UNSC में यूक्रेन युद्ध पर नहीं निकला नतीजा, रूस ने किया वीटो इस्तेमाल, भारत ने दिखाई समझदारी?
यूनाइटेड नेशंस में रूस ने कहा कि, उसका मकसद यूक्रेन पर कब्जा करना नहीं है और ना ही वो यूक्रेन के लोगों के खलाफ युद्ध कर रहा है और उसके निशाने पर यूक्रेन के लोग भी नहीं हैं।
मॉस्को/कीव/न्यूयॉर्क/नई दिल्ली, फरवरी 26: यूक्रेन युद्ध रोकने में यूनाइटेड नेशंस पूरी तरह से असहाय नजर आया और रूस के वीटो करने के बाद उसके खिलाफ लाया गया निंदा प्रस्ताव गिर गया। वोटिंग के दौरान भारत, चीन, और संयुक्त अरब अमीरात वोटिंग में शामिल नहीं हुआ, जबकि, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, नॉर्वे, आयरलैंड, अल्बानिया, गबोन, मैक्सिको, ब्राजील ने रूस के खिलाफ वोट डाला।

यूनाइटेड नेशंस में क्या-क्या हुआ?
संयुक्त राष्ट्र में यूक्रेन युद्ध का विरोध करने और रूस की निंदा करने के लिए अमेरिका की तरफ से निंदा प्रस्ताव लाया गया था, जिसमें प्रस्ताव के पक्ष में 11 सदस्य देशों ने वोट डाला था, जो रूस के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने के लिए काफी था। लेकिन, रूस ने वीटो का इस्तेमाल करते हुए इसे रोक दिया। वोटिंग के दौरान भारत, चीन और संयुक्त अरब अमीरात अनुपस्थित रहा।

यूएनएससी में रूस बनाम अमेरिका
यूनाइटेड नेशंस में रूस ने कहा कि, उसका मकसद यूक्रेन पर कब्जा करना नहीं है और ना ही वो यूक्रेन के लोगों के खलाफ युद्ध कर रहा है और उसके निशाने पर यूक्रेन के लोग भी नहीं हैं। लेकिन, रूस ये लड़ाई, डोनबास क्षेत्र के लोगों को बचाने के लिए उठा रहा है। जबकि, यूएनएससी में संयुक्त राज्य अमेरिका की स्थाई दूत लिंडा थॉमस ग्रीनफील्ट ने रूस की हरकत को बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ हमला करार दिया है। वहीं, यूएनएससी में अमेरिका की तरफ से कहा गया है कि, रूस अपने वीटो करने की ताकत का गलत इस्तेमाल कर रहा है। यूएनएससी में बैठक के दौरान अमेरिका के साथ साथ फ्रांस, ब्रिटेन ने भी रूस के खिलाफ वोट डाला था, जबकि वीटो पॉवर वाला एक और देश चीन, वोटिंग के दौरान गैर-हाजिर हो गया।
भारत ने दिखाई समझदारी?
यूक्रेन युद्ध पर भारत किसके साथ होगा, अमेरिका के साथ या फिर रूस के साथ.... इसको लेकर पूरी दुनिया की नजर यूएनएसी पर लगी हुई थी, जहां एक्सपर्ट्स का कहना है कि, भारत ने काफी समझदारी भरा कदम उठाया है। भारत के लिए एक तरफ रणनीतिक दोस्त अमेरिका था, तो दूसरी तरफ पक्का दोस्त रूस। लिहाजा, भारत ने यूएनएससी में यूक्रेन पर रूसी हमले की निंदा तो की है, लेकिन भारत ने ना तो प्रस्ताव के पक्ष में वोट डाला और ना ही भारत ने प्रस्ताव के खिलाफ ही वोट डाला। भारत ने यूएनएससी में वोटिंग से गैर-हाजिर रहा। भारत की तरफ से यूएनएससी में स्थाई प्रतिनिधि टीएस. तिरूमूर्ति ने कहा कि, ''यूएनएससी के सभी देशों को रचनात्मक तरीके से आगे बढ़ने के लिए यूएनएससी के सिद्धांतों की सम्मान करने की जरूरत है। बातचीत के जरिए ही आपसी मतभेदों और विवादों का सुलझाया जा सकता है, हालांकि, इस वक्त ये कठिन लग सकता है।'' भारत ने कहा कि, ''हालांकि, ये खेद की बात है कि, डिप्लोमेसी का रास्ता छोड़ दिया गया, लेकिन हमें उसी रास्ते पर लौटना होगा। और इन सब कारणों की वजह से भारत ने इस प्रस्ताव पर परहेज करने का विकल्प चुनने का फैसला किया है''।

कौन पक्ष में कौन खिलाफ ?
यूनाइटेड नेशंस में भारत के साथ साथ चीन और संयुक्त अरब अमीरात भी वोटिंग से गैर- हाजिर रहा, जबकि रूस ने अपने खिलाफ लाए गये प्रस्ताव को वीटो कर गिरा दिया। यूएनएससी में रूस के स्थाई दूत ने अमेरिका के द्वारा लाए गये इस निंदा प्रस्ताव को 'रूस विरोधी' करार दिया। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, नॉर्वे, आयरलैंड, अल्बानिया, गबोन, मैक्सिको, ब्राजील ने रूस के खिलाफ वोट डाला।












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