Ukraine Crisis: युद्ध के 14वें दिन पलटा पासा, जेलेंस्की खुश! रूस के खिलाफ चक्रव्यूह, फंसे पुतिन?
रूस यूक्रेन के बीच चल रही लड़ाई अब 14वें दिन में प्रवेश कर चुकी है, लेकिन युद्ध का फैसला अभी तक नहीं हो पाया है और अब जो स्थिति बनती जा रही है, उसमें अब किसी की भी जीत दिखाई नजर नहीं आ रही है।
कीव/मॉस्को, मार्च 09: रूस यूक्रेन के बीच चल रही लड़ाई अब 14वें दिन में प्रवेश कर चुकी है, लेकिन युद्ध का फैसला अभी तक नहीं हो पाया है और अब जो स्थिति बनती जा रही है, उसमें अब किसी की भी जीत दिखाई नजर नहीं आ रही है। ऐसा इसलिए, क्योंकि रूस के लिए बगैर यूक्रेन फतह किए वापस लौटना असंभव सा बन गया है, तो यूक्रेन को अब इतनी मदद मिल रही है, कि वो अपने हथियार डालने के लिए तैयार नहीं है। वहीं, अमेरिका और यूरोपीय देशों ने मिलकर रूस के खिलाफ ऐसा फंदा कसा है, जिसमें रूसी की अर्थव्यवस्था का दम घुटना तय माना जा रहा है।
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अमेरिका की चाल में नहीं फंसा पोलैंड
अमेरिका लगातार पोलैंड पर अपने मिग-29 फाइटर जेट्स को यूक्रेन युद्ध में भेजने के लिए प्रेशर बना रहा था और अमेरिका इसके बदले अपने एफ-22 विमान भी पोलैंड को सौंपने के लिए तैयार हो गया था, लेकिन रूसी धमकी के बाद डरे पोलैंड ने अपने पैर वापस खींच लिए। लेकिन, जब अमेरिका का प्रेशर काफी बढ़ गया, फिर पोलैंड ने अमेरिका को प्रस्ताव देते हुए कहा, कि वो अपने सभी मिग-29 विमान सीधे यूक्रेन को नहीं देकर अमेरिका के हवाले कर रहा है और अमेरिका उसे यूक्रेन को दे दे। लेकिन, अमेरिका ने यूक्रेन के इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। पोलैंड के विदेश मंत्री, ज़बिग्न्यू राउ ने कहा कि उनकी सरकार "तत्काल और नि: शुल्क' अपने सभी मिग -29 जेट्स को रामस्टीन हवाई अड्डे पर तैनात करने और उन्हें संयुक्त राज्य अमेरिका की सरकार के हवाले करने के लिए तैयार है।‘ लेकिन, अमेरिका ने कहा कि, उसके पास खुफिया इनपुट है, कि अगर विमानों को हवाई अड्डे पर लाया गया, तो रूस उनपर हमला कर सकता है। लिहाजा, मिग-29 विमानों को यूक्रेन भेजने का प्लान फिलहाल फेल हो गया है।
अब तक 474 आम नागरिक मरे
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय का कहना है कि यूक्रेन में रूसी आक्रमण शुरू होने के बाद से अब तक कम से कम 474 नागरिक मारे गए हैं। वहीं, 861 लोग अभी तक घायल हुए हैं। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि, वास्तविक आंकड़े इससे काफी ज्यादा हो सकते हैं, क्योंकि अभी तक वोल्नोवाखा, मारियुपोल और इज़ियम शहरों से सैकड़ों हताहतों की रिपोर्ट की पुष्टि की जानी बाकी है। यूएन रिपोर्ट में कहा गया है कि, "अधिकांश नागरिक हताहतों की संख्या व्यापक प्रभाव क्षेत्रों में विस्फोटक हथियारों के उपयोग के कारण हुई हैं। जिसमें भारी तोपखाने और मल्टी-लॉन्च रॉकेट सिस्टम, मिसाइल हमले और हवाई हमलों से गोलाबारी शामिल है।"

