यूक्रेन युद्ध, रूस की सोच, शी जिनपिंग की हैरानी, CIA चीफ क्यों बोले, हार का जोखिम नहीं ले सकते पुतिन
सीआईए डायरेक्टर ने कहा कि, यूक्रेन में रूस का अनुभव शायद बीजिंग के आकलन को प्रभावित कर रहा है और यूक्रेन के प्रतिरोध ने चीन के लीडरशिप को हैरान कर दिया है।
वॉशिंगटन, मई 08: अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के निदेशक बिल बर्न्स ने कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का मानना है, कि वह यूक्रेन में हारने का जोखिम नहीं उठा सकते हैं, और इसी वजह से वो युद्ध को "दोगुना" कर रहे हैं, लेकिन सामरिक परमाणु हथियारों का उपयोग करने की योजना के संकेत नहीं दिखाते हैं। आपको बता दें कि, कल रूस द्वितीय विश्वयुद्ध में नात्सी जर्मनी पर जीत की याद में विजय दिवस मनाने वाला है और आशंका है, कि कल राष्ट्रपति पुतिन आधिकारिक तौर पर यूक्रेन के खिलाफ युद्ध का ऐलान कर सकते हैं।
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सीआईए डायरेक्टर ने क्या कहा?
सीआईए डायरेक्टर ने शनिवार को कहा कि, कीव पर कब्जा करने में रूसी सेना की नाकामयाबी और दक्षिण-पूर्वी डोनबास क्षेत्र में युद्ध की मुख्य मोर्चे पर आगे बढ़ने के उनके संघर्ष के बावजूद, पुतिन अब भी अपने पुराने विचार पर ही कायम हैं, कि उनके सैनिक यूक्रेन की सेना को हरा सकते हैं। एक कार्यक्रम के दौरान सीआईए डायरेक्टर ने कहा कि, कि यूक्रेन के प्रतिरोध को कम करने की रूस की क्षमता में पुतिन का विश्वास शायद महत्वपूर्ण युद्धक्षेत्र हार के बावजूद हिल नहीं पाया है। उन्होंने कहा कि, ‘मुझे लगता है कि वह दिमाग के एक फ्रेम में है जिसमें उन्हें विश्वास नहीं है, कि वह हार सकते हैं'।

‘यूक्रेन पर पुतिन की अलग सोच’
अमेरिकी खुफिया एजेंसी के प्रमुख ने कहा कि पुतिन यूक्रेन के बारे में वर्षों से "स्टूइंग" कर रहे हैं, जो कभी सोवियत संघ का हिस्सा था। इस मुद्दे पर रूसी नेता की सोच को "शिकायत और महत्वाकांक्षा और असुरक्षा को मिलाकर एक बहुत ही ज्वलनशील कॉकटेल" कॉकटेल का निर्माण करता है। बर्न्स ने कहा, ‘रूसी नेता युद्ध में यूक्रेन के सशस्त्र बलों द्वारा दिखाए गए कड़े प्रतिरोध से विचलित नहीं हुए हैं, क्योंकि उन्होंने इस आक्रमण को शुरू करने के पहले ही इन विकल्पों को लेकर काफी ज्यादा दांव लगा रखा है'। उन्होंने कहा कि, "मुझे लगता है कि वह अभी आश्वस्त है कि युद्ध की रफ्तार को दोगुना कर देने से उन्हें यूक्रेन में जीत हासिल हो जाएगी'।

परमाणु हथियार का होगा इस्तेमाल?
मौजूदा सीआईए डायरेक्टर बर्न्स रूस में अमेरिका के राजदूत रह चुके हैं और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ उन्होंने काफी काम किया है और वक्त बिताया है, लिहाजा विल बर्न्स का मानना है कि, रूस यूक्रेन में परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि, सीआईए और अन्य पश्चिमी खुफिया एजेंसियों को कोई संकेत नहीं दिखता है, कि मास्को यूक्रेन में जीत हासिल करने या कीव को निशाना बनाने के लिए सामरिक परमाणु हथियार तैनात करने के लिए तैयार है या परमाणु हथियार इस्तेमाल करने का समर्थक है'। आपको बता दें कि, 24 फरवरी को आक्रमण शुरू करने के तुरंत बाद रूस ने अपने परमाणु बलों को हाई अलर्ट पर रखा है। और राष्ट्रपति पुतिन और अन्य रूसी अधिकारियों ने रूस के सामरिक परमाणु हथियारों को तैनात करने की इच्छा पर इशारा करते हुए इस बात की भी चेतावनी दी है, कि अगर युद्ध में पश्चिमी देश हस्तक्षेप करता है, तो परमाणु युद्ध शुरू हो सकता है। वहीं, सीआईए डायरेक्टर ने कहा कि, "हम एक खुफिया समुदाय के रूप में, तैनाती या सामरिक परमाणु हथियारों के संभावित उपयोग के लिए रूसी योजना के इस बिंदु पर व्यावहारिक सबूत नहीं देखते हैं।"

क्या चीन 'अशांत' हो गया है?
सीआईए निदेशक ने कहा कि चीन, जिसे अब वाशिंगटन अपने प्राथमिक विरोधी के रूप में देखता है, यूक्रेन में युद्ध के सबकों का बारीकी से अध्ययन कर रहा है और ताइवान पर नियंत्रण करने की बीजिंग की इच्छा के लिए इसका क्या अर्थ हो सकता है? बर्न्स ने कहा कि, उन्हें विश्वास नहीं है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अंततः ताइवान को चीन के साथ एकजुट करने के अपने लक्ष्य को बदल दिया है, यदि आवश्यक हो तो बल प्रयोग के भी द्वारा। लेकिन उनका मानना है, कि रूसी सैन्य बलों के खराब प्रदर्शन के साथ-साथ पूरे यूक्रेनी समाज की तरफ से किए गये कड़े प्रतिरोध के साथ-साथ पश्चिम द्वारा कीव को प्रदान किए गए मजबूत सैन्य समर्थन से बीजिंग "सरप्राइज" हो गया है।

रूस की स्थिति से सीखा सबक?
सीआईए डायरेक्टर ने कहा कि, यूक्रेन में रूस का अनुभव शायद बीजिंग के आकलन को प्रभावित कर रहा है कि "कैसे और कब" वे ताइवान पर नियंत्रण हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं, जिसे चीन एक ‘पाखण्डी' प्रांत के रूप में देखता है। उन्होंने कहा कि, ‘मुझे लगता है कि वे रूस पर लगाए गये प्रतिबंधों से ‘प्रभावित' हुए हैं, और जिस तरह से विशेष रूप से ट्रान्साटलांटिक गठबंधन उस आक्रामकता के परिणामस्वरूप रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने के लिए एक साथ आ गए हैं, उससे वो हैरान भी हुए हैं।' बर्न्स ने कहा कि, ‘बीजिंग इस तथ्य से परेशान है कि पुतिन ने जो किया है. वह यूरोपीय और अमेरिकियों को एक साथ लाने के लिए है।" उन्होंने कहा, 'हालांकि, इससे क्या निष्कर्ष निकलता है, यह सवालिया निशान बना हुआ है?' उन्होंने कहा कि, ‘मेरा मानना है कि, चीन की लीडरशिप लगातार यूक्रेन की स्थितियों पर बारीक नजर बनाई हुई है और यूक्रेन युद्ध का क्या नतीजा निकलता है, उसके परिणाम क्या होते हैं, उसका बारीकि से अध्ययन कर रहे हैं।'
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