LCA Tejas: अमेरिका ने भारत के साथ किया खतरनाक विश्वासघात! फाइटर जेट का नहीं दे रहा इंजन, फंस गई वायुसेना?
LCA Mk-1A Fighter Jet: ऐसा माना जा रहा है, कि अमेरिका ने भारत के साथ बहुत बड़ा विश्वासघात किया है, जिससे भारतीय वायुसेना फंस गई है। अमेरिका भारत को LCA Tejas Mk-1A लड़ाकू विमान की सप्लाई में लगातार देरी कर रहा है, जिसकी वजह से फाइटर जेट का निर्माण नहीं हो पा रहा है।
आत्मनिर्भर भारत संकल्प के तहत स्थानीय रूप से विकसित LCA Mk-1A लड़ाकू विमान को इस साल फरवरी तक वायुसेना को सौंपा जाना था, लेकिन HAL भारतीय रक्षा उद्योग का गौरव माने जाने वाले इस लड़ाकू विमान को, मार्च तक भी हवा में नहीं उतार पाया।

विमानों के इंजन की सप्लाई क्यों नहीं कर रहा अमेरिका?
HAL को 31 मार्च 2024 तक, 2 लड़ाकू विमान और 31 मार्च 2025 तक 18 लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना कौ सौंपने थे, लेकिन अब विमानों की डिलीवरी जुलाई के अंत में ही शुरू होने की उम्मीद है। डिलीवरी शेड्यूल में यह बदलाव HAL और GE एयरोस्पेस में सप्लाई चेन संबंधी समस्याओं की वजह से Mk-1A में लगने वाले F404-IN20 इंजन की आपूर्ति में देरी की वजह से हो रही है।
डिफेंस एक्सपर्ट्स का कहना है, कि रूस और भारत में मजबूत होते संबंधों की वजह से अमेरिका ने जान-बूझकर एयरक्राफ्ट के इंजन की सप्लाई रोकी है।
भारतीय वायुसेना, जिसे अपने ऑपरेशन को फुल स्पीड में चलाने के लिए 42 स्क्वाड्रन की जरूरत है, वो पहले से ही फाइटर जेट्स की कमी से जूझ रहा है और इस वक्त भारत के साथ सिर्फ 31 स्क्वाड्रन ही बचे हैं। इसके अलावा, भारत की कोशिश वायुसेना के बेड़े से पुराने रूसी MIG विमानों को बाहर निकालकर उनकी जगह तेजस फाइटर जेट शामिल करना है और अपने स्क्वाड्रन की संख्या को पूरा करना है, लेकिन अमेरिका की वजह से लगातार देरी हो रही है।
FlightGlobal ने जब संपर्ककिया, तो GE एयरोस्पेस ने कहा, कि "एयरोस्पेस उद्योग अभूतपूर्व आपूर्ति श्रृंखला दबावों का अनुभव कर रही है। GE एयरोस्पेस हमारे भागीदार HAL और आपूर्तिकर्ताओं के साथ मिलकर बाधाओं को दूर करने और LCA Mk-1A कार्यक्रम के लिए F404-IN20 इंजन वितरित करने के लिए काम कर रहा है।"
क्या नये फाइटर जेट्स में लगेंगे पुराने इंजन?
फाइटर जेट्स की डिलीवरी शुरू होने में देरी को देखते हुए, भारतीय रक्षा मंत्रालय ने एक समीक्षा बैठक की और HAL को मार्च 2025 तक 18 जेट विमानों की डिलीवरी की समय सीमा को पूरा करने के लिए कहा। एचएएल ने मार्च 2025 तक 18 जेट विमानों के अनुबंध लक्ष्य को पूरा करने की बात भी कही है। और HAL विमानों की डिलीवरी तभी कर सकता है, जब उसे सही समय पर इंजन मिले, अन्यथा उसे नए विमान में पुराने F404-IN20 इंजन लगाने पड़ सकते हैं!
अप्रैल 2024 में प्रकाशित मैकिन्से एंड कंपनी के विश्लेषण के मुताबिक, "2020 से, OEMs को विमान निर्माण के लिए आवश्यक कई घटकों की पर्याप्त मात्रा प्राप्त करने के लिए संघर्ष करना पड़ा है, जिसमें कच्चा माल, तैयार कास्टिंग और फोर्जिंग, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स घटक शामिल हैं। लिहाजा, उत्पादन लाइनें धीमी हो गई हैं या बंद हो गई हैं।"

भारत को इंजन सप्लाई करने में देरी क्यों?
मौजूदा जियो-पॉलिटिरल तनाव और प्रतिबंधों ने एयरोस्पेस उद्योग की सप्लाई चेन को बुरी तरह से प्रभावित किया है। और अमेरिकी प्रतिबंध, हथियारों की सप्लाई को लेकर कई और परेशानियों को बढ़ा सकता है। अपने विमान इंजनों के लिए भारत की GE एयरोस्पेस पर निर्भरता, मजबूती से इस तरफ इशारा करती है, कि भारत खुद कच्चे माल और इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित करे।
महत्वपूर्ण एयरोस्पेस घटकों के लिए बाहरी आपूर्तिकर्ताओं पर भारत की भारी निर्भरता, स्वदेशी क्षमताओं को विकसित करने की तत्काल आवश्यकता को उजागर करती है। स्थानीय उत्पादन को मजबूत करना और विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करना, भविष्य में आपूर्ति श्रृंखला समस्याओं को कम कर सकता है।
रक्षा मंत्रालय द्वारा HAL को दिए गए निर्देशों का मकसद मौजूदा चुनौतियों के बावजूद समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करना है। इस समयसीमा को पूरा करने के लिए रणनीतिक समायोजन और संभवतः पुराने इंजनों को नए एयरफ्रेम में लगाने की जरूरत होगी।












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