US Iran Tension: होर्मुज और खार्ग नहीं, इन 3 इलाकों पर कब्जा करना है डोनाल्ड ट्रंप का असली प्लान
US Iran Tension: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच फारस की खाड़ी के पास स्थित तीन छोटे लेकिन बेहद अहम द्वीप-अबू मूसा, ग्रेटर टंब और लेसर टंब-एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं। इन द्वीपों को लेकर अमेरिका, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच भू-राजनीतिक खींचतान तेज होती दिख रही है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका इन द्वीपों पर नियंत्रण स्थापित करने की रणनीति बना सकता है। जानकारों का मानना है कि यह कदम न सिर्फ ईरान पर दबाव बनाने के लिए हो सकता है, बल्कि यूएई को संतुष्ट करने की कोशिश भी हो सकती है, जो लंबे समय से इन द्वीपों पर अपना दावा करता रहा है। फिलहाल इन द्वीपों पर ईरान का नियंत्रण है।

US Iran Tension: तीनों द्वीपों का है रणनीतिक महत्व
- इन द्वीपों की अहमियत इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि ये होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बेहद करीब स्थित हैं। यह वही रास्ता है, जहां से दुनिया के एक बड़े हिस्से का तेल निर्यात होता है।
- अबू मूसा द्वीप तो इस मार्ग के मुहाने पर स्थित है, जिससे गुजरना लगभग हर तेल टैंकर के लिए अनिवार्य होता है। ऐसे में इन द्वीपों पर नियंत्रण का मतलब वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर प्रभाव डालना भी हो सकता है।
- एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, इन तीनों द्वीप की रणनीतिक स्थिति अमेरिका के लिए मिडिल ईस्ट और रेड सी पर अपना प्रभुत्व बनाने के लिहाज से महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि ट्रंप इसे लेकर बेहद गंभीर हैं।
Donald Trump ने भी दिए संकेत
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान और रणनीतिक संकेतों के बाद यह चर्चा और तेज हो गई है कि अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाकर इन द्वीपों को लेकर कोई बड़ा कदम उठा सकता है। इस दिशा में अमेरिका द्वारा अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती भी इस संभावना को मजबूत करती है। ट्रंप पहले भी गाजा के लिए ऐसे बयान दे चुके हैं कि उनकी योजना गाजा पट्टी को अमेरिकों की ऐशगाह बनाने के तौर पर है।
Iran के लिए हो सकता है बड़ा खतरा
कूटनीतिक मामलों के एक्सपर्ट्स की राय है कि अगर अमेरिका इन द्वीपों पर कब्जा करता है, तो यह ईरान के लिए एक बड़ा झटका होगा। इससे होर्मुज जलडमरूमध्य पर उसका प्रभाव कमजोर हो सकता है। साथ ही, अमेरिका इस कदम के जरिए यूएई के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करना चाहता है, खासकर तब जब क्षेत्र में ईरान और उसके समर्थित समूह सक्रिय हैं।
अमेरिका के लिए आसान नहीं द्वीपों पर कब्जा
हालांकि, यह कदम जोखिम भरा भी हो सकता है। ईरान पहले ही ऐसे किसी भी हस्तक्षेप को गंभीर चुनौती मानता रहा है। अगर अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई की, तो इससे पूरे क्षेत्र में संघर्ष और बढ़ सकता है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल बाजार पर भी पड़ेगा। फिलहाल दुनिया की नजर इन तीनों द्वीपों पर टिकी हुई है, जहां से मिडिल ईस्ट की राजनीति का अगला बड़ा मोड़ तय हो सकता है।












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