यूक्रेन के 61 अस्पताल हुए ध्वस्त
यूक्रेन के स्वास्थ्य मंत्री विक्टर लिआशको ने एक स्थानीय टेलीविजन चैनल को बताया कि, रूसी सेना ने यूक्रेन के 61 अस्पतालों पर हमला कर उन्हें बर्बाद कर दिया है। समाचार आउटलेट उक्रेइंस्का प्रावदा के अनुसार अस्पतालों पर हमले में खिड़कियों, दीवारों और चिकित्सा उपकरणों को भारी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि, "आक्रामक देश के आतंकवादियों ने हमारे 61 अस्पतालों को नष्ट कर दिया। लेकिन विभिन्न सेवाओं अभी भी किसी तरह से सक्रिय हैं और कई अस्पतालों का संचालन अभी भी जारी है"।

अमेरिका ने रूसी तेल आयात पर लगाया बैन
रूस की अर्थव्यवस्था को झटका देने के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने मंगलवार को रूस पर कई प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है। अपने बयान में बाइडेन ने कहा कि हम रूस के गैस, तेल और ऊर्जा के सभी आयातों पर प्रतिबंध लगा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि हम इस प्रतिबंध के साथ आगे बढ़ रहे हैं, यह समझते हुए कि हमारे कई यूरोपीय सहयोगी और भागीदार हमारे साथ शामिल होने की स्थिति में नहीं हो सकते हैं। रूस पर आर्थिक प्रतिबंधों को लेकर जो बाइडेन ने आगे कहा कि हम इतिहास में आर्थिक प्रतिबंधों के सबसे अहम पैकेज को लागू कर रहे हैं, और यह रूस की अर्थव्यवस्था को तगड़ा नुकसान पहुंचा रहा है। इसी के साथ बाइडेन ने कहा कि यूक्रेन के हमले के बाद रूस के खिलाफ जैसा एक्शन अमेरिका ने लिया है, वैसा कोई भी दूसरा देश नहीं ले सकता। बाइडेन के मुताबिक रूस में कई कंपनियों ने अपने बिजनेस समेट लिया है। वहीं कई ऑयल कंपनियां भी बंद हो चुकी हैं।

रूस की रेटिंग और गिरी
तमाम कड़े आर्थिक प्रतिबंधों के बाद रूस की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचा है और रेटिंग एजेंसी फिच ने फिर से रूस की ‘संप्रभु कर्ज रेटिंग' को ‘बी' से गिराकर ‘सी' कर दिया है। रेटिंग एजेंसी फिच ने कहा है कि, यह दिखाता है कि, सरकार की कर्ज चुकाने की क्षमता कम हो गई है और सरकार पर डिफॉल्टर होने का खतरा है। वहीं, फिच ने कहा है कि, हाल के घटनाक्रमों के बाद पता चलता है कि, ‘सरकारी कर्ज को चुकाने की रूस की इच्छा कम हो गई है।'

अमेरिका से अब खुश हुए जेलेंस्की
यूक्रेन के राष्ट्रपति अभी तक अमेरिका और नाटो देशों पर पूरी तरह से मदद नहीं करने का आरोप लगा रहे थे, लेकिन अब वो अमेरिका के नये प्रतिबंधों से खुश हो गये हैं। जेलेंस्की ने एक दिन पहले भी कहा था कि, ‘अमेरिका को जितना करना चाहिए, उतना नहीं किया गया है।' लेकिन, जब अमेरिका ने रूस के ऊर्जा स्रोतों पर प्रतिबंध लगाया, तो फिर जेलेंस्की खुश हो गये हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति ने रूसी तेल पर प्रतिबंध लगाने के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन को धन्यवाद दिया है और उन्होंने अमेरिका के इस फैसले को "पूरी दुनिया के लिए एक शक्तिशाली संकेत" बताया है। यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कहा कि, ‘रूस को दिया गया हर पैसा गोलियों में बदल जाता है, और दूसरे संप्रभु राज्यों के लिए खतरा बन जाते हैं।' जेलेंस्की ने कहा कि, "या तो रूस अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करेगा और युद्ध नहीं करेगा, या उसके पास युद्ध शुरू करने के लिए पैसे नहीं होंगे।"

