ऐसे में अगर ईरान कोई कदम उठाता है, तो अमेरिका तुरंत जवाब दे सकता है। लेकिन अमेरिका जवाब तो होर्मुज में भी दे रहा है पर बात बन नहीं पा रही, क्योंकि वहां अभी भी ईरान का कंट्रोल बना हुआ है। ऐसे में अगर बाब अल-मंडेब बंद या प्रभावित होता है तो दुनिया में तेल और गैस के दाम न सिर्फ आसमान छुएंगे बल्कि सप्लाई इस हद तक प्रभावित होगी इमरजेंसी घोषित करने जैसे हालात पैदा हो सकते हैं।
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