‘चेर्नोबिल से 10 गुना ज्यादा भयानक तबाही मचेगी’, रूसी हमले में लगी जेपोरिजिया न्यूक्लियर पावर प्लांट में आग
पिछले हफ्ते, रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव से लगभग 100 किलोमीटर (62 मील) उत्तर में चेर्नोबिल न्यूक्लियर पावर प्लांट पर कब्जा कर लिया था।
कीव/मॉस्को, मार्च 04: रूस और यूक्रेन के बीच भीषण जंग जारी है और रूसी सैनिक लगातार यूक्रेन में तबाही मचा रहे हैं। खासकर रूसी सैनिकों के निशाने पर यूक्रेन के सैन्य ठिकाने हैं और रूस ने ये भी साफ कर दिया है, कि वो किसी भी हाल में यूक्रेन को न्यूक्लियर हथियार भी नहीं बनाने देगा और इसीलिए रूस ने यूक्रेन में स्थिति यूरोप के सबसे बड़े न्यूक्लियर प्लांट पर भीषण हमला किया है और हमले को लेकर यूक्रेन के मंत्री ने आशंका जताई है कि, येर्नोबिल परमाणु संयंत्र पर हुए हमले के मुकाबले 10 गुना ज्यादा तबाही मच सकती है।
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जेपोरिजिया न्यूक्लियर पावर प्लांट पर हमला
जेपोरिजिया न्यूक्लियर पावर प्लांट पर भीषण हमले के बाद यूक्रेन के मंत्री दिमित्रो कुलेबा ने बहुत बड़ी आशंका जताते हुए बड़ी चेतावनी जारी की है। उन्होंने न्यूक्लियर पावर प्लांट पर रूसी हमले को लेकर आशंका जताते हुए कहा कि, "रूसी सेना यूरोप के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र, जेपोरिजिया एनपीपी पर हर तरफ से गोलीबारी कर रही है। आग पहले ही भड़क चुकी है। अगर इस प्लांट में विस्फोट होता है, तो यह चर्नोबिल से 10 गुना बड़ा विस्फोट होगा।‘' उन्होंने कहा कि, ‘'रूसियों को फौरन हमला बंद करना चाहिए और रूसी सेना को फौरन अग्निशामकों को मौके पर जाने और आग बुझाने की इजाजत देनी चाहिए और पूरे क्षेत्र में एक सुरक्षा व्यवस्था स्थापित करनी चाहिए''।
पावर प्लांट को भारी नुकसान
रिपोर्ट के मुताबिक, रूसी सैनिकों के हमले में जेपोरिजिया न्यूक्लियर पावर प्लांट में आग लग गई है। वहीं, पड़ोसी शहर एनरगोडार के मेयर ने कहा है कि, पावर प्लांट को काफी नुकसान पहुंचा है। वहीं, यूक्रेनी अधिकारियों ने बताया कि, रूसी सैनिक संयंत्र को जब्त करने के प्रयास तेज कर रहे थे और टैंकों के साथ शहर में प्रवेश कर गए थे। वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की के कार्यालय के प्रमुख सलाहकार मिखाइल पोडोलीक ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें 'न्यूक्लियर पावर प्लांट में रूसी हमले के बाद लगी आग को दिखाया गया है। 1 मिनट, 27 सेकंड लंबे वीडियो में, 'रूसी गोलाबारी' देखी जा सकती है और गोलाबारी के बाद मौके पर रूसी सैनिकों को उतरते हुए देखा जा सकता है। उन्होंने लिखा है कि, "पूरे यूरोप में परमाणु तबाही की पुनरावृत्ति का खतरा है। रूसियों को आग बुझानी चाहिए!''
फिलहाल सुरक्षित है पावर प्लांट
वहीं, इंटरनेशनल एटॉमिक एजेंसी ने यूक्रेनियन रेग्यूलेटर्स के हवाले से कहा है कि, फिलहाल न्यूक्लियर प्लांट से विकिरण शुरू नहीं हुआ है और हवा में विकिरण फैलने के कोई संकेत नहीं मिले हैं। आपको बता दें कि, यूक्रेन के परमाणु संयंत्र संचालक, Energoatom ने 25 फरवरी को संयंत्र के छह रिएक्टरों में से दो को बंद कर दिया था। Energoatom ने 4 मार्च को एक आधिकारिक बयान जारी किया है, जिसमें कहा गया कि, सिर्फ चार रिएक्टर ही चालू हैं।

पिछले हफ्ते चेर्नोबिल पर कब्जा
पिछले हफ्ते, रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव से लगभग 100 किलोमीटर (62 मील) उत्तर में चेर्नोबिल न्यूक्लियर पावर प्लांट पर कब्जा कर लिया था। आपको बता दें कि, चेर्नोबिल परमाणु संयंत्र हादसा दुनिया के सबसे बड़े हादसों में शुमार है, जिसमें करीब सवा लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। यूक्रेन की राजधानी कीव के उत्तर में 108 किमी (67 मील) की दूरी पर स्थित चेर्नोबिल नाभिकीय ऊर्जा संयंत्र में 1986 में एक बड़ा हादसा हुआ था जब इसके चौथे रिएक्टर में एक असफल सुरक्षा परीक्षण के दौरान विस्फोट हो गया। इसाक विकिरण (रेडिएशन) के बाद पूर्वी यूरोप और सुदूर स्थित संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्वी हिस्से तक पहुंचे थे।

हादसे के बाद भीषण तबाही
न्यूक्लियर प्लांट में हुए हादसे के बाद प्लांट से रेडियोएक्टिव स्ट्रोटियम, सीजियम और प्लूटोनियम ने यूक्रेन, बेलारूस और रूस समेत यूरोप के कई हिस्सों को बुरी तरह से प्रभावित किया। चेर्नोबिल हादसे इतना तेज था कि सैकड़ों कर्मचारी फौरन मर गए थे जबकि सैकड़ों बुरी तरह झुलस गए थे। जबकि इसेक विकिरण से 93,000 हजार लोग कैंसर के शिकार हुए थे। शुरुआत में तत्कालीन सोवियत संघ ने इस हादसे की जानकारी पूरी तरह से छिपाने की कोशिश की थी। सभी तरह की मीडिया रिपोर्टिंग पर रोक लगा दी गई थी। लेकिन, स्वीडन ने एक सरकारी रिपोर्ट में इस हादसे को लेकर जानकारी दी थी, जिसके बाद सोवियत सरकार ने भी इसे स्वीकार किया और फिर ये हादसा पूरी दुनिया के सामने आ गया था। हादसे के छह महीने के भीतर एक मेक-शिफ्ट कवर या "सरकोफैगस" बनाया गया था ताकि दुर्घटनाग्रस्त रिएक्टर को कवर किया जा सके और रेडिएशन से पर्यावरण को बचाया जा सके। नवंबर 2016 में,एक तथाकथित "नई सुरक्षित कवर" को पुराने सरकोफैगस के ऊपर ले जाया गया था।












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