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अजूबा : 30 साल से जमे भ्रूण से पैदा हुए जुड़वा बच्‍चे, पैदा होते ही बना डाला यह विश्‍व रिकॉर्ड

अजूबा : 30 साल से जमे भ्रूण से पैदा हुए जुड़वा बच्‍चे, पैदा होते ही बना डाला यह विश्‍व रिकॉर्ड

Twins born from frozen embryos 30 years Ago:मे‍डिकल साइंस ने इतनी तरक्‍की कर ली है जिसके कारण अब कुछ भी असंभव नहीं रहा है। कई बार ऐसे मामले आते हैं जो किसी किसी चमत्‍कार से कम नहीं होते। ऐसा ही एक मामला इन दिनों सुर्खियों बटोर रहा है। एक दंपत्ति 30 साल पहले जमे हुए भ्रूण से पैदा हुए जुड़वा बच्‍चों के माता-पिता बने हैं। ये दंपत्ति दुनिया के सबसे पुराने बच्‍चों के माता पिता बने हैं।

पैदा होते ही बना डाला यह विश्‍व रिकॉर्ड

पैदा होते ही बना डाला यह विश्‍व रिकॉर्ड

ये मामला अमेरिका के ओरेगॉन का है जहां अप्रैल 1992 में जमे हुए भ्रूण (Embryos Frozen) से जुड़वा बच्‍चों का जन्‍म हुआ है। इन ओरेगन जुडवां बच्‍चों ने इससे पहले 2020 में 27 वर्षों से जमा हुए भ्रूण से पैदा हुए बच्‍चों का भी रिकार्ड तोड़ दिया है। इससे पहले ये रिकॉर्ड 2020 में पैदा हुए मौली गिब्सन के नाम था जिसका भ्रूण पूरे 27 सालों तक जमा था।

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    30 साल पुराने भ्रूण से पैदा हुए जुड़वा बच्चे और बना डाला ये विश्व रिकॉर्ड | वनइंडिया हिंदी
    जानें सबसे पुराने भ्रूण से पैदा हुए बच्‍चों का नाम और वजन

    जानें सबसे पुराने भ्रूण से पैदा हुए बच्‍चों का नाम और वजन

    सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार पिछले रिकॉर्ड को तोड़ते हुए ओरेगॉन में इन दो जुड़वा बच्‍चों का जन्म 31 अक्टूबर को राहेल रिडवे और फिलिप रिडवे के घर हुआ। नेशनल एम्ब्रियो डोनेशन सेंटर के अनुसार इन जुड़वा बच्‍चों में एक लड़का और एक लड़की है जिनका नाम लिडा और टिमोथी रिडवे रखा गया है। ये बच्चे सबसे लंबे समय तक जमे हुए भ्रूण हैं जिनसे जीवित जन्म होता है। बेबी गर्ल लिडिया का जन्म 5 पाउंड, 11 औंस, (2.5 किग्रा) में हुआ था वहीं बेबी बॉय टिमोथी का जन्म 6 पाउंड, 7 औंस (2.92 किग्रा) में हुआ था।

    जानें कैसे हुआ ये चमत्‍कार

    जानें कैसे हुआ ये चमत्‍कार

    ये जुड़वा बच्चे भ्रूण डोनेशन का परिणाम हैं। आमतौर पर उन माता-पिता से जिनके पास इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) के माध्यम से सफलतापूर्वक बच्चे पैदा करने के बाद अतिरिक्त भ्रूण होते हैं। तीस साल पहले एक गुमनाम दाता दंपति का ये भ्रूण है। जिन्होंने इन विट्रो फर्टिलाइजेशन का इस्तेमाल किया था और भ्रूण दान किया था, जो शून्य से 200 डिग्री नीचे क्रायोप्रिजर्व्ड किया गया था।

    लैब में पिजर्व करके रखे हुए थे

    लैब में पिजर्व करके रखे हुए थे

    22 अप्रैल 1992 को जमाए गए ये भ्रूण 2007 तक वेस्ट कोस्ट फर्टिलिटी लैब में पिजर्व करके रखे हुए थे। इसे दंपति ने राष्ट्रीय भ्रूण दान केंद्र (NEDC) को दान कर दिया। पंद्रह साल बाद, जमे हुए भ्रूणों से इन बच्‍चों का जन्‍म हुआ।

    जानिए इस दंपत्ति ने क्‍यों चुना ये भ्रूण

    जानिए इस दंपत्ति ने क्‍यों चुना ये भ्रूण

    गौरतलब है कि अमेरिका के रिडवे दंपत्ति जिनके इन जमे हुए भ्रूणों के कारण लिडिया और टिमोथी का जन्म हुआ उनके पहले से ही चार बच्‍चे हैं। जिनकी उम्र आठ, छह, तीन और दो साल है। रिडवे ने दान किए गए भ्रूणों का उपयोग करके और बच्चे पैदा करने का फैसला किया। ये जोड़ा जब अपने लिए भ्रूण की तलाश कर रहा था तब उन्‍होंने इस भ्रूण को विशेष विचार नाम की कैटेगरी में देखा इसका मतलब था ऐसा भ्रूण जिसके लिए प्राप्तकर्ता नहीं मिल रहे, यानी भ्रूण को लेने वालों का ढूढ़ना मुश्किल हो गया था।

    दुनिया के सबसे बड़े बच्‍चों के मां बाप बन गए

    रिडवे ने बताया हालांकि हम ऐसे भ्रूण लेने की नहीं सोच रहे थे जो लंबे समय से जमा हो। बस हमारे दिमाग था कि हम वो भ्रूण लेंगे जो इंतजार कर रहा है। लेकिन जब हमारी नजर इस पर पड़ी तो हमें ये खास लगा और हम इन प्‍यारे बच्‍चों की बदौलत दुनिया के सबसे बड़े बच्‍चों के मां बाप बन गए। भले ही उनका जन्‍म अभी हुआ है और वो नवजात हैं।

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