रूस के खिलाफ अमेरिका का ‘चक्रव्यूह’
एक्सपर्ट्स का कहना है कि, यूक्रेन युद्ध ने अमेरिका को रूस की अर्थव्यवस्था की कमर पूरी तरह से तोड़ देने का एक परफेक्ट बहाना दे दिया है और अब अमेरिका उसका पूरा फायदा उठा रहा है। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी का कहना है कि, रूस के यूक्रेन पर आक्रमण के कारण रुकी हुई विवादास्पद नॉर्ड स्ट्रीम 2 पाइपलाइन "अब मर चुकी है"। राजनीतिक मामलों की राज्य उप विदेश मंत्री विक्टोरिया नुलैंड ने अमेरिकी विधायकों से कहा, "यह समुद्र के तल पर धातु का एक टुकड़ा है और मुझे नहीं लगता कि इसे कभी पुनर्जीवित किया जाएगा।" आपको बता दें कि, नॉर्ड स्ट्रीम 2 पाइपलाइन रूस और जर्मनी के बीच का सौदा था, जिससे अमेरिका कभी खुश नहीं था। इस पाइपलाइन के बनने के बाद पूरे यूरोप में ऊर्जा सप्लाई पर रूस का अधिकार हो जाता और अमेरिका लगातार जर्मनी पर इसे रद्द करने के लिए प्रेशर बना रहा था और अब जाकर यूक्रेन युद्घ का बहाना बनाकर जर्मनी ने इसे रद्द कर दिया है, जो रूस के लिए बहुत बड़ा झटका है।

रूस जरूर हारेगा- अमेरिका
अमेरिकी कांग्रेस में बोल रहे अमेरिकी वेता नूलैंड ने कहा कि, यूक्रेन युद्ध में रूस का हारना अब तय हो गया है। विदेश विभाग के अवर सचिव ने कहा कि, "यह स्पष्ट है कि रूस इस संघर्ष में हार जाएगा- चाहे वे इसे जल्दी हार जाएं या फिर वो धीरे-धीरे हारें, लेकिन अब यह सिर्फ समय की बात है।" उन्होंने कहा कि, "समस्या यह है कि अगर रूस जल्दी हार जाता है, तो फिर कई लोगों की जान नहीं जाएगी, और यही वजह है कि हमें आर्थिक दबाव डालना जारी रखना होगा, हमें यूक्रेन के लोगों की रक्षात्मक जरूरतों का समर्थन करना जारी रखना होगा।"

बर्बाद होकर बदले जेलेंस्की के सुर?
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि मैं यूक्रेन को नाटो का सदस्य बनाने की कोशिश नहीं कर रहे हैं। जेलेंस्की ने कहा कि, रूस ने यूक्रेन से जिन दो हिस्सों को अलग करके उन्हें अलग देश देश घोषित किया है उसपर भी वह व्लादिमीर पुतिन के साथ समझौता करने के लिए तैयार हैं, जिन्हें रूस ने स्वतंत्र देश घोषित करने के बाद 24 फरवरी को यूक्रेन पर हमला बोल दिया था। जेलेंस्की ने कहा कि मैंने बहुत समय पहले ही इस प्रस्ताव को पीछे छोड़ दिया था, जब मैं यह समझ गया था कि नाटो यूक्रेन को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। नाटो को डर है कि इससे काफी विवाद होगा और रूस से टकराव की स्थिति पैदा होगी। नाटो की सदस्यता का जिक्र करते हुए जेलेंस्की ने कहा कि मैं ऐसे देश का राष्ट्रपति नहीं बनना चाहता हूं जो किसी चीज की भीख मांग रहा हो।












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