Ukraine crisis: युद्ध में भड़भड़ाकर बिखड़ रही है रूसी सेना, अचानक गिर सकती है पुतिन की सरकार- दावा
फ्रांसिस फुकुयामा एक मशहूर लेखक और वैज्ञानिक हैं, जिन्होंने 1992 के "द एंड ऑफ हिस्ट्री एंड द लास्ट मैन" किताब के लिए पूरी दुनिया में सुर्खियां बटोरी थीं।
कीव/मॉस्को, मार्च 16: यूक्रेन युद्ध के 20 दिन बीत चुके हैं और युद्ध के 21वें दिन भी जंग में लोग मारे जा रहे हैं। लेकिन, 21 दिनों के बाद भी रूसी सेना का यूक्रेनी राजधानी कीव तक नहीं पहुंच पाना दिखाता है, कि रूस कहीं ना कहीं बैकफुट पर जरूर है। वहीं, मशहूर विज्ञान लेखक और राजनीतिक वैज्ञानिक फ्रांसिस फुकुयामा ने कहा कि, रूसी सेना अब यूक्रेन में "एकमुश्त हार" की संभावना की तरफ बढ़ रही है।

वैज्ञानिक फ्रांसिस का यूक्रेन युद्ध पर दावा
वैज्ञानिक फ्रांसिस फुकुयामा ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को चेतावनी देते हुए कहा है कि, यूक्रेन युद्ध में सिर्फ रूस की सेना का ‘अंत' अचानक हो सकता है, बल्कि जिस तरह से यूक्रेन युद्ध आगे बढ़ रहा है, उसमें रूसी राष्ट्रपति की सत्ता भी डूब सकती है। फुकुयामा ने अमेरिकन पर्पस वेबसाइट के लिए एक लेख लिखा है, जिसमें उन्होंने यूक्रेन युद्ध को लेकर अपने विचार व्यक्त किए हैं। उन्होंने लिखा है कि, "उनकी (पुतिन) स्थिति का पतन अचानक और विनाशकारी हो सकता है, न कि धीरे-धीरे युद्ध के कारण होने वाले युद्ध के माध्यम से।" उन्होंने आगे लिखा है कि, ‘'युद्ध के मैदान में स्थिति धीरे धीरे उस बिंदू तक पहुंच जाएगी, जहां रूसी सेना के लिए ना तो जरूरी सामानों की आपूर्ति हो सकती है और नाही रूसी सेना के लिए वापसी का रास्ता बचेगा और इस स्थिति में रूस की सेना का मनोबल पूरी तरह से टूट सकता है''।

मशहूर लेखक और वैज्ञानिक हैं फ्रांसिस फुकुयामा
फ्रांसिस फुकुयामा एक मशहूर लेखक और वैज्ञानिक हैं, जिन्होंने 1992 के "द एंड ऑफ हिस्ट्री एंड द लास्ट मैन" किताब के लिए पूरी दुनिया में सुर्खियां बटोरी थीं। उन्होंने यूक्रेन पर हमला करने के पीछे मॉस्को की अक्षमता को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि, रूस ने अनुमान नहीं लगाया था, कि यूक्रेन में उनकी सेना का इस तरह से ‘स्वागत' किया जाएगा। उन्होंने कहा कि, ‘'रूस के सैनिक कीव की तरफ बढ़ तो रहे थे, लेकिन उनके पास गोला बारूद और राशन कम था, लेकिन, उनके पास विजय परेड का ड्रेस था। जिससे जाहिर होता है, कि वो खुद को ‘विजेता' मानकर निकले हैं और उनका प्रतिरोध नहीं किया जा सकता है। लेकिन, अब, रूस के सैनिक शहरों के बाहर फंस गए हैं और ना उनके पास खाद्य सामानों की आपूर्ति हो रही है और दूसरी तरफ से यूक्रेन की सेना लगातार हमले कर रही है।
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...फिर पुतिन के शासन का भी होगा अंत
फ्रांसिस फुकुयामा ने अपने लेख में लिखा है कि, अगर वे हार जाते हैं, तो फिर पुतिन के पिछले 20 सालों से चले आ रहे शासन का भी अंत हो जाएगा। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर फ्रांसिस फुकुयामा ने लिखा कि, "रूसी सैनिक स्पष्ट रूप से अतिरिक्त बारूद और राशन के बजाय कीव में अपनी विजय परेड के लिए ड्रेस लेकर निकले थे।" फुकुयामा ने लिखा कि, "पुतिन अपनी सेना की हार से नहीं बचेंगे। उन्हें समर्थन मिलता है क्योंकि उन्हें एक मजबूत व्यक्ति माना जाता है, लेकिन एक बार जब वह अक्षमता प्रदर्शित करते हैं, तो फिर उनकी कुर्सी जबरदस्ती छीन ली जाएगी''

बाइडेन ने लिया सही फैसला
फ्रांसिस फुकुयामा ने कहा कि, यूक्रेन में अमेरिकी सेना नहीं भेजने और यूक्रेन के आकाश को ‘नो फ्लाई जोन' घोषित नहीं करने का रूसी राष्ट्रपति का फैसला सही फैसला है, क्योंकि भावुक होकर आप युद्ध में फैसले नहीं कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि, यह बेहतर है कि यूक्रेनियन रूसियों को अपने दम पर हरा दें और मास्को को बहाना नहीं बनाने दे, कि नाटो ने उनके ऊपर हमला किया था। उन्होंने कहा कि, यूक्रेन को हथियार देना और खुफिया जानकारी देना और सुरक्षा जानकारियां पहुंचाना काफी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि, ‘मुझे लगता है कि, यूक्रेन के बाहर से सक्रिय नाटो खुफिया एजेंसी यूक्रेन की सेना की जरूर मदद कर रही होगी'

‘यूक्रेन की और मदद कर सकता है नाटो’
वहीं, नाटो में अमेरिका के पूर्व राजदूत कर्ट वोल्कर का कहना है कि, पश्चिमी सुरक्षा गठबंधन यूक्रेन की मदद के लिए बहुत कुछ कर सकता है, भले ही वह नो-फ्लाई ज़ोन लागू न करे। उन्होंने कहा कि, "अतिरिक्त वायु रक्षा प्रणालियां हैं जिनकी यूक्रेनियन को आवश्यकता है, अधिक स्टिंगर्स की जरूरत है। उन्हें कुछ रूसी जहाजों का मुकाबला करने और उन्हें मार गिराने के लिए मिसाइलो जहाजों की जरूरत है, जो कि काला सागर में हैं, जहां से रूसी सेना यूक्रेनी शहरों में क्रूज मिसाइलों से फायरिंग कर रहे हैं''।












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