यूके का ईयू से 'एग्जिट' और भारत की एनएसजी में 'एंट्री, दुनिया देखेगी नया इतिहास!

लंदन/नई दिल्ली। इस समय दुनिया के दो अलग-अलग हिस्सों में दो अलग-अलग तरह के घटनाक्रम हो रहे हैं। ये दोनों ही घटनाक्रम दुनिया के इतिहास के लिए काफी अहम साबित हो सकते हैं। कितनी दिलचस्प बात है कि जहां एक ओर भारत लगातार एनएसजी में एंट्री की कोशिशों में लगा हुआ है तो वहीं दूसरे छोर पर यूरोपियन यूनियन से ब्रिटेन का पत्ता साफ करने की कोशिशें जारी हैं। ब्रिटेन में 23 जून को इस एतिहासिक फैसले के लिए जनमत संग्रह हो रहा है।

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भारत को मिली डिप्लोमैटिक सफलता

भारत डिप्लोमैटिक स्तर पर कई कोशिशों को अंजाम देने में लगा हुआ है। जहां पीएम मोदी खुद इस समय ताशकंद में मौजूद हैं तो वहीं विदेश सचिव एस जयशंकर को सियोल में भारत की एंट्री के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं।

भारत के समर्थन में अमेरिका समेत कई देशों ने आवाज उठाई है। जापान इस कड़ी में नया नाम है जिसने एनएसजी के लिए भारत का समर्थन किया है।

भारत के लिए होंगे सकारात्मक बदलाव

अगर ब्रेग्जिट पर फैसला यूके के खिलाफ जाता है तो फिर यूके यूरोपियन यूनियन से बाहर हो जाएगा। वहीं अगर भारत के प्रयास रंग लाते हैं तो फिर एनएसजी के दरवाजे खुलेंगे और भारत को शक्ति का एक अलग ही दर्जा हासिल होगा।

साफ है जहां ब्रेग्जिट यूके के लिए अकेलापन लेकर आएगा तो वहीं एनएसजी भारत के लिए एक सकारात्मक बदलाव लेकर आने वाला है।

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