Eye Drop: भारत ने 'आर्टिफिशियल टीयर्स' के सैम्पल को बताया ‘स्टैंडर्ड’, अमेरिका ने लगाए थे कई गंभीर आरोप
अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने माना है कि उन्होंने दवाई के इस्तेमाल करने से पहले उस फैक्ट्री का दौरा नहीं किया था। हालांकि, मामला सामने आने के बाद फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने प्लांट का दौरा किया।

Image: Oneindia
यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि एक भारतीय दवा कंपनी के आई ड्रॉप से 3 की मौत हो गई और 8 लोगों की गई आंखों की रोशनी चली गई है। रिपोर्ट के मुताबिक आई सिंड्रोम के लिए इस्तेमाल होने वाली भारतीय दवा का नाम एज्रीकेयर है। इसका निर्माण चेन्नई स्थित ग्लोबल फार्मा हेल्थकेयर में होता है। यह आंखों में कृत्रिम आंसू लाने के लिए उपयोग में लाई जाती है। लेकिन इसके इस्तेमाल से आंखों में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इससे अंधापन और यहां तक की मौत तक का खतरा रहता है।
पहली बार दिखे ऐसे बैक्टिरिया
यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने कहा है कि दूषित आई ड्रॉप के इस्तेमाल से आंखों में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है जिसके परिणामस्वरूप अंधापन या मृत्यु हो सकती है। इतना ही नहीं दवा में पाए जाने वाले नए बैक्टिरिया स्ट्रेन के पहली बार अमेरिका में मिलने से अमेरिकी अधिकारियों की चिंता अलग बढ़ गई है। उनके मुताबिक इससे पहले आंखों को डैमेज करने वाले ये बैक्टीरिया यूएस में नहीं मिले थे, ये पहली बार दिखे हैं। भारत से आयातित आई ड्रॉप में मिला दवा प्रतिरोधी बैक्टीरिया अमेरिकी लोगों के लिए खतरा बन गया है।
जांच करने भारत आए थे अधिकारी
सीडीसी ने एक बयान जारी कर सिफारिश की है कि चिकित्सक और मरीज इस दवा का उपयोग करना बंद कर दें, क्योंकि इससे आंखों में संक्रमण हो सकता है। वहीं, चेन्नई के दक्षिणी शहर में स्थित ग्लोबल फार्मा हेल्थकेयर का कहना है कि आई ड्रॉप के शेष लॉट के लिए उसने स्वैच्छिक रिकॉल जारी कर दिया है। एफडीए के अधिकारी बीती 20 फरवरी को भारत के तमिलनाडु में स्थित कंपनी ग्लोबल फार्मा के प्लांट जांच के लिए आए थे। अमेरिकी अधिकारी 2 मार्च तक भारत में रहे और प्लांट की गड़बड़ियों की जांच करते रहे।
एफडीए ने रिपोर्ट में लगाए कई आरोप
अब एफडीए के अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट जारी की है, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि फार्मा कंपनी के प्लांट में इस्तेमाल होने वाली मशीनें और औजार गंदे थे। इसके साथ ही कर्मचारियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले कपड़े भी साफ नहीं थे। रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी के लिखित दस्तावेज भी सही नहीं थे और कर्मचारियों की ट्रेनिंग में भी कई दिनों का फासला रखा गया था। इस दौरान कंपनी के रिकॉर्ड में इस बात का भी जिक्र नहीं था कि कर्मचारियों के कपड़े कितनी बार इस्तेमाल किए जा सकते हैं। जिस जगह पर दवाईयों की पैकेजिंग की जा रही थी, उस जगह को भी तय मानकों के अनुसार साफ नहीं किया गया था और उस जगह को बैक्टीरिया सैनिटाइजेशन की ठीक व्यवस्था नहीं थी।
भारतीय कंपनी ने मंगवाई दवा
इससे पहले FDA ने दावा किया था कि चेन्नई स्थित ग्लोबल फार्मा कंपनी द्वारा बनाई जाने वाली एक आई ड्रॉप के इस्तेमाल से 55 लोगों को आंख में संक्रमण की समस्या हुई। इस आई ड्रॉप को अमेरिकी कंपनी डेलसम फार्मा और एज्रीकेयर द्वारा अपने ब्रांड नाम से बाजार में बेचा जा रहा था। अमेरिका में आंखों में सूखेपन और जलन से बचने के लिए इस आई ड्रॉप का इस्तेमाल किया जा रहा था। हालांकि विवाद के बाद कंपनी ने इस आई ड्रॉप को बाजार से वापस मंगा लिया था। कंपनी ने लोगों से इसका इस्तेमाल न करने की अपील की थी।
भारतीय रेगुलेटर ने किया इनकार
भारतीय दवा कंपनी पर लगे आरोपों के बाद तमिलनाडु की ड्रग रेगुलेटर ने कहा है कि उसे चेन्नई स्थित ग्लोबल फार्मा द्वारा निर्मित आई ड्रॉप के नमूनों में "कोई प्रदूषण" नहीं मिला है। ड्रग रेगुलेटर की निदेशक पीवी विजयलक्ष्मी ने कहा कि उन्होंने कई बैचों के नमूनों का विश्लेषण किया है। उन्हें कहीं भी गड़बड़ी नजर नहीं आई। विजयलक्ष्मी ने आईड्रॉप्स पर अमेरिकी निगरानीकर्ता की टिप्पणी पर कोई बयान देने से इनकार कर दिया।












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