UK Riots 2024: यूके में मुस्लिमों के खिलाफ क्यों भड़का दंगा? 13 सालों में हुई सबसे बड़ी हिंसा की इनसाइड स्टोरी
UK Riots 2024: इंग्लैंड में 13 साल में सबसे भयंकर दंगे हुए हैं, जब साउथपोर्ट में तीन लड़कियों की चाकू घोंपकर हत्या करने के बाद एंटी-इमिग्रेशन विरोध प्रदर्शन शुरू हो गये। ऐसी रिपोर्ट है, कि लड़कियों की हत्या को लेकर अफवाह फैली, कि अवैध अप्रवासी मुस्लिमों ने उनकी हत्या की है, जिसके बाद दंगे शुरू हो गये।
ब्रिटेन, जहां पर पहले से ही अवैध अप्रवासन को लेकर लोगों में गुस्सा रहता है, उस आग में लड़कियों की हत्या ने पेट्रोल डालने का काम किया रॉदरहैम और मैनचेस्टर सहित कई शहरों और कस्बों में मुस्लिमों के खिलाफ हिंसा फैल गई।

UK Riots 2024: हिंसा क्यों भड़की?
हिंसा तब शुरू हुई, जब नकाबपोश अप्रवास विरोधी प्रदर्शनकारियों ने रॉदरहैम में शरणार्थियों के लिए बने एक होटल पर हमला कर दिया। लिवरपूल, मैनचेस्टर और ब्रिस्टल में भी दक्षिणपंथी रैलियों में झड़पें हुईं। दंगाइयों ने पुलिस के साथ झड़प की, ईंटें और बोतलें फेंकी और दुकानों को लूट लिया।
पुलिस फेडरेशन ऑफ इंग्लैंड एंड वेल्स की टिफनी लिंच ने कहा, "अब हम देख रहे हैं कि यह (परेशानी) प्रमुख शहरों और कस्बों में फैल रही है।"
यूके की नई लेबर पार्टी की कीर स्टार्मर की सरकार ने आश्वासन दिया है, कि पुलिस के पास अशांति से निपटने के लिए "सभी आवश्यक संसाधन" हैं और हिंसा को रोकने के लिए हजारों अतिरिक्त अधिकारियों को तैनात किया गया है।
ब्रिटिश मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लड़कियों की हत्या और हत्या की कोशिश के आरोप 17 साल के एक लड़के एक्सेल रुदाकुबाना पर लगा है, जिसके बैकग्राउंड को खंगाला जा रहा है। कहा जा रहा है, कि एक्सेल रुदाकुबाना को लेकर झूठी अफवाह फैलाई गई, कि वो एक मुस्लिम अवैध अप्रवासी है, जिसकी वजह से हिंसा भड़क उठी।
सोशल मीडिया पर झूठे दावे किए गये, कि आरोपी रुदाकुबाना एक मुस्लिम अप्रवासी है, जिससे दक्षिणपंथी समर्थकों में गुस्सा भड़क गया। न्यायाधीश एंड्रयू मेनरी ने गलत सूचना के प्रसार से निपटने के लिए रुदाकुबाना की पहचान की, जिसके बारे में पता चला है, कि उसके माता पिता वेल्स में रहते हैं, जो रवांडा मूल के हैं।
अफवाह की आड़ में अप्रवासियों के खिलाफ गुस्सा
दक्षिणपंथी समूहों ने अपने आव्रजन विरोधी संदेश को बढ़ाने के लिए चाकू घोंपने की घटना का फायदा उठाया है और नारे लगाए, "बस बहुत हो गया" और "नावों को रोको"। इन नारों का इस्तेमाल करके ऑनलाइन प्रदर्शन आयोजित किए गए। प्रदर्शनकारियों ने झंडे लहराए और आव्रजन विरोधी नारे लगाए।
रिपोर्ट के मुताबिक, टॉमी रॉबिन्सन के नाम से मशहूर स्टीफन याक्सले-लेनन इन विरोध प्रदर्शनों को भड़काने वाले सबसे प्रमुख व्यक्ति रहे हैं।
इंग्लिश डिफेंस लीग (EDL) के पूर्व नेता रॉबिन्सन का कानूनी मुद्दों से पुराना नाता रहा है और वे सोशल मीडिया के माध्यम से दक्षिणपंथी लोगों के बीच काफी प्रसिद्ध रहते हैं। 2018 में ट्विटर ने उन्हें ब्लॉक कर दिया था, लेकिन जब एलन मस्क ने ट्विटर का अधिग्रहण किया, तो उनके अकाउंट को फिर से एक्टिव कर दिया गया।
रॉबिन्सन ने 2009 में EDL की सह-स्थापना की। यह समूह देखते ही देखते अपने इस्लाम विरोधी बयानबाजी और आक्रामक विरोध के लिए कुख्यात हो गया। रॉबिन्सन को हमले, अदालत की अवमानना और अन्य अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया है, लेकिन वह यूके में ध्रुवीकरण करने वाले प्रमुख व्यक्ति बन गये।
इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक डायलॉग (ISD) के जैकब डेवी ने कहा, "यूके बहुत अधिक विकेंद्रीकृत चरम-दक्षिणपंथी आंदोलन का सामना कर रहा है।"
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूके में पिछले कुछ सालों में मुस्लिमों की बढ़ती आक्रामकता के खिलाफ वहां मुस्लिम विरोधियों का एक वर्ग तैयार हो रहे हैं, जो इस्लाम और मुस्लिमों के खिलाफ ऑनलाइन नफरत फैलाते हैं।
रॉबिन्सन को साल 2018 में 'ग्रूमिंग गैंग' को लेकर चल रहे एक मुकदमे के दौरान कोर्ट के बाहर से लाइव स्ट्रीम करने की वजह से कोर्ट ने जेल भेज दिया था, जिसे उनके समर्थकों ने उनकी शहादत की तरह पेश किया।
उनके कारावास ने अंतरराष्ट्रीय विरोधों को जन्म दिया, समर्थकों ने दावा किया कि वे फ्री स्पीच देने के लिए शहीद हुए हैं। रॉबिन्सन लंदन में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व करते हुए सुर्खियों में बने रहते हैं। दक्षिणपंथियों की रैलियों के आयोजन में उनकी भागीदारी ने संभावित हिंसा और सार्वजनिक अव्यवस्था के बारे में चिंताएं बढ़ा दी हैं। रॉबिन्सन की बयानबाजी ने हाल ही में अशांति को बढ़ाया है, जिसमें सुंदरलैंड सेंट्रल लेबर एमपी लुईस एटकिंसन ने हिंसा को रॉबिन्सन के संगठन EDL के साथ जोड़ा है।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने हिंसा की निंदा की है और उन्होंने इस हिंसा को 'दक्षिणपंथियों की गुंडागर्दी' कहा है। उन्होंने कहा है, कि जान बूझकर मुस्लिमों को निशाना बनाया गया है और उन्होंने इस हिंसा में शामिल आरोपियों की पहचान करने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने के आदेश दिए हैं, ताकि गुनहगारों को सजा दी जा सके।












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